मोदी सरकार ने घबराहट में जबरन सोनम वांगचुक को उठायाः सौरभ भारद्वाज
प्रकाशित: 19-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अचानक दिल्ली पुलिस कमिश्नर को बदल कर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन उठाने के पीछे मोदी सरकार की घबराहट बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस से इंटेलिजेंस में चूक हुई और पुलिस ने ‘कॉकरोच मूवमेंट' से जेन-जी के जुड़ाव को कम करके आंका। घबराहट में मोदी सरकार ने पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को बदल दिया और नए कमिश्नर ने अपने पहले ही दिन सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने का फ़ैसला किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पिछले दो-तीन दिनों में बड़ी तेजी से देश भर के लोग सोनम वांगचुक की आवाज बने उससे सरकार डर गई। देश के युवाओं के लिए यह बड़ा मौका है। 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक शांति पूर्वक मार्च करने जरूर आएं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस से इंटेलिजेंस में चूक हुई और पुलिस ने ‘कॉकरोच मूवमेंट' से जेन-जी के जुड़ाव को कम करके आंका। घबराहट में मोदी सरकार ने पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को बदल दिया और नए कमिश्नर ने अपने पहले ही दिन सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने का फ़ैसला किया। सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि कई लोगों के मन में यह आशंका थी कि कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल आखिर कैसे चल गई और सरकार ने इसे कैसे चलने दिया? पावार को मिनटों में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को इस तरह बदला गया कि पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा पेड़ लगाने के कार्पाम में थे और उन्हें पता चला कि पीछे से नए पुलिस कमिश्नर नियुक्त कर दिए गए हैं।
एक पुलिस कमिश्नर को उनके कार्यकाल से करीब एक साल पहले ही असम्मानजनक तरीके से हटा दिया गया और नए पुलिस कमिश्नर ने तुरंत दफ्तर पहुंचकर चार्ज ले लिया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसका कारण अब समझ में आ रहा है। मेरा मानना यह है कि जब यह कॉकरोच आंदोलन शुरू हुआ तो दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस का एक बड़ा फेलियर सामने आया। इन लोगों को ऐसा लगा कि यह सोशल मीडिया का आंदोलन है और इससे लोगों का कोई लेना-देना नहीं है। इन्हें लगा कि अमेरिका से आया लड़का और कुछ पढ़े-लिखे जेन-जी बच्चे एसी के बिना रह नहीं पाएंगे और दो-चार दिन बैठकर, जिंदाबाद-मुर्दाबाद करके चले जाएंगे। इससे हमेशा के लिए भारत के जेन-जी पर एक ऐसा ठप्पा और दाग लग जाएगा कि उनके नाम पर होने वाले आंदोलनों की संभावनाएं हमेशा के लिए खत्म कर दी जाएंगी। इसी सोच के साथ इस आंदोलन को चलने दिया गया कि दो-चार दिन के अंदर सब कुछ खुद ही खत्म हो जाएगा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मगर पिछले दो-तीन दिनों से जिस तरह से लोग इस आंदोलन के साथ जुड़ने लगे और 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की जो तस्वीरें बाहर आईं, उससे लोगों के दिल में उनके लिए श्रद्धा, सहानुभूति और इज्जत पैदा हुई, जिससे सरकार घबरा गई। बड़े-बड़े लोग इसके बारे में चर्चा करने लगे, लेकिन जिन्हें हीरो माना जाता है, चाहे वे बॉलीवुड के हीरो हों या बड़े खिलाड़ी, वे चुप रहे। शायद वे डर गए, लालच में चुप रहे या इतने खुदगर्ज हैं इसलिए चुप रहे। मगर छोटे-छोटे लोग और प्रोफेशनल्स इस आंदोलन से जुड़ने लगे और खासतौर पर जेन-जी इस आंदोलन से भारी संख्या में जुड़ने लगा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसका नतीजा