गृहमंत्री अमित शाह की निगरानी में खेल महाशक्ति बनने की ओर भारत
प्रकाशित: 01-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
डॉ. विपिन कुमार
भारत आज केवल आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की दिशा में ही नहीं, बल्कि खेल महाशक्ति बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। जहां कभी खेल सुविधाओं और संसाधनों की कमी प्रतिभाओं के विकास में बाधा बनती थी, वहीं अब आधुनिक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर की तैयारियां उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का यह वक्तव्य कि “मोदी सरकार भारत में विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार कर रही है तथा अहमदाबाद में प्रस्तावित विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए वैश्विक मानकों के अनुरूप खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं'', इसी व्यापक सोच और दूरदर्शी रणनीति का प्रतीक है।
खेल किसी भी राष्ट्र की पहचान, ऊर्जा और युवाशक्ति का प्रतीक होते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके पीछे मजबूत खेल ढांचा, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और उच्चस्तरीय सुविधाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लंबे समय तक भारत में खेलों को पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाए, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। केंद्र सरकार खेलों को राष्ट्रीय विकास और युवा सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है।
अहमदाबाद को भविष्य की विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की दिशा में चल रहे प्रयास इसी सोच का हिस्सा हैं। गुजरात पहले ही खेल, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम नरेंद्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद में स्थित है, जिसने भारत की खेल क्षमता को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। अब यदि शहर को बहु-खेल अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए विकसित किया जा रहा है, तो यह न केवल गुजरात बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है।
विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का अर्थ केवल बड़े स्टेडियम बनाना नहीं है। इसमें अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, खेल विज्ञान प्रयोगशालाएं, फिटनेस एवं पुनर्वास सुविधाएं, खिलाड़ियों के लिए आवासीय परिसर, डिजिटल विश्लेषण प्रणाली और खेल चिकित्सा सेवाएं भी शामिल होती हैं। आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में खिलाड़ियों को केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की भी आवश्यकता होती है। सरकार द्वारा इन सभी क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना भारतीय खेलों के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेल क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गई हैं। ‘खेलो इंडिया' अभियान ने देश के कोने-कोने से प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें अवसर देने का कार्य किया है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को विशेष सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके परिणाम भी सामने आए हैं। ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला है।
खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं। खेल प्रबंधन, खेल चिकित्सा, फिटनेस उद्योग, खेल उपकरण निर्माण और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलता है। जब किसी शहर में बड़े खेल आयोजन होते हैं तो वहां परिवहन, होटल, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विकास होता है। इस दृष्टि से खेल निवेश आर्थिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन जाता है।
अहमदाबाद में खेल परियोजनाओं की समीक्षा बैठकें इस बात का संकेत हैं कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि परियोजनाओं की समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ािढयान्विति पर भी ध्यान दे रही है। किसी भी बड़े आयोजन की सफलता के लिए योजनाओं का नियमित मूल्यांकन और निगरानी आवश्यक होती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित हों और भविष्य की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकें।
हालांकि खेल अवसंरचना के विस्तार के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। यह सुनिश्चित करना होगा कि आधुनिक सुविधाओं का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी खेल प्रतिभाओं को समान अवसर मिलना चाहिए। भारत की अनेक विश्वस्तरीय प्रतिभाएं छोटे कस्बों और गांवों से निकलकर आई हैं। इसलिए खेल विकास की नीति समावेशी होनी चाहिए, ताकि देश के हर हिस्से का युवा अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सके।
इसके साथ ही खेल संस्कृति को समाज में और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। केवल प्रतियोगिताओं के समय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन पर्याप्त नहीं है। स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा। स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में खेलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आज भारत 2036 ओलंपिक जैसे बड़े वैश्विक आयोजनों की मेजबानी की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। यदि देश को ऐसे आयोजनों की मेजबानी करनी है, तो विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण अनिवार्य है। अहमदाबाद और अन्य शहरों में विकसित हो रही आधुनिक खेल सुविधाएं इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
निष्कर्षत, मोदी सरकार द्वारा खेल अवसंरचना और अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार पर दिया जा रहा जोर भारत के खेल भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। अमित शाह का वक्तव्य केवल एक परियोजना की समीक्षा का विवरण नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय संकल्प का प्रतिबिंब है जिसमें भारत को वैश्विक खेल मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने का लक्ष्य निहित है। यदि यही गति और प्रतिबद्धता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल खेल आयोजनों की सफल मेजबानी करेगा, बल्कि विश्व मंच पर खेल उपलब्धियों के नए कीर्तिमान भी स्थापित करेगा।
