बच्चों में बढ़ रही Diabetes पर भारत का बड़ा कदम, पहली बार जारी हुई खास गाइडलाइंस
प्रकाशित: 13-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
भारत में बच्चों की सेहत को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने पहली बार बच्चों में डायबिटीज के इलाज और देखभाल को लेकर राष्ट्रीय गाइडलाइंस जारी की हैं. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में हुई नेशनल हेल्थ समिट में “Guidance Document on Diabetes Mellitus in Children” लॉन्च किया. इसका मकसद बच्चों में डायबिटीज की जल्दी पहचान, सही इलाज और लंबे समय तक बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है. पहली बार बच्चों की डायबिटीज को देश के पब्लिक हेल्थ सिस्टम में पूरी तरह शामिल किया गया है.
बच्चों में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज
भारत को अक्सर “Diabetes Capital” कहा जाता है क्योंकि यहां करोड़ों लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं. अब बच्चों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं. Type 1 Diabetes में बच्चे का शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जबकि Type 2 Diabetes खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान और कम फिजिकल एक्टिविटी की वजह से हो सकती है. अगर समय रहते इलाज न मिले तो बच्चों में किडनी की बीमारी, आंखों की रोशनी कम होना, दिल की बीमारी जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं.
अब पूरे देश में होगा एक जैसा इलाज
नई गाइडलाइंस के तहत जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग पर जोर दिया जाएगा. स्कूलों और हेल्थ सेंटरों पर शुरुआती जांच होगी. अगर किसी बच्चे में डायबिटीज के लक्षण दिखते हैं तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल भेजा जाएगा.
सरकारी अस्पतालों में मिलेगा फ्री इलाज
सरकार ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में बच्चों को डायबिटीज का इलाज मुफ्त मिलेगा. इसमें जरूरी टेस्ट, इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स और रेगुलर चेकअप शामिल होंगे. इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है क्योंकि डायबिटीज का इलाज लंबे समय तक चलता है.
“4Ts” से पहचानें बीमारी
गाइडलाइंस में बच्चों में डायबिटीज पहचानने के लिए “4Ts” बताए गए हैं:
Toilet – बार-बार पेशाब आना
Thirsty – बहुत ज्यादा प्यास लगना
Tired – हर समय थकान रहना
Thinner – अचानक वजन कम होना
अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है.
परिवार को भी दी जाएगी ट्रेनिंग
नई गाइडलाइंस में माता-पिता और देखभाल करने वालों को भी ट्रेनिंग देने की बात कही गई है ताकि वे इंसुलिन देना, शुगर चेक करना और इमरजेंसी की स्थिति संभालना सीख सकें. सरकार का मानना है कि इससे बच्चों में डायबिटीज से होने वाली गंभीर परेशानियों और मौत के मामलों को कम करने में मदद मिलेगी.
बच्चों में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज
भारत को अक्सर “Diabetes Capital” कहा जाता है क्योंकि यहां करोड़ों लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं. अब बच्चों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं. Type 1 Diabetes में बच्चे का शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जबकि Type 2 Diabetes खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान और कम फिजिकल एक्टिविटी की वजह से हो सकती है. अगर समय रहते इलाज न मिले तो बच्चों में किडनी की बीमारी, आंखों की रोशनी कम होना, दिल की बीमारी जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं.
अब पूरे देश में होगा एक जैसा इलाज
नई गाइडलाइंस के तहत जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग पर जोर दिया जाएगा. स्कूलों और हेल्थ सेंटरों पर शुरुआती जांच होगी. अगर किसी बच्चे में डायबिटीज के लक्षण दिखते हैं तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल भेजा जाएगा.
सरकारी अस्पतालों में मिलेगा फ्री इलाज
सरकार ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में बच्चों को डायबिटीज का इलाज मुफ्त मिलेगा. इसमें जरूरी टेस्ट, इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स और रेगुलर चेकअप शामिल होंगे. इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है क्योंकि डायबिटीज का इलाज लंबे समय तक चलता है.
“4Ts” से पहचानें बीमारी
गाइडलाइंस में बच्चों में डायबिटीज पहचानने के लिए “4Ts” बताए गए हैं:
Toilet – बार-बार पेशाब आना
Thirsty – बहुत ज्यादा प्यास लगना
Tired – हर समय थकान रहना
Thinner – अचानक वजन कम होना
अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है.
परिवार को भी दी जाएगी ट्रेनिंग
नई गाइडलाइंस में माता-पिता और देखभाल करने वालों को भी ट्रेनिंग देने की बात कही गई है ताकि वे इंसुलिन देना, शुगर चेक करना और इमरजेंसी की स्थिति संभालना सीख सकें. सरकार का मानना है कि इससे बच्चों में डायबिटीज से होने वाली गंभीर परेशानियों और मौत के मामलों को कम करने में मदद मिलेगी.