गहराता संकट
प्रकाशित: 15-05-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया में इस वक्त तनाव का मुख्य केन्द्र बना हुआ है जहां बुधवार को सुबह भारत के ध्वज वाली मशीनी पाल नौका हाजी अली ओमान के जल क्षेत्र में हमले का शिकार हो गई। पोत पर सवार सभी 14 सदस्यों को ओमान तटरक्षक दल ने सुरक्षित बचा लिया है। भारत सरकार ओमान प्रशासन और भारतीय राजदूतावास के साथ मिलकर सभी को भारत लाने का प्रयास कर रही है। दरअसल ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने जब हमला करके उनके नेताओं, शीर्ष सैन्य अधिकारियों तथा वैज्ञानिकों का सफाया कर दिया तो तेहरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी के देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तो हमला किया ही साथ ही उन देशों की सम्पत्तियों को भी निशाना बनाया जो अमेरिका द्वारा संरक्षित घोषित की गई हैं। युद्ध के दौरान पूरी दुनिया को अपने रणनीतिक महत्व का एहसास दिलाने के लिए होर्मूज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया। कुछ मित्र देशों को छोड़कर ईरान ने सभी देशों की जहाजों को इस क्षेत्र से गुजरने की छूट नहीं दी।
अमेरिका ने जलडमरूमध्य से निर्बाध जहाजों को गुजरने के लिए ईरान को धमकाया भी किन्तु वहां की सेना और सिविल प्रशासन ने एक न सुनी। परिणाम स्वरूप अमेरिका ने भी जलडमरूमध्य की घेराबंदी कर दी। आज भी ईरान और अमेरिका दोनों के सैनिक इस क्षेत्र में तैनात हैं।
सच तो यह है कि ईरान और अमेरिका के बीच जो युद्ध विराम हुआ है वह कभी भी दोबारा टूट सकता है। इस बार यदि युद्ध भड़का तो वह इतना विकराल होगा कि ईरान तो बर्बाद होगा ही खाड़ी के देश भी तबाह हो जाएंगे।
सच तो यही है कि एलपीजी गैस की महंगाई के वजह से 42 महीनों में भारत की मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत पार कर गई है। मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था रूपी शरीर का मधुमेह होता है। इससे देश, संस्थानों और निजी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की संभावित कीमतों का अनुमान लगाकर ही देशवासियों से ईंधन कम खर्च करने का आग्रह करके इस बात की चेतावनी दी है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध दोबारा छिड़ा तो भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़े बिना नहीं रहेगा। इसलिए देश की जनता पहले से ही पेट्रोल, डीजल और कुकिंग गैस को ज्यादा खर्च न करें अन्यथा विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो जाएगा तो भारतीय अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। यद्यपि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता से पेट्रोल, डीजल, एलपीजी कम से कम खर्च करने के अनुरोध के तुरन्त बाद खुद ही अपने काफिले में शामिल होने वाली 14 गाड़ियों को कम करके मात्र तीन गाड़ी में सीमित कर दिया। मतलब यह कि एक गाड़ी में खुद प्रधानमंत्री, एक गाड़ी अतिरिक्त और एक मंर सुरक्षाकमी होंगे। इसी तरह केन्द्राrय मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों ने अपने काफिले में शामिल गाड़ियों में 80 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है। प्रधानमंत्री के आ"ान पर राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के मुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों ने काफिले को छोटा करके प्रधानमंत्री मोदी के फैसले का समर्थन किया है।
बहरहाल एक जहाज के हमले की चपेट में आने अथवा घात लगाकर हमला किए जाने से जलकर वह डूब गया। यह भारत के लिए अत्यन्त दुःख और चिन्ता बढ़ाने वाली बात है। इसलिए अब देश के सभी वर्गें को ऊर्जा संरक्षण के प्रति सजग हो जाना चाहिए। जन सामान्य को ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि निजी वाहन को कुछ दिन के लिए पेट्रोल व डीजल की जरूरत न पड़े। इसी तरह सीएनजी और एलपीजी गैस के खर्च को भी कम से कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
अमेरिका ने जलडमरूमध्य से निर्बाध जहाजों को गुजरने के लिए ईरान को धमकाया भी किन्तु वहां की सेना और सिविल प्रशासन ने एक न सुनी। परिणाम स्वरूप अमेरिका ने भी जलडमरूमध्य की घेराबंदी कर दी। आज भी ईरान और अमेरिका दोनों के सैनिक इस क्षेत्र में तैनात हैं।
सच तो यह है कि ईरान और अमेरिका के बीच जो युद्ध विराम हुआ है वह कभी भी दोबारा टूट सकता है। इस बार यदि युद्ध भड़का तो वह इतना विकराल होगा कि ईरान तो बर्बाद होगा ही खाड़ी के देश भी तबाह हो जाएंगे।
सच तो यही है कि एलपीजी गैस की महंगाई के वजह से 42 महीनों में भारत की मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत पार कर गई है। मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था रूपी शरीर का मधुमेह होता है। इससे देश, संस्थानों और निजी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की संभावित कीमतों का अनुमान लगाकर ही देशवासियों से ईंधन कम खर्च करने का आग्रह करके इस बात की चेतावनी दी है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध दोबारा छिड़ा तो भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़े बिना नहीं रहेगा। इसलिए देश की जनता पहले से ही पेट्रोल, डीजल और कुकिंग गैस को ज्यादा खर्च न करें अन्यथा विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो जाएगा तो भारतीय अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। यद्यपि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता से पेट्रोल, डीजल, एलपीजी कम से कम खर्च करने के अनुरोध के तुरन्त बाद खुद ही अपने काफिले में शामिल होने वाली 14 गाड़ियों को कम करके मात्र तीन गाड़ी में सीमित कर दिया। मतलब यह कि एक गाड़ी में खुद प्रधानमंत्री, एक गाड़ी अतिरिक्त और एक मंर सुरक्षाकमी होंगे। इसी तरह केन्द्राrय मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों ने अपने काफिले में शामिल गाड़ियों में 80 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है। प्रधानमंत्री के आ"ान पर राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के मुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों ने काफिले को छोटा करके प्रधानमंत्री मोदी के फैसले का समर्थन किया है।
बहरहाल एक जहाज के हमले की चपेट में आने अथवा घात लगाकर हमला किए जाने से जलकर वह डूब गया। यह भारत के लिए अत्यन्त दुःख और चिन्ता बढ़ाने वाली बात है। इसलिए अब देश के सभी वर्गें को ऊर्जा संरक्षण के प्रति सजग हो जाना चाहिए। जन सामान्य को ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि निजी वाहन को कुछ दिन के लिए पेट्रोल व डीजल की जरूरत न पड़े। इसी तरह सीएनजी और एलपीजी गैस के खर्च को भी कम से कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए।