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अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक शहीद, भारत ने जताई निंदा

प्रकाशित: 12-06-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक शहीद, भारत ने जताई निंदा
आदित्य नरेन्द्र
11 जून 2026 को भारत सरकार ने पुष्टि की कि पलाउ-ध्वजांकित तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए। घटना 10 जून को ओमान तट के निकट गल्फ ऑफ ओमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हुई। यूएस सेंट्रल कमांड (ण्ऱिंऊण्ध्श्) के अनुसार, टैंकर ने अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाए गए ईरान से जुड़े शिपिंग ब्लॉकेड का उल्लंघन किया था। जहाज ईरानी तेल ले जा रहा था और रोकने के निर्देशों की अनदेखी की। अमेरिकी विमान ने इंजन रूम में प्रिसीजन मुनिशन दागे।
जहाज पर कुल 28 ाtढ मेंबर्स थे, जिनमें 24 भारतीय थे। ओमानी नौसेना ने 21 भारतीयों को बचाया। शुरू में तीन लापता बताए गए डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पत्नाला सुरेश। बाद में उनके शव बरामद हुए और पहचान की पुष्टि हुई। भारत सरकार ने शवों को स्वदेश लाने और बचे ाtढ को वापस लाने के निर्देश दिए। विदेश मंत्रालय ने घटना की कड़ी निंदा की। भारत ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले बंद होने चाहिए। क्षेत्रीय तनाव का सीधा परिणाम यह घटना है। नई दिल्ली में अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जेसन मीक्स को तलब किया गया और मजबूत विरोध दर्ज कराया गया। शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसे गहरा दुखद बताया। यह घटना अप्रैल 2026 से चले आ रहे अमेरिका-ईरान तनाव का हिस्सा है। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से तेल परिवहन को नियंत्रित करने के लिए ब्लॉकेड लगाया, जहां दुनिया के 20 प्रतिशत तेल-गैस का परिवहन होता है। इससे पहले मारिवेक्स नामक दूसरे जहाज पर भी हमला हुआ, लेकिन उसमें जान का नुकसान नहीं हुआ। भारतीय नाविकों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय कर स्थिति पर नजर रखी। परिवारों को सूचना दी गई। यह पहली बार है जब ब्लॉकेड लागू करने में अमेरिकी कार्रवाई से भारतीय जानें गईं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी व्यावसायिक शिपिंग पर हमलों का विरोध दर्ज किया। सरकार ने सभी भारतीय जहाजों को सतर्क रहने और सुरक्षित मार्ग चुनने की सलाह दी। यह घटना वैश्विक समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठाती है। भारत जैसे देश, जिनके हजारों नाविक अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर काम करते हैं, प्रभावित हुए। नई दिल्ली ने डी-एस्केलेशन और संवाद का आह्वान किया।