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मोदी सरकार के तीन साल, दिशा सही पर जाना है दूर

👤 admin5 | Updated on:2017-05-17 15:34:28.0
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रजनीकांत वशिष्ठ

पधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के तीन साल के राजकाज में देश की सवा सौ करोड़ आम जनता के लिए अच्छे दिन आए कि नहीं। इस बारे में जनता की नब्ज टटोली तो आवाज आई कि दिशा तो सही है पर जाना अभी दूर पड़ेगा। मोटे तौर पर लोगों को फिलवक्त लग रहा है कि देश की गद्दी पर बै"ा बंदा बेइमान नहीं है। इस दौरान मोदी सरकार ने क्या-क्या किया उसे थोड़े में समेटने की कोशिश करें तो यही समझ आता है कि गरीब समर्थक सरकार की छवि बड़े कायदे से गढ़ी गई जिस पर आम जन ने यकीन करके मुहर भी लगा दी।

या यूं भी कह सकते हैं कि मोदी सरकार अपने कदमों से जनता को यह यकीन दिलाने में कामयाब रही है कि जो भी फैसले वो ले रही है उससे गरीब को फायदा होगा। यही नहीं पिछली यूपीए सरकार ने भी जो गरीब के हित में फैसले लिए थे उन्हें अमल में लाने का काम भी मोदी सरकार ने किया है। एक पत्रकार की हैसियत से जन मन के बीच जाकर जो जान पाया उसके हिसाब से कुछ फैसले ऐसे रहे, जिससे लोगों को महसूस हुआ है कि अच्छे दिन भले अभी न आए हों पर अच्छे दिन आने की आस जगी है।

मोदी सरकार का एक फैसला जिसका संज्ञान सबसे पहले लेना चाहूंगा वो रहा स्वच्छ भारत अभियान। सवा सौ करोड़ की घनी आबादी वाले देश भारत के अंदर नागरिकों में स्वच्छता के लिए जागरुकता फैलाने वाले इस अभियान की जितनी पशंसा की जाए वो कम है। स्वच्छता के पति आम भारतीय की जो धारणा है वो बहुत ही कमजोर है। जो भारतीय नागरिक लंदन, न्यूयार्प, पेरिस या सिडनी की सड़कों पर कचरा फेंकने से पहले सौ बार सोचता है वही अपने देश को गंगोत्री से लेकर कन्याकुमारी तक कचरा घर बनाने में जरा भी शर्म महसूस नहीं करता बल्कि ऐसा करना वो अपनी शान समझता है। मोदी सरकार के इस काम से न केवल विदेशों में भारत की छवि में सुधार हुआ है बल्कि देश में गंदगी के कारण बीमारियों पर होने वाले आम आदमी के खर्च को कम किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी सखनऊ में ही पान और गुटके की पीक से लाल सरकारी कार्यालयों की सीढ़ियां अब साफ होने लगी हैं। पर बुरी आदतें देर से जाती हैं इस काम को कोई सरकार अकेले नहीं कर सकती, आम जन को अपनी बुरी आदतें बदलनी होंगी। खास बात ये है कि गरीबें को यह बात समझ में आने लगी है।

आम जन को मोदी सरकार के ये अभियान भले ही रोटी, कपड़ा और मकान की बुनियादी जरूरतें पूरी करने वाले न लगें पर जब नागरिक का शरीर स्वस्थ रहेगा तभी तो वो कुछ भोग पाएगा। इसके लिए मोदी ने पधानमंत्री के बजाय एक योगी की तरह सबको स्वस्थ बनाने की "ान ली। लो कर लो बात अब सरकार कसरत करवाएगी जैसे सवाल उ"ने लगे। गहराई से सोचा जाए तो मोदी ने योग को भारत के लिए ही नहीं विदेशों का पॉपुलर वेलनेस मंत्र बना दिया। स्वस्थ तन और मन से भविष्य का भारत बने इसके लिए मोदी सरकार ने योग के संस्कार बच्चों से डालने शुरू कर दिए। योग को ड्राइंग रूम से निकाल कर आम जन के बीच बाहर लाने में बाबा रामदेव के बाद यह मोदी की ही सफल पैरवी थी कि योग आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य की गारंटी के रूप में सामने है।

