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उज्बेकिस्तान ने भारतीय निवेश बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहनों की पेशकश की

प्रकाशित: 25-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। उज्बेकिस्तान ने भारत सहित विभिन्न देशों की वित्तीय प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और डिजिटल बुनियादी ढांचा कंपनियों के लिए लक्षित प्रोत्साहनों के साथ कारोबार-अनुकूल माहौल तैयार किया है। उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग एवं व्यापार उप मंत्री शोखरुख गुलामोव ने यह जानकारी दी।
गुलामोव ने पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों, संयुक्त उपक्रमों और डिजिटल बुनियादी ढांचा निवेश को समर्थन देने वाली सरकारी नीतियों ने उज्बेकिस्तान को निवेश के लिहाज से और आकर्षक बनाया है। उन्होंने कहा कि इन फायदों का उपयोग करके भारतीय कंपनियां पारंपरिक दक्षिण एशियाई केंद्रों से आगे बढ़कर अपने कारोबार से जुड़ी सेवाओं और प्रक्रियाओं को दूसरे देशों में संचालित करने की व्यवस्था का विस्तार कर सकती हैं, लागत ढांचे को बेहतर बना सकती हैं और उच्च मूल्य वाली सेवाओं का समर्थन करने में सक्षम प्रतिभाशाली कार्यबल तक पहुंच बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि इससे उज्बेकिस्तान क्षेत्रीय प्रौद्योगिकी विस्तार के लिए रणनीतिक आधार के रूप में उभर रहा है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी मजबूत हो रहा है। गुलामोव ने कहा, उज्बेकिस्तान वित्तीय प्रौद्योगिकी , एआई और डिजिटल बुनियादी ढांचा कंपनियों को लक्षित प्रोत्साहन उपलब्ध करा रहा है। इनमें रियायती कर व्यवस्था, तैयार डिजिटल अवसंरचना वाले विशेष आर्थिक क्षेत्रों तक पहुंच और प्रायोगिक परियोजनाओं के लिए नियामकीय समर्थन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय सेवाओं, ई-गवर्नेंस और स्मार्ट सिटी पहल में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा दे रही है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए एआई और वित्तीय प्रौद्योगिकी समाधान लागू करने के अवसर पैदा हो रहे हैं।
गुलामोव ने कहा कि वर्ष 2025 तक दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2024 की तुलना में 33.30 प्रतिशत अधिक है। इसमें निर्यात 16.46 करोड़ डॉलर रहा, जो 25.4 प्रतिशत अधिक है, जबकि आयात 1.15 अरब डॉलर रहा, जिसमें 34.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि 2026 की शुरुआत में व्यापार मात्रा 30 करोड़ डॉलर रही, जो मौसमी उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूत रफ्तार को दर्शाती है।