वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

संकट के दौर में देश को अस्थिर करने की तेज होती चालें

प्रकाशित: 25-05-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
डा. रवीन्द्र अरजरिया
समूचा संसार अशान्ति की विभीषिका के मध्य तड़फ रहा है। मानव सहित सभी जीव अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत है। प्रकृति, पर्यावरण और वातावरण चारों ओर से हाहाकार कर रहा है। मौत का दावानल भयानक ठहाके लगा रहा है। ऐसे में दुनिया का एक बडा समूह लाशों पर शासन करने का मंसूबा पूरा करने के लिए तूफानी प्रयास करने में जुटा है। अनेक देशों को अशान्ति, असुरक्षा और अस्थिर करने वाली यह षड़यंत्रकारी जमातें अब नित नई चालें चल रहे हैं। कट्टरता से लेकर कुटिलता तक के सभी हथकण्डे आजमाये जा रहे हैं। शासक बनने की चाहत रखने वाले भितरघाती मीरजाफरों की संख्या में निरंतर इजाफा होता जा रहा है। डीप स्टेट, आतंकी नेटवर्क और हथियार माफियों के गिरोहों को एक बार फिर रेखांकित करने की आवश्यकता है। नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका अनेक देशों में जेन जी को हथियार बनाकर भितरघातियों के भूमिगत गिरोहों को निर्माण किया गया और फिर सीमापार बैठे षड़यंत्रकारियों ने अपनों से ही अपनों के विरुद्ध खूनी संघर्ष करवा दिया। हथियार, धन, संसाधन सहित सभी आवश्यकताओं की आपूर्ति करने वालों ने पीडित देशों के विदेशों में पढने वाले छात्रों को मुहरा बनाया और फिर अनेक डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग करके अपना लक्ष्य भेदन कर लिया। ऐसे ही प्रयास भारत में भी राजनैतिक गलियारों के माध्यम से अनेक बार किये जा चुके हैं। तेजी से विकसित हो रहे हिन्दुस्तान को पतन के गर्त में डुबोने हेतु षडयंत्रकारियों ने अपनी कठपुतलियों को सत्ता पर बैठाने के लिए एक बार पुन प्रयास शुरू कर दिया। उल्लेखनीय है कि विगत 15 मई 2026 को कथित रूप से उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय सूर्यकान्त ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कहा कि कॉकरोच जैसे युवा हैं, जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता है या किसी पेशे में कोई जगह नहीं है। उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं और कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं। और वे सभी पर हमला करने लगते हैं। इस वक्तव्य को अवसर मानकर अमेरिका ने अपनी बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले पूना निवासी अभिजीत दिपके को ठीक उसी तरह नेता बनाकर भारत पर थोप दिया जिस तरह से ब्रिटेन ने कांग्रेस और महात्मा गांधी के जन-आंदोलनों का विरोध करने के लिए जिन्ना का राजनैतिक कद बढाया और फिर मुस्लिम लीग को स्थापित कर दिया था। ठीक इसी प्रकार बांग्लादेश में हालात पैदा किये गये। नेपाल में भी अस्थिरता लाने हेतु जेन जी को भडकाया गया। श्रीलंका में आन्तरिक कलह के सूत्रधार भी सीमापार के सफेदपोश अपराधी ही रहे हैं। अन्ना आन्दोलन के दौरान स्वयं को स्थापित करने में सफल रहे अरविन्द केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाकर देशवासियों को अपनी ईमानदारी, दूरदर्शिता और अनुभवगत परिपक्वता दिखाकर सफलता प्राप्त की। समय के साथ सब कुछ सामने आता चला गया। आम आदमी पार्टी के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से काम करने वाले महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के निवासी भगवान दीपके - अनीता दीपके के 30 वर्षीय पुत्र अभिजीत