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अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर भारत रहे चौकन्ना

प्रकाशित: 31-05-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर भारत रहे चौकन्ना
आदित्य नरेन्द्र
पाकिस्तान के जन्म के साथ ही भारत से उसके रिश्ते बेहद जटिल रहे हैं। इन रिश्तों में अमेरिका का दखल उसे और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है। यही कारण है जिसके चलते भारत को चौकन्ना रहने की जरूरत है ताकि उसके हित प्रभावित न हों क्योंकि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार के सैन्य, रणनीतिक या आर्थिक सहयोग का भारत पर सीधा असर सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन के रूप में पड़ता है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता या हथियारों का उपयोग अकसर भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इससे भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा होता रहा है। उसे अपनी सीमाओं की चौकसी और सुरक्षा के लिए बजट बढ़ाना पड़ता है। पाकिस्तान की कोशिश होती है कि जब भी भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते तल्ख हों तो अमेरिका के करीब जाया जाए और आर्थिक व सैन्य फायदा उठाया जाए। अमेरिका भी जानता है कि उसकी दी हुई ऐसी मदद का इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ ही करता है। दरअसल अमेरिका के लिए पाकिस्तान एक ऐसा मोहरा है जिसका इस्तेमाल वह पाकिस्तान के आसपास के सभी देशों के खिलाफ कर सकता है। पाकिस्तान भी इस बात को जानता है और खुशी-खुशी अमेरिका के लिए वह सभी काम करने के लिए तैयार हो जाता है जो अमेरिका चाहता है। इसके परिणामस्वरूप जब भी अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध मजबूत होते हैं तो पाकिस्तान की आईएमएफ और एफएटीएफ जैसे कूटनीतिक और आर्थिक मंचों पर मजबूती मिलती है। जिसका सीधा असर कश्मीर विवाद और भारत-पाक के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। भारत-पाक सीमा विश्व की सबसे अधिक सैन्यीकृत अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं में से एक है। भारत ने पाक के साथ संबंध सुधारने के लिए अनेक प्रयास किए हैं। इनमें 1972 का शिमला समझौता, 1999 का लाहौर शिखर सम्मेलन और 2001 का आगरा शिखर सम्मेलन शामिल है। इन प्रयासों के बावजूद पाकिस्तानी पक्ष द्वारा प्रायोजित सीमा पार की आतंकी घटनाओं ने संबंधों में सुधार नहीं आने दिया। पहलगाम की आतंकी घटना के बाद भारत द्वारा आपरेशन सिंदूर इसका ज्वलंत उदाहरण है। इसके बावजूद भी पाकिस्तान का रुख भारत को लेकर बदलता नहीं दिख रहा। अमेरिका और इजरायल के द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद अब जब दोनों पक्षों के बीच समझौते की बात चल रही है तो पाकिस्तान को इसमें भी एक अवसर दिखाई दे रहा है। अब वह दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराने की भूमिका में दिखाई दे रहा है। उसे लगता है कि उसकी इस भूमिका के बाद दक्षिण एशिया में उसकी भूमिका और कद बढ़ जाएगा। अमेरिका भी उसकी इस महत्वाकांक्षा को जानता है। इसीलिए उसने अपना हाथ पाकिस्तान की पीठ पर रख दिया है। भारत के लिए यह स्थिति असहज करने वाली है। पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने बेहतर संबंधों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता आया है। भारत इस बात को जानता है। यही कारण है कि भारत ने अमेरिकी विदेश मंत्री की पिछले दिनों हुई भारत यात्रा के दौरान अपनी चिंता जताने में बिल्कुल भी कोताही नहीं बरती। भारत जानता है कि अमेरिका और पाकिस्तान को एक-दूसरे की जितनी जरूरत है उससे कहीं अधिक अमेरिका को उसकी जरूरत होगी जब चीन और अमेरिका के बीच तनातनी होगी। ऐसा कब होगा इसे कोई नहीं जानता। फिलहाल अमेरिका पाकिस्तान के साथ रिश्तों में गर्मजोशी दिखा रहा है। यह गर्मजोशी कब तक रहेगी यह अमेरिका ही जानता है। जहां तक भारत और पाकिस्तान का सवाल है तो दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आने की संभावना फिलहाल नहीं है। ऐsसे में पाकिस्तान के अमेरिका के साथ बढ़ते-घटते रिश्तों पर नजर रखनी जरूरी है।