वेणुगोपाल का प्रधानमंत्री को पत्र, एफसीआरए संशोधन नियम, 2026 को वापस लेने का आग्रह किया
प्रकाशित: 26-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। कांग्रेस के संग"न महासचिव केसी वेणुगोपाल ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) से संबंधित अधिसूचना को लेकर बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर चिंता जताई और उनसे आग्रह किया कि संशोधन नियम, 2026 को तत्काल वापस लिया जाए और सभी हितधारकों से संवाद किया जाए।
गृह मंत्रालय ने एफसीआरए, 2010 के तहत विदेशी चंदा प्राप्त करने व इस्तेमाल करने वाले गैर सरकारी संग"नों (एनजीओ) से जुड़े कई अपराधों के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने में संशोधन किया है। मंत्रालय ने सोमवार को एक गजट अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के मुताबिक, अधिनियम की धारा-8 का उल्लंघन कर प्रशासनिक खर्चों के लिए मिले विदेशी अंशदान की 20 प्रतिशत से अधिक राशि अन्य मदों पर खर्च करने पर जुर्माना एक लाख रुपये या सीमा से ज्यादा खर्च की गई रकम का पांच प्रतिशत (इनमें से जो भी ज़्यादा हो) लगाया जाएगा।
वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, मैं हाल ही में गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के प्रति अपना विरोध और गहरी चिंता दर्ज कराने के लिए आपको पत्र लिख रहा हूं। ये नियम भारत के नागरिक समाज पर एक खुला और व्यवस्थित हमला हैं, जिनका उद्देश्य विनियमन करना नहीं, बल्कि उन गैर-सरकारी संग"नों का गला घोंटना है, जो हमारे जमीनी विकास और सामाजिक कल्याण ढांचे की रीढ़ हैं। उनका कहना है कि नवीनतम संशोधन नागरिक समाज को सूक्ष्म स्तर पर नियंत्रित करने, परेशान करने और आर्थिक रूप से पंगु बनाने की एक चिंताजनक मंशा को दर्शाते हैं। कांग्रेस सांसद ने दावा किया, अलग राज्य या गतिविधि की श्रेणी के लिए अलग शुल्क लगाना, वस्तुत: एक प्रशासनिक टोल टैक्स है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में सामाजिक कार्य करने को हतोत्साहित करना है। उनके मुताबिक, मामूली प्रशासनिक त्रुटियों या पूर्व-अनुमोदित भौगोलिक क्षेत्रों के बाहर कार्य करने पर निधियों के 30 प्रतिशत तक अथवा न्यूनतम एक लाख रुपये तक का अत्यधिक जुर्माना लगाना अत्यंत प्रतिशोधात्मक कदम है। वेणुगोपाल ने दावा किसा, ये दंडात्मक उपाय उन छोटे और जमीनी संग"नों को दिवालिया कर देंगे, जिनके पास बड़ी कॉरपोरेट कानूनी टीम नहीं हैं, लेकिन जो हमारे देश के सबसे वंचित समुदायों, विशेषकर धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थानों, के लिए सबसे अधिक कार्य करते हैं।
गृह मंत्रालय ने एफसीआरए, 2010 के तहत विदेशी चंदा प्राप्त करने व इस्तेमाल करने वाले गैर सरकारी संग"नों (एनजीओ) से जुड़े कई अपराधों के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने में संशोधन किया है। मंत्रालय ने सोमवार को एक गजट अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के मुताबिक, अधिनियम की धारा-8 का उल्लंघन कर प्रशासनिक खर्चों के लिए मिले विदेशी अंशदान की 20 प्रतिशत से अधिक राशि अन्य मदों पर खर्च करने पर जुर्माना एक लाख रुपये या सीमा से ज्यादा खर्च की गई रकम का पांच प्रतिशत (इनमें से जो भी ज़्यादा हो) लगाया जाएगा।
वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, मैं हाल ही में गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के प्रति अपना विरोध और गहरी चिंता दर्ज कराने के लिए आपको पत्र लिख रहा हूं। ये नियम भारत के नागरिक समाज पर एक खुला और व्यवस्थित हमला हैं, जिनका उद्देश्य विनियमन करना नहीं, बल्कि उन गैर-सरकारी संग"नों का गला घोंटना है, जो हमारे जमीनी विकास और सामाजिक कल्याण ढांचे की रीढ़ हैं। उनका कहना है कि नवीनतम संशोधन नागरिक समाज को सूक्ष्म स्तर पर नियंत्रित करने, परेशान करने और आर्थिक रूप से पंगु बनाने की एक चिंताजनक मंशा को दर्शाते हैं। कांग्रेस सांसद ने दावा किया, अलग राज्य या गतिविधि की श्रेणी के लिए अलग शुल्क लगाना, वस्तुत: एक प्रशासनिक टोल टैक्स है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में सामाजिक कार्य करने को हतोत्साहित करना है। उनके मुताबिक, मामूली प्रशासनिक त्रुटियों या पूर्व-अनुमोदित भौगोलिक क्षेत्रों के बाहर कार्य करने पर निधियों के 30 प्रतिशत तक अथवा न्यूनतम एक लाख रुपये तक का अत्यधिक जुर्माना लगाना अत्यंत प्रतिशोधात्मक कदम है। वेणुगोपाल ने दावा किसा, ये दंडात्मक उपाय उन छोटे और जमीनी संग"नों को दिवालिया कर देंगे, जिनके पास बड़ी कॉरपोरेट कानूनी टीम नहीं हैं, लेकिन जो हमारे देश के सबसे वंचित समुदायों, विशेषकर धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थानों, के लिए सबसे अधिक कार्य करते हैं।