पीओके हिंसा पर पाक को जवाबदेह ठहराए दुनियाः भारत
प्रकाशित: 10-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लोगों के साथ की गई बर्बरता के लिए भारत ने मंगलवार को इस्लामाबाद की कड़ी आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह उस देश को उसके अत्याचारों के लिए जवाबदेह "हराए।
पीओके के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में कथित तौर पर 20 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद भारत की प्रतिक्रिया आई है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग-अलग बताई जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से ध्यान भटकाने की हताशा भरी कोशिशें की हैं। उन्होंने कहा, इस संदर्भ में, हम पाकिस्तान से आने वाली फेक न्यूज और वीडियो का एक चलन लगातार देख रहे हैं। यह पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की एक हताशा भरी कोशिश है। जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की भारी बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों और ज्यादतियों के लिए जवाबदेह "हराएगा। वह प्रेस वार्ता में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
पीओके में पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही बर्बरता से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। रावलाकोट में सोमवार को हुई फायरिंग की घटना में 110 से ज्यादा नागरिकों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 300 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिसके चलते मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। आज भी जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की ओर से प्रदर्शन की अपील की गई थी। खबरें मिली हैं कि कोटली में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज में 11 नागरिकों की मौत हो गई है। हालांकि अलग-अलग स्रोतों द्वारा मरने वालों की संख्या अलग-अलग बताई जा रही है। इस बीच जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) के समर्थक रावलाकोट की मस्जिदों से लगातार ऐलान कर रहे हैं कि ‘कश्मीर' पर विदेशी ताकतों ने हमला किया है और लोगों से बड़ी संख्या में बाहर निकलकर मुकाबला करने की अपील की जा रही है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक रावलाकोट में सोमवार को हुए बवाल में तीन पुलिसकर्मियों को पंजाब रेंजर्स ने कथित तौर पर गोली मार दी, इनमें एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल है। दावा किया जा रहा है कि इन पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर फायरिंग रोकने की कोशिश की थी। दरअसल पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जुलाई के महीने में चुनाव होने हैं। इससे पहले यहां मांग की जा रही है कि इस क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। ये इलाका लंबे वक्त से अपने लिए मूलभूत सुविधाओं और राजनैतिक प्रतिनधित्व की जंग लड़ रहा है। इस बार जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी अपनी मांगें रख रही है 9 जून यानि आज ही के दिन जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की ओर से लंबे मार्च का आह्वान किया गया था।
यही वजह है कि पूरे इलाके में इंटरनेट ब्लैकआउट किया जा चुका है, ताकि लोग एक जगह पर इकट्ठे न हों। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए रेंजर्स की भारी फौज तैनात की गई थी। इन्होंने एक प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस से भिड़ंत होने पर पहले अवाम पर फायरिंग कर दी और आज प्रदर्शनों के दौरान भी गोलीबारी और लाठीचार्ज की खबरें आ रही हैं।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लोगों के साथ की गई बर्बरता के लिए भारत ने मंगलवार को इस्लामाबाद की कड़ी आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह उस देश को उसके अत्याचारों के लिए जवाबदेह "हराए।
पीओके के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में कथित तौर पर 20 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद भारत की प्रतिक्रिया आई है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग-अलग बताई जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से ध्यान भटकाने की हताशा भरी कोशिशें की हैं। उन्होंने कहा, इस संदर्भ में, हम पाकिस्तान से आने वाली फेक न्यूज और वीडियो का एक चलन लगातार देख रहे हैं। यह पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की एक हताशा भरी कोशिश है। जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की भारी बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों और ज्यादतियों के लिए जवाबदेह "हराएगा। वह प्रेस वार्ता में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
पीओके में पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही बर्बरता से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। रावलाकोट में सोमवार को हुई फायरिंग की घटना में 110 से ज्यादा नागरिकों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 300 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिसके चलते मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। आज भी जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की ओर से प्रदर्शन की अपील की गई थी। खबरें मिली हैं कि कोटली में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज में 11 नागरिकों की मौत हो गई है। हालांकि अलग-अलग स्रोतों द्वारा मरने वालों की संख्या अलग-अलग बताई जा रही है। इस बीच जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) के समर्थक रावलाकोट की मस्जिदों से लगातार ऐलान कर रहे हैं कि ‘कश्मीर' पर विदेशी ताकतों ने हमला किया है और लोगों से बड़ी संख्या में बाहर निकलकर मुकाबला करने की अपील की जा रही है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक रावलाकोट में सोमवार को हुए बवाल में तीन पुलिसकर्मियों को पंजाब रेंजर्स ने कथित तौर पर गोली मार दी, इनमें एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल है। दावा किया जा रहा है कि इन पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर फायरिंग रोकने की कोशिश की थी। दरअसल पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जुलाई के महीने में चुनाव होने हैं। इससे पहले यहां मांग की जा रही है कि इस क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। ये इलाका लंबे वक्त से अपने लिए मूलभूत सुविधाओं और राजनैतिक प्रतिनधित्व की जंग लड़ रहा है। इस बार जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी अपनी मांगें रख रही है 9 जून यानि आज ही के दिन जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की ओर से लंबे मार्च का आह्वान किया गया था।
यही वजह है कि पूरे इलाके में इंटरनेट ब्लैकआउट किया जा चुका है, ताकि लोग एक जगह पर इकट्ठे न हों। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए रेंजर्स की भारी फौज तैनात की गई थी। इन्होंने एक प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस से भिड़ंत होने पर पहले अवाम पर फायरिंग कर दी और आज प्रदर्शनों के दौरान भी गोलीबारी और लाठीचार्ज की खबरें आ रही हैं।