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नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा का पिछड़े वर्गो में विस्तार

प्रकाशित: 03-05-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा का पिछड़े वर्गो में विस्तार
भारतीय जंक्शन जो 1980 में भारतीय जनता पाटा के रूप में स्थापित हुआ और आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक दल के रूप में जानी जाती है और भारत में वेंद्र सरकार के अतिरित्त 70™ राज्य सरकारों में भी उनकी सरकार है। प्रारंभ में यह पाटा ब्राrाण और व्यापारी वर्ग की पाटा मानी जाती रही और अपने आदर्श पुरुष के रूप में पंडित दीन दयाल उपाध्याय और उनकी मृत्यु के पात उनके वैचारिक पक्ष को अटल बिहारी वाजपाईं राजनीतिक सिद्धांत के रूप में उजागर करती रही है। परंतु जबसे वर्ष 2014 से नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इस राजनीतिक दल का पिछड़े वर्गो में विस्तार हुआ है और अब तो ऐसी बात हो गईं है की मनुवाद में विश्वास करने वाले वुछ सवर्ण समर्थित राजनीतिक दल जो वर्षो से भाजपा का वोट बैंक रही है वह नरेंद्र मोदी की पिछड़े वर्गो में बढ़ती स्वीकार्यंता के कारण भाजपा का विरोध करते हुए समाजवादी पाटा जैसी राजनीतिक परटियों के साथ गोल बंद हो रहे हैं विचार का विषय यह है कि आखिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वर्ण और सरमाएदारो की पाटा मानने वाली पिछड़े और दलित वर्गो में स्वीकार्यं क्यों हो गईं है।
वर्ष 1991 जब उत्तर प्रदेश में राम मंदिर निर्माण का मामला पूरेउफान पर था और उस समय उत्तर प्रदेश भाजपा को संगठन की दृष्टि से स्र्वणिम काल माना जाता था और कल्याण सिह और कलराज मिश्र की जोड़ी उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन को प्रदेश में मजबूत बनाने में लगी हुईं थी और प्रणाम यह रहा की विधानसभा चुनाव में भाजपा पहली बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आईं और पिछले वर्ग से संबंध रखने वाले कल्याण सिह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए। यदृापि आज भी कानून व्यवस्था की दृष्टि से कल्याण सिह के शासन को सवरेत्तम माना जाता था, उनके ही शासन में गुंडे उत्तर प्रदेश सीमा से बाहर पलायन करने को मजबूर हो गए थे और बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर रोक लगी, लेकिन उनके शासन काल में कल्याण सिह, विनय कटियार और ओम प्रकाश सिह, उमा भारती जैसे गिने चुने नेता जो पिछड़े वर्ग से आते थे मुख्य धारा में आ पाए।
पण्डित दीन दयाल उपाध्याय जी की मृत्य के पात पाटा का नेतृत्व अटल बिहारी वाजपाईं और लाल वृष्ण आडवाणी की जोड़ी ने संभाला और 1984 के आम चुनावों में मात्र दो सीट पर सिमटी पाटा ने वर्ष 1989 में 80 से अधिक सीटों के साथ इस परिस्थिति में आ गए कि सरकार के बाहर से समर्थन देकर कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखकर विश्वनाथ प्रताप सिह को प्रधानमंत्री बनाने में सफल हो गए। पर इस सरकार के गठन के साथ जहां संविधान निर्माता डॉ आंबेडकर को भारत रत्न मिला और पहली बार देश में मुख्य धारा से दलितों को जोड़ने की सरकार की इच्छा शत्ति दिखाईं दी। परंतु दशकों से ठंडे बस्ते में पड़ी मंडल आयोग की सिफारिश लागू होने और उसके बाद लाल वृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में राम मंदिर यात्रा और बिहार में उनकी गिरफ्तारी से देश की राजनीति मंडल और कमंडल की राजनीति के नाम पर दो खेमों में बट गईं।
जहां विश्वनाथ प्रताप सिह के साथ समाजवादी पाटा, राष्ट्रीय जनता दल व अन्य दल मंडल के नाम पर दलित और बहुजनों का नेतृत्व करने लगे वहीं अयोध्या में रामजन्म भूमि में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रवादी इकठ्ठा हुए जहां भाजपा सवर्णो और बनियों के साथ सर मायेदारो की पाटा मानी जाती थी यदृापि कार सेवको के रूप में हजारों की संख्या में दलित और पिछड़े इकट्ठे हुए पर वे कभी भाजपा के वोट बैंक नहीं बन पाईं। फिर भी भाजपा वर्ष 1998 से 2004 तक स्थल बिहारी वाजपाईं के नेतृत्व में एन डी ए सरकार चली और इसने अनुच्छेद 370, कॉमन सिविल कोड, ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों को अपने एजेंडे से बाहर रखा पर वह पिछड़े और दलितों को अपनी ओर आर्कषित नहीं कर पाईं। यदृापि डा बंगारू लक्ष्मण के रूप मे प्रथम बार एक दलित को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया पर उनके खिलाफ फजा हवाला मामले में पाटा उनके साथ खड़ी भी हुईं और उनके इस्तीपे के बाद भाजपा का दलितों और पिछड़ों को जोड़ने का सपना अधूरा रह गया।
