एआई मिशन को रफ्तार देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: योगी
प्रकाशित: 21-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ, (भाषा)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी) की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक मुख्यमंत्री ने प्रदेश के भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर , प्रोजेक्ट गंगा तथा गेहूं के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क एवं मंडी उप कर में संभावित छूट जैसे मामलों की उच्च स्तरीय समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने यूपीडीसीसी की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए और इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है।
विज्ञप्ति के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टाटा समूह सहित बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। समीक्षा बै"क के दौरान एक प्रस्तुतीकरण के जरिये बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को कृत्रिम मेधा, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च प्रौद्योगिकी डिजिटल विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है।
बयान के मुताबिक प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह केवल एक परियोजना नहीं बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है और इसके तहत वर्ष 2040 तक पांच लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था, डेढ़ लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और पांच गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने गवर्नेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट यानी wप्रोजेक्ट गंगौ की भी समीक्षा की और निर्देश दिए कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। बयान के अनुसार बै"क में बताया गया कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाने की महत्वाकांक्षी पहल है।
मुताबिक मुख्यमंत्री ने गेहूं के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी विस्तृत समीक्षा की और उन्होंने मंडी उप कर और मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यूपीडीसीसी की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए और इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है।
विज्ञप्ति के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टाटा समूह सहित बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। समीक्षा बै"क के दौरान एक प्रस्तुतीकरण के जरिये बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को कृत्रिम मेधा, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च प्रौद्योगिकी डिजिटल विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है।
बयान के मुताबिक प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह केवल एक परियोजना नहीं बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है और इसके तहत वर्ष 2040 तक पांच लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था, डेढ़ लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और पांच गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने गवर्नेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट यानी wप्रोजेक्ट गंगौ की भी समीक्षा की और निर्देश दिए कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। बयान के अनुसार बै"क में बताया गया कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाने की महत्वाकांक्षी पहल है।
मुताबिक मुख्यमंत्री ने गेहूं के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी विस्तृत समीक्षा की और उन्होंने मंडी उप कर और मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाया जाना चाहिए।