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लेखाधिकारी विजय गंगवानी पर लगे मनमानी के आरोप?

प्रकाशित: 01-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
शहडोल (वीअ)। संभाग के उमरिया जिले के जिला शिक्षा केंद्र (डीपीसी) कार्यालय में शासन के नियमों की अनदेखी और जिले के उच्च अधिकारियों को धोखे में रखने की कार्यप्रणाली से हमेशा सुर्खियों में रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक सहायक परियोजना समन्वयक के लिए 25 अंक पाने वाले अभ्यर्थियों से जिला स्तर पर मेरिट के आधार पर काउंसलिंग के माध्यम से पदस्थापना किया जाना है। वही भविष्य में किन्हीं कारणों से पद रिक्त होने पर इसी चयन सूची के आधार पर प्रति नियुक्ति की कार्यवाही किए जाने के निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के द्वारा दिए गए हैं। इसके अलावा जिनकी सेवाएं पूर्व में अनियमितता या लापरवाही के कारण वापस ली गई है वह भी प्रतिनियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। नवनियुक्त उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों की पदस्थापना शाला विशेष के लिए होने से उनके प्रतिनियुक्ति आवेदन ही मान्य नहीं किए जाएंगे, वहीं गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय के शिक्षकों का संलग्नीकरण कार्य में नहीं रखे जाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय के स्पष्ट निर्देश हैं। बताया गया कि जिला शिक्षा केंद्र में पदस्थ लेखाधिकारी विजय गंगवानी के द्वारा नियम और निर्देशों को दरकिनार करते हुए अपनी मनमर्जी से एक आदेश कराया गया है। इसके पहले भी जब जिले के कलेक्टर डीके जैन रहे हैं, उस समय भी इनके द्वारा यही कृत्य किया जा था, लेकिन कलेक्टर को मामले की जानकारी होने से वह स्पष्ट तौर पर मना कर दिए।
लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद इसी लेखाधिकारी ने वर्तमान कलेक्टर को धोखे में रख साइंस समूह के उच्च शिक्षक संतोष कुमार भट्ट को नियम विरुद्ध तरीके से एपीसी के लिए आदेश करवा लिया। लेखाधिकारी गंगवानी के बारे में विभागीय सूत्र बताते हैं कि उनके द्वारा जिला शिक्षा केंद्र को व्यापार का अड्डा बना दिया है ?। सभी संस्थाओं और छात्रावासों को अपने लेखाधिकारी होने के कारण दबाव डालकर परिवार की ऑनलाइन दुकान से तमाम प्रकार के कार्य और खरीदी करने का दबाव डाला जाता है। इसके पहले भी उनके द्वारा अनेको बार नियम विरुद्ध कार्य किए गए हैं। फिर चाहे वह छात्रावास में अकाउंटेंट की नियुक्ति का मामला हो या फिर जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी का मामला हो।
हाल ही में लेखाधिकारी गंगवानी के द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से एपीसी मोबिलाइजेशन और एपीसी वित्त की नियुक्ति किये जाने की जानकारी मिली है। इन सभी कार्यों में उनके द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाई गई है। जिले के कलेक्टर से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराये जाने की मांग की गई है।
इस मामले मे कितनी सच्चाई है इसका पता तो जांच के बाद ही चल सकेगा ।