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ब्रिक्स बैठक में ईरानी विदेश मंत्री अराघची का अमेरिका पर तीखा प्रहार

प्रकाशित: 15-05-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
ब्रिक्स बैठक में ईरानी विदेश मंत्री अराघची का अमेरिका पर तीखा प्रहार
आदित्य नरेन्द्र
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे। भारत मंडपम में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कर रहे हैं। बैठक के दौरान अराघची ने अपने भाषण में अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए ‘ाtढर और अवैध आाढमण' की कड़ी निंदा की। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की स्पष्ट निंदा करने और ऐसे आाढामक कृत्यों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की अपील की। अपने संबोधन में अराघची ने कहा, ईरान ब्रिक्स सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सभी जिम्मेदार सदस्यों से अपील करता है कि वे अमेरिका और इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की, जिसमें ईरान के खिलाफ उनकी अवैध आाढामकता शामिल है, स्पष्ट रूप से निंदा करें। उन्होंने अमेरिका को ‘बुलिंग' (धमकी भरी नीति) और ‘पतनशील साम्राज्यों' की तरह हताश व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा, इतिहास गवाह है कि पतनशील साम्राज्य अपनी अनिवार्य हार को रोकने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। घायल जानवर की तरह वे हताश होकर चीखते-चिल्लाते और नाखून गड़ाते हैं।
अराघची ने आगे कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता किसी के भी हित में नहीं है और यह ‘आाढमणकारियों सहित सभी पक्षों के लिए हार-हार' साबित हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा, ईरान न केवल अपनी स्वतंत्रता और भूमि की रक्षा के लिए हर उपलब्ध साधन से लड़ने को तैयार है, बल्कि कूटनीति का रास्ता अपनाने और बचाने के लिए भी उतना ही तैयार है। अराघची ने पश्चिमी देशों की ‘झूठी श्रेष्ठता' और ‘वार्मॉन्गरिंग' (युद्धोन्माद) की आलोचना करते हुए ब्रिक्स को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था मजबूत करने और पश्चिमी वर्चस्व का मुकाबला करने का आह्वान किया।
यह भाषण ऐसे समय में आया है जब फरवरी 2026 से ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। अराघची ने बैठक के दौरान यूएई पर भी आरोप लगाया कि उसने आाढमण में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई, हालांकि उन्होंने एकता के लिए मुख्य भाषण में इसका नाम नहीं लिया।
ब्रिक्स बैठक में ईरान ने इस मुद्दे को प्रमुखता दी, जबकि भारत समेत अन्य सदस्य देश ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अराघची ने जयशंकर समेत अन्य विदेश मंत्रियों से अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। यह दौरा ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।