यह हुआ कि एक नया पुलिस कमिश्नर लाया गया। जिस दिन नए पुलिस कमिश्नर आए, उसी शाम 7 बजे इस आंदोलन के विषय में मीटिंग हुई और उसी रात यह प्लानिंग कर ली गई कि रात को या सुबह-सुबह हम लोग सोनम वांगचुक और कॉकरोच के इस आंदोलन को खत्म करेंगे। पुलिस वालों ने चादरें लगाकर धक्का-मुक्की की और उन्हें जबरदस्ती उठाकर अस्पताल ले गए। एक बात साफ है कि यह सरकार जेन-जी से डरी हुई है। मैं इस जेन-जी को बताना चाहता हूं कि यह एक बड़ा मौका है और शांतिपूर्ण आंदोलन करना उनका प्रजातांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। इसलिए सोमवार, 20 जुलाई को सभी लोग शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर से संसद जाएंगे। उधर, आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक है। भाजपा सरकार सोनम वांगचुक को उठाने के लिए इतनी भारी पुलिस फोर्स भेज सकती है, लेकिन उनके साथ पेपर लीक पर चर्चा करने के लिए किसी को नहीं भेज सकती। ऐसा अहंकार अक्सर अपने अंत के करीब पहुंच चुकी तानाशाहों में ही देखा जाता है।
आप गुजरात के प्रभारी और दिल्ली के पूर्व पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पिछले 20 दिनों से देश के युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरदस्ती उठा लिया है। सबको यह उम्मीद थी कि शायद सरकार संवाद करेगी, लेकिन सरकार ने 20 दिनों बाद भी संवाद करने की जगह सत्ता के अहंकार में पुलिस के दम पर जबरदस्ती करने का फैसला किया। देश अब जाग रहा है और सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार की तानाशाही को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है। मैं सभी से निवेदन करना चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें और इस आंदोलन को मजबूत करें। आप के वरिष्ठ नेता व एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने की भाजपा सरकार की कोशिश बेहद शर्मनाक है। सादे कपड़ों में पुलिस प्रदर्शन स्थल में घुसी, कैमरों का व्यू रोकने के लिए सफेद चादरों का इस्तेमाल किया गया और पूरी कार्रवाई को रिकॉर्ड होने से रोका गया। भाजपा शासन में देश के लोकतंत्र की आवाज दबाई जा रही है। मोदी सरकार जब-जब जुल्म करेगी, सत्ता के गलियारों का चप्पा-चप्पा इंकलाब के नारों से गूंज उठेगा। वहीं, आप के वरिष्ठ नेता व कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि आखिर मोदी सरकार ने वही किया जिसके लिए वह जानी जाती है। भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से संवाद करने के बजाय मोदी सरकार ने अपना पुराना तानाशाही रवैया चुना। उन्हें तानाशाही के दम पर आज उठा लिया गया। वहां बैठे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, उन्हें पीटा गया और पुलिस जबरन उठाकर उनको वहां से लेकर चली गई। कुलदीप कुमार ने कहा कि जहां सरकार को उनसे संवाद और बातचीत करनी चाहिए थी, क्योंकि वे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे, वहां सरकार ने तानाशाही को चुना। यह मोदी सरकार इस देश के लोकतंत्र को डंडे और तानाशाही के जोर पर चलाना चाहती है। हम सबको इस तानाशाही का जवाब जरूर देना पड़ेगा और सबको सोनम वांगचुक के समर्थन में बाहर निकल कर आना पड़ेगा। कुलदीप कुमार ने कहा कि सोनम वांगचुक ने हम लोगों के बच्चों के लिए लड़ाई लड़ी है, लेकिन तानाशाह सरकार ने उन्हें डंडे के दम पर वहां से उठाने का प्रयास किया है, जो इस लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है। यह सरकार देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए और ज्यादा घातक होती जा रही है। हम सब मिलकर सोनम वांगचुक के साथ आवाज बुलंद करें, हम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर रहेंगे क्योंकि डंडे के दम पर आंदोलन और लोकतंत्र खत्म नहीं होते।