दीपके को सीमापार के षडयंत्रकारियों ने पहले से ही चिन्हित कर रखा था। आम आदमी पार्टी का ग्राफ नीचे जाते ही अमेरिका ने अभिजीत को पढ़ाई के नाम पर अमेरिका बुलावा लिया। मध्यमवर्गीय परिवार के अभिजीत को अमेरिका भेजने, वहां पढ़ाई करने तथा वहां के खर्चे उठाने के लिए कौन और क्यों मदद कर रहा है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर खोजे बिना पूरा खेल समझा ही नहीं जा सकता। जिस देश में अनेक प्रतिभायें अभावग्रस्त होकर दम तोड रहीं हों वहां की एक राजनैतिक पार्टी का सािढय कार्यकर्ता अपनी उच्चस्तरीय पढ़ाई के लिए अचानक अमेरिक चल जाता है। वहां की खर्चीली जिन्दगी जीता है और फिर भारत की राजनीति में योजनाबद्ध ढ़ंग से कदम रखने के लिए प्रयास शुरू कर देता है। भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के वक्तव्य के बाद अगले ही दिन अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट किया कि क्या होगा अगर सभी तिलचट्टे यानी कॉकरोच एक साथ आ जाएं? इसी के साथ काकरोच जनता पार्टी बनाई गई। वेबसाइट और सदस्यता के लिए गूगल फॉर्म भी लांच किये गये। लांचिंग के साथ ही पर्दे के पीछे से सािढय आकाओं ने अपने मुहरे चलने शुरू कर दिये। समर्थकों की भीड के नये कीर्तिमान गढ़े जाने लगे। आंकडों का ग्राफ गगनचुम्बी बनाया जाने लगा। टेलीग्ऱाफ, द गार्डियन, अल जज़ीरा, रॉयटर्स, खलीज टाइम्स जैसे अन्तर्राष्ट्रीय पत्रकारिता संस्थानों सहित देश के इण्डिया टुडे ने अभिजीत दीपके के साक्षात्कार प्रकाशित-प्रसारित किये। फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए देश के विपक्षी दलों ने भी सीमापार के षड़यंत्रकारियों की खासी मदद की। जेन जी को भड़काने, वास्तविकता को नकारने तथा अशान्ति का वातावरण पैदा करने जैसे कारक पर्दे के पीछे से तूफानी रफ्तार से आगे बढ़ने लगे। अभिजीत दीपके ने स्वयं स्पष्ट किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से कुछ लोग प्रोटेस्ट करने का प्लान बना रहे हैं। लेकिन इस कैंपेन का अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है। सरकार इंतजार कर रही है कि कोई मौका मिला ताकि कार्रवाई की जा सके और इस मूवमेंट को बदनाम करे। ये लंबी लड़ाई है। हमें जब भी कोई क़दम उठाना होगा, हम बहुत सोच-समझ कर उठाएंगें। इस पूरे वक्तव्य का अर्थ पूरी तरह से स्पष्ट है कि आग के प्रचण्ड होते ही इस लम्बी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जायेगा। एक अन्य वक्तव्य में उसने जोहरान ममदानी का हवाला देते हुए लिखा है कि जोहरान ममदानी, एक गुजराती मुस्लिम ने अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित चुनावों में से एक में जीत हासिल की है और दुनिया के सबसे बड़े शहर के मेयर बने हैं। सवाल यह है कि क्या मोदी शासन के तहत भारत में कोई गुजराती मुस्लिम ऐसा कर सकता है? अल्पसंख्यकों, बेरोजगारों, युवाओं और एक विशेष वर्ग को प्रभावित करने के लिय ऐसे अनेक प्रयास मूर्त रूप ले रहे हैं। इन प्रयासों के पीछे की शक्ति, सामर्थ और नियत साफ दिखाई पड़ रही है। ऐसे में देश के अन्दर बैठे मीरजाफरों की फौज आग में निरंतर घी डालने का काम करके जेन जी के कन्धे पर रखकर नेपाल, बांग्लादेश जैसी स्थितियां निर्मित करने में जुटी है। विश्व संकट के मध्य देश को अस्थिर करने की चालें एक बार फिर सीमापार से तेज हो चुकीं हैं जिन्हें नेस्तनाबूद करने हेतु आम आवाम को स्वविवेक का सहारा लेकर राष्ट्रहित में सक्रिय होना ही होगा तभी विदेशी धरती से देश को धमकाने की कोशिशें विफल हो सकेंगी।