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महंगाई के बीच क्रेडिट कार्ड ब्याज ने बढ़ाया जनता पर दबाव

प्रकाशित: 19-05-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
महंगाई के बीच क्रेडिट कार्ड ब्याज ने बढ़ाया जनता पर दबाव
आदित्य नरेन्द्र
भारत सरकार को पश्चिम एशिया संकट के दौरान और उसके प्रभाव के समय क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों में राहत देने पर विचार करना चाहिए। आज भारत में अधिकांश ाsढडिट कार्डों पर ब्याज दरें बहुत अधिक हैं, जो कई मामलों में सालाना 30ज्ञ् से 50ज्ञ् तक पहुंच जाती हैं। ऐसे समय में जब पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, परिवहन और खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हों, आम नागरिकों पर आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ जाता है।
मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए मासिक खर्च संभालना कठिन हो जाता है। ईएमआई, स्कूल फीस, किराया, बिजली बिल और रोजमर्रा की आवश्यकताओं की बढ़ती लागत के कारण लोग मानसिक तनाव, चिंता और असुरक्षा महसूस करने लगते हैं। कई लोग मजबूरी में ाsढडिट कार्ड का उपयोग करते हैं, लेकिन ऊंची ब्याज दरें उन्हें कर्ज के जाल में धकेल सकती हैं। यदि सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक संकट के समय कुछ राहत उपाय लागू करें, तो इससे करोड़ों उपभोक्ताओं को सहायता मिल सकती है। उदाहरण के लिए
‡ाsढडिट कार्ड ब्याज दरों में अस्थायी कमी
‡लेट फीस और पेनल्टी में राहत
‡ईएमआई पुनर्गठन
‡निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए विशेष सहायता योजनाएं
ऐसे कदम न केवल आर्थिक राहत देंगे बल्कि लोगों के मानसिक तनाव को भी कम करेंगे। कठिन वैश्वाक परिस्थितियों में नागरिकों का वित्तीय आत्मविश्वाास बनाए रखना किसी भी अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होता है।