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अपनी सत्ता बचाने में जुटे पांच चुनावी राज्यों के सत्तारूढ़ दल

प्रकाशित: 19-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
अपनी सत्ता बचाने में जुटे पांच चुनावी राज्यों के सत्तारूढ़ दल
अशोक उपाध्याय
चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया है। तमिलनाडु में एक ही दिन 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पश्चिम बंगाल में दो चरण में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। केरल, असम और पुडुचेरी में एक ही दिन 9 अप्रैल को मतदान होगा। पांचों राज्यों का चुनाव परिणाम 4 मई को आएगा।
इसी के साथ चुनाव कार्पामों की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद पश्चिम बंगाल में लगातार राज्य के बड़े अधिकारियों का ट्रांसफर देखने को मिला है। मंगलवार को चुनाव आयोग ने अब 19 सीनियर पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया है। साउथ और नार्थ बंगाल क्षेत्रों के एडीजी,आईजीपी समेत कई बड़े अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है।
सबसे पहले रविवार को पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिन पावर्ती और प्रिसिंपल पोटरी जगदीश प्रसाद मीणा को पद से हटा दिया गया था। चुनाव आयोग ने 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला को नया मुख्य सचिव और 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह और पहाड़ी मामलों का प्रिंसिपल पोटरी नियुक्त किया था। तबादला किए गए सभी अधिकारियों को राज्य में विधानसभा चुनाव खत्म होने तक चुनाव से जुड़े किसी भी काम में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है।
पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक स्तर पर किये गये फेरबदल में बड़ी तत्परता दिखाई गई जिसकी बड़ी वजह यह रही कि एसआईआर की कार्रवाई में उनका अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और अपने राजनीतिक आका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर केंद्र द्वारा मांगी गई अनेक रिपोर्टों को साझा करने में आनाकानी की गई। वैसे पश्चिम बंगाल में वामदालों का शासन रहा हो या ममता बनर्जी की तृणमूल सरकार का, किसी ने भी सरकारी दायित्वों के निर्वहन में केंद्र सरकार के साथ सहयोग नहीं किया और हमेशा टकराव की स्थिति बनाये रखी।
ममता बनर्जी एसआईआर को लेकर खुद सर्वोच्च अदालत गईं और इसे रूकवाने के लिये हर दांवपेच का इस्तेमाल किया। एसआईआर एक संवैधानिक प्रािढया है जिसके तहत मुख्य तौर मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया जाता है।
इससे पहले बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर कराया गया था तब कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने इसका विरोध किया था। दरअसल एसआईआर में अवैध मतदाताओं खासतौर से बंगलादेशी घुसपैठियों की पहचान करने की कवायद की गई। मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड में विषमता ने कई अवैध मतदाताओं की पहचान की जिन्होंने फर्जी दस्तावेज से मतदाता पहचान पत्र बना लिये थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर की प्रािढया पर रोक लगाने की विपक्षी दलों की मांग को ठुकरा दिया औwर इस निर्णय ने विपक्ष की दलील और गैरकानूनी मांग को धत्ता बता दिया। हर राज्य में बहुमत से जनता ने एसआईआर का समर्थन किया और कहीं से भी जपोश के स्वर नहीं सुनाई दिये जिसके कारण विपक्ष की अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाये जाने के आरोप जनता के सिरे नहीं चढ़े।
चुनाव कार्पामों के एलान के बाद ओपिनियन पोल का दौर शुरू हो गया है जिनके मुताबिक तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है और उसे 114 से 127 सीटें मिल सकती हैं जबकि द्रमुक गठबंधन को 104 से 114 सीटों का अनुमान है। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को 6 से 12 सीटें मिल सकती हैं। वोट शेयर में अन्नाद्रमुक को करीब 39-40 प्रतिशत और द्रमुक को 37-38 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कड़ा मुकाबला दिख रहा है लेकिन एलडीएफ को हल्की बढ़त मिलती नजर आ रही है। सर्वे के मुताबिक एलडीएफ को 61 से 71 सीटें और यूडीएफ को 58 से 69 सीटें मिल सकती हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को करीब 12-13 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है और ये कितने सीटों में तबदील होंगे ये बताना कठिन है।
पश्चिम बंगाल के ओपिनियन पोल के मुताबिक ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में लौट सकती है। सर्वे में तृणमूल को 155 से 170 सीटें और 43-45 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है जबकि भाजपा को 100 से 115 सीटें और 41-43 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है। दूसरी पार्टियों को 5 से 7 सीटें और 13-15 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है। दूसरी पार्टियों के मिलने वाले वोट को लेकर संशय है और कुल मिलाकर तृणमूल और भाजपा के बीच सीधी टक्कर में नतीजे दिलचस्प हो सकते हैं।
असम में भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है और उसे 96 से 98 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं कांग्रेस गठबंधन को 26 से 28 सीटें और अन्य को 2 से 8 सीटें मिल सकती हैं। वोट शेयर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 43-44 प्रतिशत, कांग्रेस गठबंधन को 39-40 प्रतिशत और अन्य को 18-20 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है।
हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में चुनावी लहर देखने को मिली और इसके नतीजों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता का अनुमान बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है। भाजपा मोदी की लोकप्रियता को भुनाने में कोई कसर बाकी नहीं रहने देना चाहती है। खासकर पश्चिम बंगाल में वह ममता बनर्जी से सीधी टक्कर ले रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा दूसरे बडे दल के रूप मजबूती से उभरी थी और इस परिवर्तन ने इस बार भाजपा की उम्मीदें और मजबूत की हैं।
दक्षिण भारत में केरलम और तमिलनाडु में भाजपा अपनी मौजूदगी बढाने में चुनाव दर चुनाव कामयाब हो रही है लेकिन उसे अभी क्षेत्रीय दलों के मजबूत किलों को ढहाने की बडी चुनौती को पार पाना होगा।
असम और पुद्दुचेरी में भाजपा की वापसी आसान दिख रही है और पश्चिम बंगाल में उसने पूरी ताकत झोंक रखी है। हकीकत यही है कि इस चुनाव में सत्ताधारी दल अपने गढ को बचाने में लगे हैं।
(लेखक यूनीवार्ता के पूर्व संपादक हैं।)