भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द देंगे अंतिम रूप
प्रकाशित: 25-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्के रूबियो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी और टिकाऊ होगा तथा भारत-अमेरिका के पारस्परिक हितों को आगे बढ़ाएगा।
भारत की यात्रा पर आए रूबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता के बाद यह टिप्पणी की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री की यह पहली भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पिछले एक वर्ष में टैरिफ नीतियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखने को मिला। रूबियो ने कहा, हमने काफी प्रगति की है और मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसा व्यापार समझौता होगा जो लंबे समय तक कायम रहेगा, यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति किसी खास देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वैश्व्कि व्यापार व्यवस्था के प्रति अमेरिका के दृष्टिकोण को संतुलित करना है। राष्ट्रपति ने यह नहीं कहा कि भारत के साथ व्यापार को लेकर तनाव पैदा किया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की व्यापार व्यवस्था में असंतुलन है और इसे "ाrक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है और दुनिया के लगभग हर देश के साथ बातचीत में व्यापार असंतुलन का विषय सामने आया है। रूबियो ने कहा, अच्छी बात यह है कि इस संतुलन प्रक्रिया के जरिए हम ऐसे व्यापारिक समझौतों तक पहुंचना चाहते हैं जो अमेरिका के साथ-साथ हमारे व्यापारिक साझेदारों के लिए भी लाभकारी हों। हमें उम्मीद है कि भारत के साथ भी ऐसा समझौता जल्द होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द भारत आ सकते हैं ताकि प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
भारत-अमेरिका संबंधों की गति धीमी नहीं पड़ी है : रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों की गति धीमी नहीं पड़ी है।रूबियो ने कहा, भारत एवं अमेरिका के संबंधों की गति धीमी नहीं पड़ी है... भारत और अमेरिका के संबंध आगामी वर्षों में और मजबूत होकर उभरेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच काफी समय से लंबित व्यापार समझौता जल्द ही मूर्त रूप ले लेगा। रूबियो ने यह भी कहा कि लगभग सभी प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर दोनों पक्ष रणनीतिक रूप से एकमत हैं। जयशंकर ने बै"क के बाद कहा कि भारत निर्बाध समुद्री व्यापार का पक्षधर है। बै"क में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी विचार-विमर्श किया गया।
जयशंकर ने कहा, हमने पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की स्थिति पर चर्चा की। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ असैन्य परमाणु सहयोग पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा, मैंने और विदेश मंत्री रूबियो ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच हालिया सहयोग का स्वागत किया।
नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्के रूबियो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी और टिकाऊ होगा तथा भारत-अमेरिका के पारस्परिक हितों को आगे बढ़ाएगा।
भारत की यात्रा पर आए रूबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता के बाद यह टिप्पणी की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री की यह पहली भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पिछले एक वर्ष में टैरिफ नीतियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखने को मिला। रूबियो ने कहा, हमने काफी प्रगति की है और मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसा व्यापार समझौता होगा जो लंबे समय तक कायम रहेगा, यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति किसी खास देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वैश्व्कि व्यापार व्यवस्था के प्रति अमेरिका के दृष्टिकोण को संतुलित करना है। राष्ट्रपति ने यह नहीं कहा कि भारत के साथ व्यापार को लेकर तनाव पैदा किया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की व्यापार व्यवस्था में असंतुलन है और इसे "ाrक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है और दुनिया के लगभग हर देश के साथ बातचीत में व्यापार असंतुलन का विषय सामने आया है। रूबियो ने कहा, अच्छी बात यह है कि इस संतुलन प्रक्रिया के जरिए हम ऐसे व्यापारिक समझौतों तक पहुंचना चाहते हैं जो अमेरिका के साथ-साथ हमारे व्यापारिक साझेदारों के लिए भी लाभकारी हों। हमें उम्मीद है कि भारत के साथ भी ऐसा समझौता जल्द होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द भारत आ सकते हैं ताकि प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
भारत-अमेरिका संबंधों की गति धीमी नहीं पड़ी है : रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों की गति धीमी नहीं पड़ी है।रूबियो ने कहा, भारत एवं अमेरिका के संबंधों की गति धीमी नहीं पड़ी है... भारत और अमेरिका के संबंध आगामी वर्षों में और मजबूत होकर उभरेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच काफी समय से लंबित व्यापार समझौता जल्द ही मूर्त रूप ले लेगा। रूबियो ने यह भी कहा कि लगभग सभी प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर दोनों पक्ष रणनीतिक रूप से एकमत हैं। जयशंकर ने बै"क के बाद कहा कि भारत निर्बाध समुद्री व्यापार का पक्षधर है। बै"क में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी विचार-विमर्श किया गया।
जयशंकर ने कहा, हमने पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की स्थिति पर चर्चा की। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ असैन्य परमाणु सहयोग पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा, मैंने और विदेश मंत्री रूबियो ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच हालिया सहयोग का स्वागत किया।