Home » आपके पत्र » ऑनलाइन दाम इतने कम होते कैसे हैं?

ऑनलाइन दाम इतने कम होते कैसे हैं?

👤 | Updated on:2016-09-27 00:20:19.0
Share Post

   ऑनलाइन खरीदारी पर ग्राहकों को जो छूट मिल रही है वह ऑफलाइन विकेताओं के लिए देना संभव ही नहीं है। कई बार ऑनलाइन सेल में सामान उस कीमत से भी कम में मिल जाता है जिस पर विकेता खरीदते हैं। आखिर क्या गणित है इस सबके पीछे? यह बता रहे हैं टेक्नोलॉजी लेखक प्रशांतो कुमार रॉय ऑनलाइन खुदरा बाजार पर विशेष श्रृंखला की दूसरी कड़ी में। धनतेरस पर, दिवाली की शुरुआत के पहले दिन जब भारतीय धातु की चीजें खरीदते हैं, मैंने एक इंडक्शन कुकर खरीदा- ऑनलाइन। अमेजन डॉट इन पर दिवाली के एक विशेष ऑफर में मैंने सिर्प 3,000 रुपए दिए- यह उसके डिब्बे पर लिखी कीमत की आधी राशि थी। डिलीवरी तो मुफ्त थी ही। उसी दिन दिल्ली की एक बड़ी खुदरा दुकान पर वही उत्पाद 4,500 रुपए में बिक रहा था। उस व्यापारी ने मुझे बताया कि वह इसे उत्पादक, जो एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी है, से ही 4000 रुपए में खरीद रहे थे। अक्तूबर की शुरुआत में फ्लिपकार्ट की `बिग बिलियन डे' सेल में भारी छूट के साथ करीब 15 लाख उपभोक्ताओं को 10 करोड़ डॉलर का सामान बेचा गया। कई लोग और खरीदना चाहते थे लेकिन वेबसाइट कैश कर गई और कंपनी के संस्थापकों को ग्राहकों से माफी मांगनी पड़ी, जिसकी वजह कीमतों में गड़बड़ी भी शामिल थी। इसके तुरंत बाद अमेजन इंडिया ने अपने `दिवाली धमाका वीक' की घोषणा कर दी, जो कि खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर रहा। ऑनलाइन सेल के बाद उपभोक्ता सेल में मिलने वाले दामों को लेकर हतप्रभ रह गए। दिवाली से पहले गुड़गांव की एक उद्यमी पूर्वा राकेश ने स्नैपडील से 60… छूट पर काल्विन क्लाइन और अन्य परफ्यूम खरीदे थे। वह पूछती हैं कि वे ये करते कैसे हैं? वह इंटरनेट को ज्यादा समय नहीं देतीं, लेकिन उन्होंने टीवी चैनलों पर `एक खरीदो एक मुफ्त' के विज्ञापन देखे, फिर कोशिश की और बस अटक गईं। तब से वह हैंडबैग खरीद चुकी हैं और 80… छूट पर तकियों का ऑर्डर दे चुकी हैं। लेकिन हमेशा खबर अच्छी नहीं होती। पूर्वा को कुछ ऑर्डर मिलने में बहुत देर हुई है और उन्हें रद्द करने, पैसा वापस पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। वह कहती हैं कि अमेजन बेहतर है। लेकिन उनकी कीमतें बहुत कम नहीं होतीं। हालांकि खरीदार तो सेल के मजे लूट रहे हैं लेकिन बाकी लोगों को कम कीमतों की चिंता है। इसमें सामान बनाने वाली कंपनियां और उसे बेचने वाले उनके नियमित वितरक और डीलर्स। उनका कहना है कि ये ई-टेलर्स अपने भारी निवेश के चलते सामान पर सब्सिडी दे रहे हैं। इससे संबंधित एक और खबर है कि अक्तूबर के अंत में सॉफ्टबैंक ने भारत में ई-कॉमर्स के क्षेत्र में दस साल में 10 अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया है। इस जापानी टेलीकॉम और मीडिया ग्रुप ने भारत की शीर्ष ई-रिटेल कंपनी स्नैपडील में 62.70 करोड़ डॉलर की हिस्सेदारी के चलते इस निवेश की योजना बनाई है। इस राशि से सॉफ्टबैंक को स्नैपडील में 30… हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। यह ऐलान भारत के दो शीर्ष ई-टेलर्स फ्लिपकार्ट के एक अरब डॉलर और उसके अगले दिन अमेजन के दो अरब डॉलर की `भारी राशि' वाली घोषणाओं के तीन बाद हुआ है। वह दरअसल बाजार हैं जो अन्य विकेताओं को सामान बेचने की सुविधा देते हैं। -नरेश कुमार शर्मा, आजादपुर, दिल्ली।        

Share it
Top