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अचानक दिल्ली पुलिस कमिश्नर को बदल कर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन उठाने के पीछे मोदी सरकार की घबराहट बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस से इंटेलिजेंस में चूक हुई और पुलिस ने ‘कॉकरोच मूवमेंट' से जेन-जी के जुड़ाव को कम करके आंका। घबराहट में मोदी सरकार ने पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को बदल दिया और नए कमिश्नर ने अपने पहले ही दिन सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने का फ़ैसला किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पिछले दो-तीन दिनों में बड़ी तेजी से देश भर के लोग सोनम वांगचुक की आवाज बने उससे सरकार डर गई। देश के युवाओं के लिए यह बड़ा मौका है। 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक शांति पूर्वक मार्च करने जरूर आएं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस से इंटेलिजेंस में चूक हुई और पुलिस ने ‘कॉकरोच मूवमेंट' से जेन-जी के जुड़ाव को कम करके आंका। घबराहट में मोदी सरकार ने पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को बदल दिया और नए कमिश्नर ने अपने पहले ही दिन सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने का फ़ैसला किया। सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि कई लोगों के मन में यह आशंका थी कि कॉकरोच आंदोलन और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल आखिर कैसे चल गई और सरकार ने इसे कैसे चलने दिया? पावार को मिनटों में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को इस तरह बदला गया कि पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा पेड़ लगाने के कार्पाम में थे और उन्हें पता चला कि पीछे से नए पुलिस कमिश्नर नियुक्त कर दिए गए हैं।
एक पुलिस कमिश्नर को उनके कार्यकाल से करीब एक साल पहले ही असम्मानजनक तरीके से हटा दिया गया और नए पुलिस कमिश्नर ने तुरंत दफ्तर पहुंचकर चार्ज ले लिया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसका कारण अब समझ में आ रहा है। मेरा मानना यह है कि जब यह कॉकरोच आंदोलन शुरू हुआ तो दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस का एक बड़ा फेलियर सामने आया। इन लोगों को ऐसा लगा कि यह सोशल मीडिया का आंदोलन है और इससे लोगों का कोई लेना-देना नहीं है। इन्हें लगा कि अमेरिका से आया लड़का और कुछ पढ़े-लिखे जेन-जी बच्चे एसी के बिना रह नहीं पाएंगे और दो-चार दिन बैठकर, जिंदाबाद-मुर्दाबाद करके चले जाएंगे। इससे हमेशा के लिए भारत के जेन-जी पर एक ऐसा ठप्पा और दाग लग जाएगा कि उनके नाम पर होने वाले आंदोलनों की संभावनाएं हमेशा के लिए खत्म कर दी जाएंगी। इसी सोच के साथ इस आंदोलन को चलने दिया गया कि दो-चार दिन के अंदर सब कुछ खुद ही खत्म हो जाएगा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मगर पिछले दो-तीन दिनों से जिस तरह से लोग इस आंदोलन के साथ जुड़ने लगे और 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की जो तस्वीरें बाहर आईं, उससे लोगों के दिल में उनके लिए श्रद्धा, सहानुभूति और इज्जत पैदा हुई, जिससे सरकार घबरा गई। बड़े-बड़े लोग इसके बारे में चर्चा करने लगे, लेकिन जिन्हें हीरो माना जाता है, चाहे वे बॉलीवुड के हीरो हों या बड़े खिलाड़ी, वे चुप रहे। शायद वे डर गए, लालच में चुप रहे या इतने खुदगर्ज हैं इसलिए चुप रहे। मगर छोटे-छोटे लोग और प्रोफेशनल्स इस आंदोलन से जुड़ने लगे और खासतौर पर जेन-जी इस आंदोलन से भारी संख्या में जुड़ने लगा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसका नतीजा यह हुआ कि एक नया पुलिस कमिश्नर