वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

अन्नामलाई का नया मोड़: बीजेपी छोड़कर ‘मक्कल सक्थि इयक्कम' की तैयारी, तमिलनाडु राजनीति में भूचाल?

प्रकाशित: 02-06-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
अन्नामलाई का नया मोड़: बीजेपी छोड़कर ‘मक्कल सक्थि इयक्कम' की तैयारी, तमिलनाडु राजनीति में भूचाल?
आदित्य नरेन्द्र
तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों गरम है। पूर्व बीजेपी राज्य अध्यक्ष के. अन्नामलाई बीजेपी छोड़कर मक्कल सक्थि इयक्कम (लोगों की शक्ति आंदोलन) शुरू करने की तैयारी में हैं। उनकी जन्मतिथि 4 जून को इसकी घोषणा संभव है। यह खबर 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद आई है, जहां टीवीके ने अभिनेता विजय के नेतृत्व में बड़ी जीत हासिल की।
अन्नामलाई, जिन्हें ‘कर्नाटक का सिंघम' कहा जाता था, 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे। 2019 में इस्तीफा देकर राजनीति में आए और 2020 में बीजेपी जॉइन की। 2021 में राज्य अध्यक्ष बने और 2024 में लोकसभा में बीजेपी का वोट शेयर 12ज्ञ् तक पहुंचाया। लेकिन 2026 चुनावों में गठबंधन रणनीति और सीट बंटवारे पर असंतोष के चलते वे पार्टी से दूरी बना रहे हैं।
दिल्ली बैठक और इस्तीफे की अटकलें
अन्नामलाई दिल्ली में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करने जा रहे हैं। यह बैठक उनके भविष्य के लिए निर्णायक मानी जा रही है। अगर स्वायत्तता नहीं मिली तो वे इस्तीफा दे सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 2 जून तक इस्तीफे की बात कही जा रही है।
मक्कल सक्थि इयक्कम क्या होगा?
यह आंदोलन शुरुआत में पूर्ण पार्टी नहीं, बल्कि ग्रासरूट जन आंदोलन के रूप में शुरू होगा। युवाओं को जोड़ना, नेतृत्व विकास और सामुदायिक मुद्दों पर फोकस रहेगा। समर्थक इसे ‘क्लीन पॉलिटिक्स' और तमिल हितों का नया विकल्प मान रहे हैं। डीएमके का रिएक्शन, डीएमके ने अन्नामलाई के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। डीएमके के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अन्नामलाई बीजेपी की ‘बी-टीम' की तरह काम कर रहे थे और अब स्वतंत्र रूप से भी वे तमिलनाडु की द्रविड़ संस्कृति और सेकुलर मूल्यों के खिलाफ खड़े हैं। एक डीएमके नेता ने कहा, अन्नामलाई का नया आंदोलन बीजेपी-आरएसएस की पुरानी साजिश का हिस्सा है। वे तमिलनाडु में हिंदुत्व थोपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता ने 2026 चुनावों में साफ संदेश दे दिया है कि यहां द्रविड़ मॉडल ही चलेगा।
डीएमके सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई के आक्रामक अंदाज और पूर्व में डीएमके पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पार्टी उन्हें ‘बीजेपी का चेहरा' मानती है। डीएमके ने चेतावनी दी है कि कोई भी नया आंदोलन अगर केंद्र की नीतियों (जैसे तीन भाषा नीति) को बढ़ावा देगा तो उसे राज्य की एकता के खिलाफ माना जाएगा। डीएमके के कुछ नेता इसे ‘अन्नामलाई का अकेलापन' बता रहे हैं और कह रहे हैं कि टीवीके की जीत के बाद बीजेपी खेमे में बिखराव साफ दिख रहा है। समर्थन और विरोध: अन्नामलाई के युवा समर्थक उत्साहित हैं। वे उन्हें ईमानदार और साहसी नेता मानते हैं। सोशल मीडिया पर क्ष्Aहहस्aत्aग्श्दनसहू ट्रेंड कर रहा है। वहीं बीजेपी के कुछ नेता उन्हें राष्ट्रीय भूमिका की सलाह दे रहे हैं। विश्लेषक मानते हैं कि अन्नामलाई द्रविड़ पार्टियों और टीवीके के बीच नया विकल्प बन सकते हैं।
तमिलनाडु राजनीति का भविष्य
2026 चुनावों ने समीकरण बदले हैं। एआईएडीएमके संकट में है और डीएमके विपक्ष में। अन्नामलाई का स्वतंत्र रास्ता नई धारा पैदा कर सकता है। अगर नई पार्टी बनी तो यह हिंदुत्व और तमिल पहचान को जोड़ने वाला मॉडल हो सकता है। अन्नामलाई का सफर आईपीएस से राजनीति तक रोचक रहा है। अब दिल्ली बैठक तय करेगी कि वे पार्टी में रहते हैं या नया रास्ता चुनते हैं। डीएमके इसे चुनौती मान रही है, लेकिन तमिलनाडु की जनता का फैसला अंतिम होगा।
यह लेख वर्तमान घटनाक्रम पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल रही है।