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प्रधानमंत्री मोदी ने ईंधन संरक्षण में उदाहरण पेश करते हुए काफिले का आकार घटाया

प्रकाशित: 14-05-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
प्रधानमंत्री मोदी ने ईंधन संरक्षण में उदाहरण पेश करते हुए काफिले का आकार घटाया
वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन संरक्षण के लिए जनता से अपील की और खुद इसका उदाहरण पेश करते हुए अपने आधिकारिक काफिले के आकार को कम कर दिया है। यह कदम उनके हैदराबाद भाषण के तुरंत बाद गुजरात और असम की यात्राओं के दौरान लागू किया गया।
हैदराबाद में हाल ही में दिए गए भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से ईंधन की बचत के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, कारपूलिंग अपनाने, अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने, सोने की खरीदारी कम करने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया (ईरान संकट) से उत्पन्न वैश्विक तेल संकट के कारण भारत को सतर्क रहना चाहिए। अब खुद प्रधानमंत्री ने स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एझ्उ) को निर्देश देते हुए काफिले में वाहनों की संख्या आधी करने को कहा है।
सुरक्षा बरकरार, ईंधन की बचत सूत्रों के अनुसार, काफिले में वाहनों की संख्या घटाई गई है, लेकिन एझ्उ प्रोटोकॉल के तहत सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी तरह बरकरार रखी गई हैं। जहां संभव हो, इलेक्ट्रिक वाहनों (न्निं्) को शामिल करने पर भी जोर दिया जा रहा है, बिना नए वाहन खरीदे। यह कदम न केवल ईंधन की बचत करेगा, बल्कि सरकारी विभागों और राज्यों के लिए भी एक मिसाल बनेगा। कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री भी इसी तर्ज पर अपने काफिलों को छोटा कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री का यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' और 'सतत विकास' की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। आम नागरिकों को होने वाली ट्रैफिक जाम की समस्या भी इससे कम होगी, क्योंकि न्न्घ्झ् आवागमन के दौरान लंबी कतारें अक्सर आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं।
विपक्षी आलोचना और समर्थन कुछ विपक्षी दलों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं, लेकिन आम जनता और विशेषज्ञ इसे सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं। जब नेता खुद संयम बरतते हैं, तो जनता पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। केंद्र सरकार ने अन्य मंत्रालयों और विभागों को भी ईंधन बचत के उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह रवैया 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' और पर्यावरण संरक्षण की उनकी प्रतिबद्धता को दोहराता है। वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के कच्चे तेल आयात पर असर के बीच यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
ईंधन संरक्षण केवल एक अपील नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे शब्दों से आगे बढ़कर कर्म में उतारा है। यदि हर नागरिक, नेता और विभाग इस उदाहरण को अपनाए, तो भारत न केवल ऊर्जा सुरक्षा हासिल करेगा, बल्कि आत्मनिर्भरता की राह पर और मजबूती से आगे बढ़ेगा।
जय हिंद!