मोदी सरकार की बैंकों में गरीबों का खाता खुलवाने की जनधन योजना को भी गरीब ने हाथोंहाथ लिया। वो इसलिए कि आजादी के बाद से अब तक गरीब की पहुंच बैंक तक नहीं हो पाई थी। खासकर देश की 65 पतिशत ग्रामीण आबादी के गरीब शादी ब्याह, खेती पाती के कर्जे के लिए से" साहूकारों के चक्रवृद्धि ब्याज के चंगुल में ही फंसे हुए थे और बैंक में खाता खोलना दुश्वार हुआ करता था। इस जनधन योजना को मिले अपार जन समर्थन से न केवल देश के सरकारी बैंकों की खस्ता माली हालत में सुधार आया बल्कि गरीब को सरकार से राज सहायता सीधे खाते में पाने का रास्ता साफ हो गया। समर्थ लोगों से अनुरोध किया अपनी राज सहायता छोड़ो और काफी लोग मान भी गए। फिर पधानमंत्री मुद्रा योजना में जिस तरह से काम धंधा लगाने के लिए सस्ता ऋण बांटा गया। आवास योजना में ब्याज मुक्त ऋण दिलाया गया। उससे गरीबों को लगा कि ये सरकार हमारे लिए कुछ तो कर रही है जो "sस है।

मोदी सरकार को जिस युवा वर्ग ने सिर माथे पर बै"ाया था उसकी सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी थी। वो भी आज के टेक्नो युग में जहां रोबोट, कम्प्यूटर हाथ का काम छीन रहे हों। सबको रोजगार देना इस क्या किसी सरकार के बस में नहीं है। इस बीहड़ समस्या से निपटने के लिए मोदी सरकार ने एक नया फंडा सामने रख दिया कि नौकरी तलाशने के बजाय खुद नौकरी देने लायक बनो। स्टार्ट अप इंडिया और मेक इन इंडिया अभियान सामने लाए गए। रिस्पांस बहुत उत्साहवर्द्धक न हो पर देश के युवाओं को अपनी पतिभा को सामने लाने का एक अवसर तो दिखाई दिया। लगभग 7 करोड़ युवाओं ने अपना काम शुरू करने के लिए मुद्रा योजना में लोन लिया है। इसलिए अभी अच्छे दिन दिखाई न पड़ रहे हों पर यह तय है कि आने वाले समय में देश के युवा नौकरी देने लायक बन सकते हैं।

पधानमंत्री उज्जवला योजना का यहां जिक्र करना इसलिए जरूरी है कि इस योजना ने गांवों की आधी दुनिया को पभावित किया है। यह और बात है कि गांवों में खाना बनाने के ईंधन के मद में गांव के घरों का मासिक खर्चा बढ़ जाएगा। जो काम पहले गांव से मिलने वाली लकड़ी या गोबर के उपलों से मुफ्त में हो जाया करता था उसके लिए अब खर्चा करना होगा। पर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में एक क्रांति आ गई। ये सच है कि बैंक खाता खुलवाने में जो मुसीबत हुआ करती थी वैसी ही मुसीबत पहले एक अदद रसोई गैस सिलिंडर पाने में हुआ करती थी। आज इस उज्जवला योजना से गांवों में रहने वाली गरीब महिलाओं को धुंए से मुक्ति मिली है। यह भी एक ऐसा फैसला है जिससे गरीब खासकर ग्रामीण महिलाओं को लगा कि मोदी सरकार गरीबों की सरकार है। इन सबके उपर नोटबंदी का फैसला सामने आया जिसने देश के आम आदमी की सोच को बहुत गहराई के साथ पभावित किया। उस दौरान देश के जिस भी हिस्से में गया आम आदमी को बड़ा संतुष्ट और इत्मीनान से पाया। किसान, मजदूर, कामगार जिस किसी से भी उस दौरान बात हुई तो उसने पैसे के लिए थोड़ी परेशानी की बात तो कही पर यह भी कहा कि मोदी जो कर रहा है "rक कर रहा है। हमारे एक वरिष्ठ पत्रकार मित्र ने इसे गरीब का परपीड़ा सुख का अनुभव बताया। मतलब गरीब के पास तो पहले भी पांच सौ या हजार का नोट नहीं हुआ करता था पर जो बिस्तर, तकियों या तिजोरियों में नंबर दो का पैसा जमा किए बै"s थे उनका बंटाधार हो गया। नोट बदल गए, जो डर था कि विकास "प हो जाएगा वैसा भी नहीं हुआ। इस फैसले से गरीब खुश रहा या नाखुश इसका पता उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव नतीजों ने दे दिया।

मोदी सरकार के तीन सालों के कामकाज का आकलन करने पर एक और बात सामने आती है। वो ये कि पधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू के डेढ़ साल तो दुनिया में इंडिया की ब्रांडिग में लगे रहे। उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक या नोटबंदी जैसे फैसलों से उन्होंने आम जन को जहां चौंकाया वहीं गरीब को यह संदेश देने में कामयाब रहे कि यह सरकार उनके लिए काम करना चाहती है। पर चुनौतियां अभी बहुत बाकी हैं। सबसे बड़ी चुनौती किसान
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