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चीन दौरे के बाद ताइवान पर ट्रंप के बदले सुर, कहा- '15 हजार किलोमीटर दूर जाकर नहीं लड़ेंगे युद्ध'

प्रकाशित: 16-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
चीन दौरे के बाद ताइवान पर ट्रंप के बदले सुर, कहा- '15 हजार किलोमीटर दूर जाकर नहीं लड़ेंगे युद्ध'
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की दो दिवसीय चीन यात्रा वैश्विक कूटनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। यात्रा के दौरान ताइवान मुद्दे पर ट्रंप के बयान से अमेरिका की दशकों पुरानी 'रणनीतिक अस्पष्टता' नीति में नरमी के संकेत मिले हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता के लिए '9500 मील (करीब 15 हजार किलोमीटर) दूर जाकर युद्ध लड़ने' के पक्ष में नहीं है।
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ताइवान को औपचारिक स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाने से आगाह करते हुए कहा कि वह मौजूदा स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि कोई स्वतंत्रता घोषित करे और फिर अमेरिका को हजारों मील दूर जाकर युद्ध लड़ना पड़े। मैं चाहता हूं कि हालात शांत रहें और चीन भी संयम बरते।"
ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के लिए ताइवान हमेशा सबसे अहम मुद्दा रहा है। उनके अनुसार, चीन ताइवान पर कब्जा करने से ज्यादा इस बात को लेकर चिंतित है कि ताइवान खुद को औपचारिक रूप से स्वतंत्र राष्ट्र घोषित न करे।
ट्रंप ने दावा किया कि ताइवान का नेतृत्व यह मानकर स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा है कि अमेरिका सैन्य समर्थन देगा।शी चिनफिंग ने ट्रंप से बातचीत में कहा कि द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ताइवान मुद्दे को कितनी समझदारी से संभाला जाता है।
चीन ने दोहराया कि 'ताइवान की स्वतंत्रता' और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति साथ-साथ नहीं चल सकते। बीजिंग ने कहा कि जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखना चीन और अमेरिका के साझा हित में है।
अमेरिका 'वन चाइना' नीति को आधिकारिक मान्यता देता है, लेकिन ताइवान के साथ उसके अनौपचारिक संबंध बने हुए हैं। ताइवान संबंध अधिनियम के तहत अमेरिका ताइवान को रक्षा सहायता और हथियार उपलब्ध कराता है।
अमेरिकी कांग्रेस के रिकार्ड के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की 2025 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में ताइवान को लेकर किसी भी एकतरफा बदलाव का विरोध दोहराया गया है। साथ ही कहा गया है कि ताइवान को लेकर संघर्ष रोकना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है।
प्रेट्र के अनुसार, ट्रंप ने चीन यात्रा से लौटने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ हुई बैठक को 'जी-2' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह दुनिया के 'दो महान देशों' की बैठक थी और इतिहास में इसे बेहद महत्वपूर्ण क्षण के रूप में याद किया जाएगा।
ट्रंप ने दावा किया कि चीन के साथ उनकी बातचीत बेहद सफल रही और कई बड़े व्यापारिक समझौते हुए। उन्होंने कहा कि चीन ने बोइंग से 200 विमानों की खरीद का समझौता किया है, जबकि 750 और विमानों की खरीद का आश्वासन भी दिया गया है।
इस बीच, वाशिंगटन पोस्ट ने ट्रंप की टिप्पणी को चीन के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया। अखबार के मुताबिक, ट्रंप के बयान ने चीन को अमेरिका के बराबर वैश्विक शक्ति के रूप में पेश किया, जो लंबे समय से राष्ट्रपति चिनफिंग की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।