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2026 के निर्णायक मोड़ पर खड़े पांच राज्यों के चुनाव

प्रकाशित: 19-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
देश में एक बार फिर लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव अपने चरम पर पहुंच रहा है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है और चुनावी मैदान में आरोप-प्रत्यारोप, वादे और रणनीतियों का सिलसिला तेज हो चुका है। यह चुनाव सिर्फ राज्य सरकारों के गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि 2026 की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और दशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाने वाले हैं। इसलिए हर दल इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रहा है।
चुनावी राज्यों में इस समय राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। हर पार्टी अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को साधने में जुटी है। बड़े-बड़े नेताओं की रैलियां हो रही हैं, रोड शो किए जा रहे हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रचार का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जहां पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीखी रही है, वहीं तमिलनाडु और केरल में भी सत्ता परिवर्तन या सत्ता बनाए रखने की जंग दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। पुडुचेरी जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में भी सियासी हलचल कम नहीं है। इस बार के चुनावों की एक बड़ी विशेषता यह है कि लगभग सभी प्रमुख दल एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए विकास, बुनियादी ढांचे, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं को मुद्दा बना रहा है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर सरकार को घेर रहा है। इस राजनीतिक टकराव के बीच मतदाताओं के सामने कई तरह के वादे और दावे पेश किए जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और भी ज्यादा गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने इस बार चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चुनावी प्रािढया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आयोग को और सख्त कदम उठाने चाहिए। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि कुछ फैसले ऐसे लिए गए हैं, जिनसे सत्तारूढ़ दल को फायदा मिल सकता है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी दलों को समान अवसर दिया जा रहा है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
चुनावों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरी है। पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में पहले भी चुनावी हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
तमिलनाडु और केरल में चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय दलों के प्रभाव के इर्द-गिर्द घूम रहा है। तमिलनाडु में सामाजिक न्याय, भाषा और संस्कृति जैसे मुद्दे हमेशा की तरह महत्वपूर्ण बने हुए हैं, जबकि केरल में विकास मॉडल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज है। इन दोनों राज्यों में मतदाता काफी जागरूक माने जाते हैं और वे स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं, जिससे चुनाव परिणाम काफी दिलचस्प हो जाते हैं। असम में चुनावी समीकरण जातीय और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ विकास और पहचान की राजनीति के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। यहां पर प्रवासन, नागरिकता और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे विषय लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव हमेशा से ही तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और विचारधारात्मक संघर्ष के लिए जाना जाता है। यहां पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है, जिसमें दोनों ही पक्ष अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
पुडुचेरी में भले ही क्षेत्र छोटा हो, लेकिन राजनीतिक समीकरण काफी जटिल हैं। यहां पर स्थानीय और राष्ट्रीय दलों के बीच गठबंधन और समीकरण लगातार बदलते रहते हैं। इस वजह से यहां का चुनाव परिणाम अक्सर अप्रत्याशित होता है। पुडुचेरी का चुनाव यह भी दिखाता है कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव कितना गहरा होता है।
इन पांचों राज्यों के चुनावों का राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक असर पड़ने वाला है। यदि किसी एक दल या गठबंधन को इन राज्यों में बड़ी सफलता मिलती है, तो उसका मनोबल बढ़ेगा और वह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा। वहीं यदि किसी दल का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो उसे अपनी रणनीति और नेतृत्व पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। इसलिए सभी दल इन चुनावों को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं और कोई भी चूक नहीं करना चाहते।
मतदाताओं के लिए भी यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण हैं। वे न केवल अपने राज्य की सरकार चुनेंगे, बल्कि देश की राजनीति को भी एक दिशा देंगे। युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं की भूमिका इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक दल भी इन वर्गों को ध्यान में रखते हुए अपने घोषणापत्र और प्रचार रणनीति तैयार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव इस समय पूरे देश के ध्यान का केंद्र बने हुए हैं। सियासी बयानबाजी, चुनावी वादे, सुरक्षा इंतजाम और आयोग की भूमिका इन सभी पहलुओं ने चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आएंगी, चुनावी माहौल और भी गर्म होगा। अंतत जनता का फैसला ही तय करेगा कि इन राज्यों में किसकी सरकार बनेगी और देश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।