लाया गया। जिस दिन नए पुलिस कमिश्नर आए, उसी शाम 7 बजे इस आंदोलन के विषय में मीटिंग हुई और उसी रात यह प्लानिंग कर ली गई कि रात को या सुबह-सुबह हम लोग सोनम वांगचुक और कॉकरोच के इस आंदोलन को खत्म करेंगे। पुलिस वालों ने चादरें लगाकर धक्का-मुक्की की और उन्हें जबरदस्ती उठाकर अस्पताल ले गए। एक बात साफ है कि यह सरकार जेन-जी से डरी हुई है। मैं इस जेन-जी को बताना चाहता हूं कि यह एक बड़ा मौका है और शांतिपूर्ण आंदोलन करना उनका प्रजातांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। इसलिए सोमवार, 20 जुलाई को सभी लोग शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर से संसद जाएंगे। उधर, आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक है। भाजपा सरकार सोनम वांगचुक को उठाने के लिए इतनी भारी पुलिस फोर्स भेज सकती है, लेकिन उनके साथ पेपर लीक पर चर्चा करने के लिए किसी को नहीं भेज सकती। ऐसा अहंकार अक्सर अपने अंत के करीब पहुंच चुकी तानाशाहों में ही देखा जाता है।
आप गुजरात के प्रभारी और दिल्ली के पूर्व पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पिछले 20 दिनों से देश के युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरदस्ती उठा लिया है। सबको यह उम्मीद थी कि शायद सरकार संवाद करेगी, लेकिन सरकार ने 20 दिनों बाद भी संवाद करने की जगह सत्ता के अहंकार में पुलिस के दम पर जबरदस्ती करने का फैसला किया। देश अब जाग रहा है और सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार की तानाशाही को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है। मैं सभी से निवेदन करना चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें और इस आंदोलन को मजबूत करें। आप के वरिष्ठ नेता व एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने की भाजपा सरकार की कोशिश बेहद शर्मनाक है। सादे कपड़ों में पुलिस प्रदर्शन स्थल में घुसी, कैमरों का व्यू रोकने के लिए सफेद चादरों का इस्तेमाल किया गया और पूरी कार्रवाई को रिकॉर्ड होने से रोका गया। भाजपा शासन में देश के लोकतंत्र की आवाज दबाई जा रही है। मोदी सरकार जब-जब जुल्म करेगी, सत्ता के गलियारों का चप्पा-चप्पा इंकलाब के नारों से गूंज उठेगा। वहीं, आप के वरिष्ठ नेता व कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि आखिर मोदी सरकार ने वही किया जिसके लिए वह जानी जाती है। भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से संवाद करने के बजाय मोदी सरकार ने अपना पुराना तानाशाही रवैया चुना। उन्हें तानाशाही के दम पर आज उठा लिया गया। वहां बैठे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, उन्हें पीटा गया और पुलिस जबरन उठाकर उनको वहां से लेकर चली गई। कुलदीप कुमार ने कहा कि जहां सरकार को उनसे संवाद और बातचीत करनी चाहिए थी, क्योंकि वे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे, वहां सरकार ने तानाशाही को चुना। यह मोदी सरकार इस देश के लोकतंत्र को डंडे और तानाशाही के जोर पर चलाना चाहती है। हम सबको इस तानाशाही का जवाब जरूर देना पड़ेगा और सबको सोनम वांगचुक के समर्थन में बाहर निकल कर आना पड़ेगा। कुलदीप कुमार ने कहा कि सोनम वांगचुक ने हम लोगों के बच्चों के लिए लड़ाई लड़ी है, लेकिन तानाशाह सरकार ने उन्हें डंडे के दम पर वहां से उठाने का प्रयास किया है, जो इस लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है। यह सरकार देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए और ज्यादा घातक होती जा रही है। हम सब मिलकर सोनम वांगचुक के साथ आवाज बुलंद करें, हम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर रहेंगे क्योंकि डंडे के दम पर आंदोलन और लोकतंत्र खत्म नहीं होते।