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नहीं बदले तो मिटना तय

प्रकाशित: 16-05-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
नहीं बदले तो मिटना तय
एक जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान सरकार अगले वर्ष यानि 2026-27 के बजट में 100 अरब पाकिस्तानी रुपए की वृद्धि करने पर विचार कर रही है जबकि वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) समर्थित सुधार कार्यक्रम के तहत अपना बजट तैयार कर रहा है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ बड़ी युद्ध की तैयारी में है। पाकिस्तान अकेले भारत ही नहीं अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के खिलाफ भी मोर्चा खोल रखा है किन्तु जिस तरह भारत आपरेशन सिन्दूर-2 करने की बार-बार चेतावनी पाकिस्तान को देता है, उससे उनकी फौज की मीडिया में आए दिन फजीहत होती है।
दरअसल मिलिट्री बैलेंस पर नजर डालें तो पाकिस्तान भारत के सामने कहीं नहीं टिकता किन्तु जब कभी भी युद्ध होता है तो निश्चित रूप से विकास का पहिया या तो पटरी से उतर जाती है या फिर उसकी गति धीमी हो जाता है। आपरेशन सिन्दूर में सैन्य नेतृत्व को जब अपना लक्ष्य हासिल हो गया तो वह आगे युद्ध करने की किसी तरह की योजना आगे नहीं बढ़ाना चाहता था किन्तु जब पाकिस्तान ने 7 मई को जेहादी ठिकानों पर हुए हमले को अपने सैन्य ठिकानों पर हमला मानकर प्रतिकार किया तब भारत ने उसे करारा जवाब दिया जिसके तहत उसके 9 एयरपोर्ट तबाह हो गए। पाकिस्तान की पहल पर 10 मई को दोनों देशों ने युद्ध विराम करके यह साबित कर दिया कि युद्ध कोई भी नहीं चाहता था। भारत ने तो मात्र उन आतंकी ठिकानों पर हमले किए जो हमारी देश की सुरक्षा के लिए खतरे बने हुए थे और पहलगाम नरसंहार के बाद पूरा देश उन आतंकियों के खिलाफ आक्रोशित था। भारत ने पाकिस्तान के किसी भूभाग पर आधिपत्य जमाने के उद्देश्य से हमला नहीं किया था। भारत हमेशा पाकिस्तान को इस बात की चेतावनी देता रहता है कि वह यदि दोबारा कोई आतंकी हमला करता है तो उसे भयंकर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री और सेना प्रमुख ने तो कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि उसकी परमाणु हमले की धौंस से कोई नहीं डरता। यदि भारत पर कोई आतंकी हमला हुआ तो उसे स्टेट ऐक्टर का एक्ट आफ वार मानकर प्रतिकार किया जाएगा। शनिवार को सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी नई दिल्ली स्थित मानेकाशा सेंटर में यूनिफार्म अनबील्ड द्वारा आयोजित एक संवाद सत्र में सेना प्रमुख ने एक सवाल के जवाब में दो टूक कहा कि “यदि आपने मुझे पहले सुना है तो मैंने यही कहा है कि पाकिस्तान अगर आतंकवादियों को पनाह देना और भारत के खिलाफ काम करना जारी रखता है तो उसे तय करना होगा कि वह भूगोल का हिस्सा रहना चाहता है या इतिहास का।'' इससे एक बात तो बड़ी स्पष्ट है कि भारत पाकिस्तान के प्रति बिल्कुल नरमी बरतने वाला नहीं है। भारत ने भी अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है जिसके तहत एस-400 हासिल किया तथा पाकिस्तान पर हमले के लिए ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें की व्यवस्था कर रहा है। इसी तरह मित्र देशों से तमाम उपकरणों को सीमा एवं रक्षा ठिकानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया है जिनसे पाकिस्तान की हर गतिविधि पर गहरी एवं पैनी नजर रखी जा रही है।
बहरहाल भारत की तरफ से पाकिस्तान को मिल रही इन्हीं चेतावनी के कारण वहां के सैनिक शासकों को लग रहा है कि यही सही वक्त है कि रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी कर देनी चाहिए। पाकिस्तान की मुद्रास्फीति 10.9 प्रतिशत पहुंच गई है। यानि महंगाई खूंटा तोड़ कर भाग रही है बैलेंस आफ पेमेण्ट के लिए विदेशी मुद्रा के लिए ठन-ठन गोपाल हैं। दूसरे देश से पैसे लेकर अपने रिजर्व बैंक में गारंटी के रूप में रखे हैं। सरकारी प्रतिष्ठान गिरवी हैं किन्तु पाकिस्तान की जेहादी आमी भारत के खिलाफ आतंकियों को अनुदान देकर अपनी चौथी यानि जेहादी विंग बनाए रखने की जिद पर अड़ा हुआ है। उसे जनता के दुःख दर्द से कोई वास्ता नहीं वह तो चाहते हैं कि भारत के साथ तनाव बढ़ेगा तो भीख में मिले पैसों से रक्षा बजट बढ़ाया जाएगा। रक्षा बजट बढ़ने से एक तरफ पाक जनता को सेना मूर्ख बना सकेगी अब वह भारत की तरफ से होने वाले हमलों को रोक पाएगा तथा उस रक्षा बजट के पैसों को सफाचट करने की जो प्रवृत्ति सेना ने पाल रखी है उसमें भी वह सफल होगा किन्तु सच तो यह है यदि सेना ने अपने जेहादी चरित्र को नहीं बदला तो वही होगा जो आज जनरल द्विवेदी ने कहा है।