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार एवं राष्ट्रवादी विचारक है।)
भारत आज केवल आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की दिशा में ही नहीं, बल्कि खेल महाशक्ति बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। जहां कभी खेल सुविधाओं और संसाधनों की कमी प्रतिभाओं के विकास में बाधा बनती थी, वहीं अब आधुनिक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर की तैयारियां उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का यह वक्तव्य कि “मोदी सरकार भारत में विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार कर रही है तथा अहमदाबाद में प्रस्तावित विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए वैश्विक मानकों के अनुरूप खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं'', इसी व्यापक सोच और दूरदर्शी रणनीति का प्रतीक है।
खेल किसी भी राष्ट्र की पहचान, ऊर्जा और युवाशक्ति का प्रतीक होते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके पीछे मजबूत खेल ढांचा, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और उच्चस्तरीय सुविधाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लंबे समय तक भारत में खेलों को पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाए, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। केंद्र सरकार खेलों को राष्ट्रीय विकास और युवा सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है।
अहमदाबाद को भविष्य की विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की दिशा में चल रहे प्रयास इसी सोच का हिस्सा हैं। गुजरात पहले ही खेल, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम नरेंद्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद में स्थित है, जिसने भारत की खेल क्षमता को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। अब यदि शहर को बहु-खेल अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए विकसित किया जा रहा है, तो यह न केवल गुजरात बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है।
विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का अर्थ केवल बड़े स्टेडियम बनाना नहीं है। इसमें अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, खेल विज्ञान प्रयोगशालाएं, फिटनेस एवं पुनर्वास सुविधाएं, खिलाड़ियों के लिए आवासीय परिसर, डिजिटल विश्लेषण प्रणाली और खेल चिकित्सा सेवाएं भी शामिल होती हैं। आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में खिलाड़ियों को केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की भी आवश्यकता होती है। सरकार द्वारा इन सभी क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना भारतीय खेलों के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेल क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गई हैं। ‘खेलो इंडिया' अभियान ने देश के कोने-कोने से प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें अवसर देने का कार्य किया है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को विशेष सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके परिणाम भी सामने आए हैं। ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला है।
खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं। खेल प्रबंधन, खेल चिकित्सा, फिटनेस उद्योग, खेल उपकरण निर्माण और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलता है। जब किसी शहर में बड़े खेल आयोजन होते हैं तो वहां परिवहन, होटल, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विकास होता है। इस दृष्टि से खेल निवेश आर्थिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन जाता है।
अहमदाबाद में खेल परियोजनाओं की समीक्षा बैठकें इस बात का संकेत हैं कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि परियोजनाओं की समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ािढयान्विति पर भी ध्यान दे रही है। किसी भी बड़े आयोजन की सफलता के लिए योजनाओं का नियमित मूल्यांकन और निगरानी आवश्यक होती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित हों और भविष्य की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकें।
हालांकि खेल अवसंरचना के विस्तार के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। यह सुनिश्चित करना होगा कि आधुनिक सुविधाओं का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी खेल प्रतिभाओं को समान अवसर मिलना चाहिए। भारत की अनेक विश्वस्तरीय प्रतिभाएं छोटे कस्बों और गांवों से निकलकर आई हैं। इसलिए खेल विकास की नीति समावेशी होनी चाहिए, ताकि देश के हर हिस्से का युवा अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सके।
इसके साथ ही खेल संस्कृति को समाज में और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। केवल प्रतियोगिताओं के समय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन पर्याप्त नहीं है। स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा। स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में खेलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आज भारत 2036 ओलंपिक जैसे बड़े वैश्विक आयोजनों की मेजबानी की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। यदि देश को ऐसे आयोजनों की मेजबानी करनी है, तो विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण अनिवार्य है। अहमदाबाद और अन्य शहरों में विकसित हो रही आधुनिक खेल सुविधाएं इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
निष्कर्षत, मोदी सरकार द्वारा खेल अवसंरचना और अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार पर दिया जा रहा जोर भारत के खेल भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। अमित शाह का वक्तव्य केवल एक परियोजना की समीक्षा का विवरण नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय संकल्प का प्रतिबिंब है जिसमें भारत को वैश्विक खेल मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने का लक्ष्य निहित है। यदि यही गति और प्रतिबद्धता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल खेल आयोजनों की सफल मेजबानी करेगा, बल्कि विश्व मंच पर खेल उपलब्धियों के नए कीर्तिमान भी स्थापित करेगा।
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार एवं राष्ट्रवादी विचारक है।)