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हृदय संजीवनी कार्पाम का शुभारंभ हर विद्यार्थी बने जीवन रक्षक:उपमुख्यमंत्री

प्रकाशित: 31-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ,(वीअ)। विद्यालयी विद्यार्थियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एवं बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से हृदय संजीवनी कार्पाम का आज शुभारंभ उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी के मार्गदर्शन एवं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद जी की प्रेरणादायी पहल पर किया गया। इस कार्पाम का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक जीवनरक्षक कौशल प्रदान कर उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में सक्षम बनाना है।
कार्पाम का शुभारंभ सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज, निराला नगर में हुआ, जहाँ 150 से अधिक विद्यार्थियों को ण्झ्R एवं बेसिक लाइफ सपोर्ट का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ण्झ्R की तकनीकों का अभ्यास किया।
कार्पाम की एक विशिष्ट एवं अभिनव विशेषता इसकी कविता-आधारित शिक्षण पद्धति है। ण्झ्R की आवश्यक एवं ाढमबद्ध जीवनरक्षक प्रािढयाओं को एक सरल, लयबद्ध और सहजता से स्मरण किए जा सकने वाले काव्यात्मक प्रोटोकॉल में रूपांतरित किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि आपातकालीन स्थिति में विद्यार्थी जीवनरक्षक उपायों के ाढम को शीघ्रता और आत्मविश्वास के साथ याद कर सकें। कार्पाम में ण्झ्R की प्रािढया को निम्न काव्यात्मक प्रोटोकॉल के माध्यम से सिखाया गया।
होश नहीं, श्वास नहीं,
धड़कन का एहसास नहीं।
ज़ोर लगा कर तेज पुकारो,
मदद खड़ी हो पास नहीं।
तीस दबाव दो, दूना फूंको,
जब तक धड़कन श्वास नहीं।
कविता के माध्यम से ण्झ्R की प्रािढया को सरल बनाने का यह अभिनव प्रयास सीखने, लय, पुनरावृत्ति और व्यावहारिक अभ्यास को एक साथ जोड़ता है। इससे विद्यार्थियों के लिए एक तकनीकी एवं आपातकालीन जीवनरक्षक प्रािढया को समझना, याद रखना और आवश्यकता पड़ने पर उसे दोहराना अधिक सहज हो जाता है। इस अवसर पर ख्उश्ळ की माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद जी ने कहा, जागरूकता केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह सकती। ‘हृदय संजीवनी' के माध्यम से हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यार्थी एक जिम्मेदार नागरिक बने, जो आपातकालीन स्थिति में किसी का जीवन बचाने में सक्षम हो। यह एक सुरक्षित और अधिक सजग समाज के निर्माण की दिशा में एक छोटा, किंतु महत्वपूर्ण कदम है।
आपातकालीन स्थिति में समय पर दिया गया ण्झ्R जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक अंतर उत्पन्न कर सकता है। यही विश्वास इस पहल का आधार है। प्रशिक्षित प्रत्येक विद्यार्थी आपातकालीन स्थिति में एक संभावित प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता बन सकता है, जो चिकित्सकीय सहायता पहुँचने तक आवश्यक जीवनरक्षक उपाय प्रारंभ कर सके। व्यावहारिक ण्झ्R एवं ँथ्ए प्रशिक्षण और कविता-आधारित अभिनव शिक्षण पद्धति के समन्वय से हृदय संजीवनी का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और प्रशिक्षित जीवनरक्षक बनाना है।