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यूपीएससी परीक्षा में सफलता के भ्रामक दावों पर वाजीराम एंड रवि पर सात लाख का जुर्माना

प्रकाशित: 31-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2023 में सफल अभ्यर्थियों का श्रेय लेने वाले भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के मामले में वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने पाया कि संस्थान के विज्ञापनों में जिन अधिकांश सफल अभ्यर्थियों का उल्लेख किया गया था, वे केवल उसके नि:शुल्क इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (आईजीपी) से जुड़े थे। यह एक अल्पकालिक कार्यक्रम है, जो अभ्यर्थियों के प्रारंभिक (प्रीलिम्स) और मुख्य (मेन्स) परीक्षा स्वयं उत्तीर्ण करने के बाद शुरू होता है। नियामक ने बयान में कहा कि परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर दावा किया था कि शीर्ष 10 में शामिल आ" तथा शीर्ष 50 में शामिल 37 रैंक हासिल करने वाले उसके छात्र हैं। संस्थान ने यह भी दावा किया था कि हर वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी उसके छात्र होते हैं। मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाले सीसीपीए ने पाया कि विज्ञापन में शामिल शीर्ष 10 में से आ" रैंक धारकों में से सात तथा शीर्ष 50 रैंक धारकों में से 37 में से 29 रैंक धारकों ने केवल नि:शुल्क आईजीपी कार्यक्रम में नामांकन कराया था। हालांकि, संस्थान ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया था।
प्राधिकरण ने कहा कि जानकारी छिपाने का यह मामला केवल वर्ष 2023 तक सीमित नहीं था। जांच में कई वर्षों से इस तरह की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का एक समान प्रतिरूप सामने आया।
सीसीपीए के अनुसार, वर्ष 2021 में सफल अभ्यर्थियों में से 86.36 प्रतिशत, वर्ष 2022 में 78.31 प्रतिशत, वर्ष 2023 में 97.56 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 71.69 प्रतिशत अभ्यर्थी केवल आईजीपी कार्यक्रम से जुड़े थे। हालांकि, किसी भी वर्ष यह जानकारी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर नहीं दी गई।