वर्ष 1914 के लोकसभा चुनाव से पूर्व भाजपा का नेतृत्व नरेंद्र मोदी के हाथ में सोपा गया और उन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर दिया जिसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय जनता पाटा भारी बहुमत से चुनाव जीती अपने प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी जी ने देश की जनता को यह बता दिया था कि वह अति पिछला वर्ग के हैं और यही नहीं 2014 में प्रधानमंत्री के बाद बनने के बाद हाशिए पर पड़े पिछले वर्ग के नेता श्री कल्याण सिह को भाजपा में लाकर वह सम्मान दिया जिसके भागीदार थे और उन्हें राजस्थान जैसे बड़े राज्य का राज्यपाल बनाया यही नहीं उन्होंने रामनाथ कोविद और द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति बनाने की पहल की और दलित और आदिवासियों को यह विश्वास दिला दिया कि दलित और आदिवासी भी देश के सर्वोच्च पर जा सकते हैं आज कईं लोग यूजीसी एक्ट के करण नरेंद्र मोदी का विरोध कर रहे हैं परंतु नरेंद्र मोदी ने अपने 11 वर्षो के कार्यंकाल के दौरान पिछड़े और दलितों के बीच इतनी अच्छी पैठ बना ली है।
आज बिहार, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, उड़ीसा जैसे राज्य जहां भाजपा सत्ता में है वहां पिछड़े और आदिवासी ही मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बने और पहली बार मुसहर समाज से आने वाले जीतन राम मांझी जी को देश का सूक्ष्म लघु एवं मध्यम मंत्री बनाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पाटा सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं, संवैधानिक मान्यताओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से अन्य पिछड़ा वर्ग और वंचित वर्गो को में अपना आधार तेजी से बढ़ाया है। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया और वेंद्रीय विदृालयों और नवोदय विदृालयों में 27™ ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया और अपने मंत्रिमंडल में ओबीसी समाज की भागीदारी को बढ़ाकर उनका प्रतिनिधित्व सुनिाित किया।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 1.7 करोड़ से अधिक पीएम स्वनिधि योजना में रेहड़ी पटरी वालों 65™ ओबीसी, एस सी, एस को त्रण और विश्वकर्म योजना के माध्यम से वंचित वर्गो को लाभान्वित किया गया पिछली जातियों से संबंधित उदृामियों को सहायता और ओबीसी दी गईं और ीमी लेयर की आय की सीमा को 6 लाख से बढ़कर 8 लख रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया। आज ओबीसी समुदाय अपने परंपरागत उदृाम व व्यवसायों को सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उदृाम मंत्रालय द्वारा चलाईं गईं स्टार्ट अप योजना व इनक्यूबेटर के माध्यम से आधुनिक ढंग से चला रहे हैं तथा सरकारी बैंकों को व्यवसाय के लिए त्रण देते समय प्राथमिकता दी जाए।
एनडीए सरकार ने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग ओबीसी समुदाय के लिए सबका साथ सबका विकास के तहत काम किया है मोदी जी के प्रयासों के तहत ग्रामीण भारत में भाजपा को दलित और पिक्चरों में भारी समर्थन मिल रहा है मंडल राजनीति के प्रभाव वाले प्रदेश ऑन उत्तर प्रदेश बिहार उड़ीसा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाजपा ने सरकार बनाईं और कांग्रेस संबंधित परटियों का गाना माने जाने वाले राज्यों में भाजपा की सरकारी बन रही है मोदी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जहां पर मतदाता जाति के नाम पर वोट दिया करते थे, वहां 50™ के अधिक के पिछड़ा वर्ग की आबादी वाले राज्य में भाजपा ने पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाया है यह कार्यं मोदी जी के वुशल नेतृत्व और दृढ़ संकल्प का नतीजा है।
यह सही है कि यूजीसी एक्ट के विरोध में करणी सेना सहित अन्य हिदू समर्थक संगठन मोदी और भाजपा के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं और उन्हें सत्ता से बाहर हटाने की बटर कर रहे हैं पर सच्चाईं यह है की पिछडा, दलित और आदिवासियों के बीच नरेंद्र मोदी की स्वीकारिता इतनी अधिक बढ़ी है कि उनको सत्ता से हटाना संभव नहीं लगता, जो भाजपा किसी जमाने में सवर्णो और बनियों की पाटा मानी जाती थी आज ओबीसी दलित वंचित समाज का प्रतिनिधित्व कर रही है।
(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव हैं।) बसंत वुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पाटा सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं, संवैधानिक मान्यताओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से अन्य पिछड़ा वर्ग और वंचित वर्गो में अपना आधार तेजी से बढ़ाया है। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया और वेंद्रीय विदृालयों और नवोदय विदृालयों में 27™ ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया।