रुपया सात पैसे टूटकर 95.73 प्रति डॉलर के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर
प्रकाशित: 14-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तर 95.73 ाअस्थाया पर रहा।
मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच घरेलू मुद्रा में यह गिरावट आई।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि मुद्रास्फीति की चिंताओं और वैश्व्कि बाजार में डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में कमजोर रुख बना रह सकता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से भारत के कच्चे तेल आयात पर असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि से ईंधन आयात भी महंगा हो गया है।
कारोबारियों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत डॉलर और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंताओं के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिससे रुपया इस वर्ष एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। इस साल अब तक इसमें छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच घरेलू मुद्रा में यह गिरावट आई।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि मुद्रास्फीति की चिंताओं और वैश्व्कि बाजार में डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में कमजोर रुख बना रह सकता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से भारत के कच्चे तेल आयात पर असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि से ईंधन आयात भी महंगा हो गया है।
कारोबारियों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत डॉलर और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंताओं के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिससे रुपया इस वर्ष एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। इस साल अब तक इसमें छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।