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सबका विकास जरूरी

👤 | Updated on:2016-08-29 00:01:35.0
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 भारत लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। सिखों के एक दल जम्मू-कश्मीर  की मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया और कहा कि हमारे बच्चे लिखित में पास हो जाते हैं और इंटरव्यू में फेल हो जाते हैं। नौकरियां मुसलमानों को ही मिलती हैं। मिजोरम में रियांग हिन्दुओं का क्या हाल है वहां भी भ्रष्टाचार पूर्ण रूप से व्याप्त है। असल में अल्पसंख्यक सिख ढाई प्रतिशत भी नहीं हैं। फिर भी देश में हर क्षेत्र में अग्रणी बिना सरकारी संरक्षण के हैं। आगे बढ़ने के  लिए कट्टरता का त्याग जरूरी है। आज देश में शिक्षा, रोजगार के व्यापक अवसर हैं। सबका साथ-सबका विकास जरूरी है। -बीएल सचदेवा, 263, आईएनए मार्पिट, नई दिल्ली। इन पर भी हो कार्यवाही पिछले दिनों गौवंश की हत्या या उससे संबंधित मामलों पर देश कुछ ज्यादा ही गर्माया रहा। कुछ तथाकथित गौभक्तों या सेवकों ने खुद को सबसे बड़ा गौरक्षक डिक्लेयर करने का अभियान-सा चला रखा था। इस अभियान के तहत कुछ लोगों को उन स्वयंभू सेवकों ने सिर्प इसलिए सरेराह और सरेआम पीटा कि उनके पास से गायों की खाल बरामद हुई थी। कुछ गाड़ियों के चालकों को सिर्प इसलिए पीटा गया कि उनकी गाड़ियों में गाय या गौवंश से संबंधित प्राणी थे। बताइए खाल तो मरी हुई गाय की निकाली गई भी हो सकती है। उस गाड़ी वाले का क्या कसूर है जो अपने परिवहन के व्यापार के कारण ऐसे जानवरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहा है। वहां जाकर उन जानवरों का क्या किया जाना है हो सकता है कि उन चालकों और गाड़ी पर मौजूद लोगों को पता भी न हो लेकिन फिर भी बिना कसूर उनकी धुनाई कर दी जाती है। मुस्लिमों को भी सिर्प इसलिए पीट दिया जाता है क्योंकि उन पर बीफ खाने का संदेह रहता है। ये सब घटनाएं बड़ी विचित्र हैं। यहां एक बात किसी की समझ में नहीं कि चन्द पैसों की खातिर जो लोग गायों या गौवंश के अन्य प्राणियों को कसाइयों के हाथों बेचते हैं उनको दंडित क्यों नहीं किया जाता? असली आरोपी तो वे हैं। जब ऐसे लोगों को लगता है कि अब ये पशु किसी काम के नहीं रह गए तो वे उन्हें बोझ समझने लगते हैं और फिर कसाइयों को बेचना ही श्रेयस्कर समझते हैं। इस सारे कांड की जड़ वही लोग होते हैं और वही सुरक्षित बचे रहते हैं। सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए कि कोई भी व्यक्ति या गौवंश से संबंधित किसी भी जीव को मारने के लिए किसी को नहीं बेचेगा और यदि बेचेगा तो वह दंड का भागी होगा। इसके लिए अलग से कानून बनाए जाने की जरूरत है। सरकार को भी ऐसे केंद्र बनाने चाहिए जहां ऐसे पशुओं को सरकारी खर्च पर रखा जा सके। केवल बेकसूर लोगों को जबरन पीट-पीटकर आप चाहें कि गौहत्या या अत्याचार बंद हो जाएगा तो यह संभव नहीं है। -इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैंप, दिल्ली। चोरी-बेइमानी नहीं काम करो एक व्यक्ति मेरे दो पर्स चुरा चुका है। जिनमें कुछ हजार रुपए थे, विजिटिंग कार्ड्स, आवश्यक कागज, स्पीड पोस्ट की रसीदें भी ले लेता है और खाली पर्स घर में फेंक देता है। चोरी-बेइमानी नहीं काम करो। बड़े-बड़े उद्योगप]ित भी कभी खाकपति थे। श्रम करो। धर्म सार तत्व समझते ही डाकू भी संत बन जाते हैं। -रजत कुमार, 278, भूड़, बरेली, (उप्र)। आखिर वंदे मातरम् से प्यार क्यों नहीं? समूचे विश्व का कोई भी नागरिक जिसको राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् से प्यार नहीं उस नागरिक को आजाद हिन्द देश में रहने का कोई अधिकार नहीं। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का हर वक्त सम्मान करो। इसके महत्व को समझकर, हिन्द देश के राष्ट्रवान बनो। इसी में भलाई है सभी लोगों की। इसी का गुणगान करो। सबसे बड़े उत्तम राष्ट्रीय धर्म है देश सेवा, देश सेवा करके हिन्द देश का उत्तम नाम करो। मातृभूमि, पितृभूमि है हिन्द देश, जहां जिसने जन्म लिया इसके प्रति हमेशा निष्ठावान बनों। यही संदेश है हमारा राष्ट्रीय दैनिक वीर अर्जुन के माध्यम से। वीर सपूत, विक्रम चन्द चटर्जी का हमेशा दिल से मान-सम्मान करो। अगर सचमुच निष्ठावान, राष्ट्रवादी व हिन्द देश के वासी हो तो हिन्द देश की एकता, अखंडता व प्रभुसत्ता का सम्मान करो। -देशबंधु, उत्तम नगर, नई दिल्ली। ऐसी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की जरूरत भारत देश में जो वास्तव में शिक्षा में टॉपर है वह किसी अच्छे तकनीकी संस्थान, प्रबंध और मेडिकल कॉलेज से शिक्षा लेकर फौरन विदेश निकल जाता है। फिर कभी भारत की ओर रुख नहीं करता। प्रथम श्रेणी में पास किसी बैंक में पीओ या सरकारी उपक्रम में नौकरी पाकर आईएएस या आईपीएस की तैयारी में जुट जाता है बन गया तो हाथों में लड्डू की लड्डू। शादी में उसकी बोली दो करोड़ रुपए से शुरू होती है। द्वितीय श्रेणी पास या तो एलएलबी करके वकील बन जाता है या किसी कार्यालय में बाबू या किसी कंपनी का सेल्समैन या एलआईसी का एजेंट। तृतीय श्रेणी पास कहीं नहीं जाता राजनीति में चरणचुंबन, गणेश परिक्रमा या अन्य अनुचित साधनों का प्रयोग के बाद विधायक सांसद बन जाता है -आनंद मोहन भटनागर, लखनऊ।

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