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प. बंगाल चुनाव : भय से भरोसे तक का सफर

प्रकाशित: 03-05-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
प. बंगाल चुनाव : भय से भरोसे तक का सफर
आदित्य नरेन्द्र
इस बार प. बंगाल विधानसभा के चुनाव पूरे देश को आने वाले कईं दशकों तक याद रहेंगे। डेढ़ महीने से अधिक समय तक चली चुनाव प्रव्रिया ने भय से भरोसे तक का जो सफर तय किया है वह अभूतपूर्व है। अब लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा इतिहास बनाते हुए पहली बार राज्य की सत्ता में आएगी या टीएमसी लगातार चौथी बार सत्ता में आएगी। फिलहाल अभी तक जो एग्जिट पोल सामने आए हैं उनमें 6 में से 5 पोल भाजपा के सत्ता में आने का संकेत दे रहे हैं। पिछले करीब 50 साल का इतिहास देखा जाए तो स्पष्ट होता है कि प. बंगाल की जनता ने जिसे भी सत्ता सौंपी है उसे एकतरफा जीत मिली है। फिर चाहे वह कांग्रेस हो, लेफ्ट हो या फिर टीएमसी हो। क्या ऐसी ही जीत भाजपा को भी मिलेगी इसका खुलासा चार मईं को होने वाली मतगणना के दौरान मिल जाएगा। इन चुनावों की खास बात यह रही कि इसमें भाजपा और टीएमसी ने अपना सब वुछ झोंक दिया है। ममता बनजी और सुवेन्दु अधिकारी एक बार फिर आमने-सामने मैदान में हैं जिससे इस बार के चुनाव खासे रोचक हो गए हैं। ममता बनजी का स्ट्रांग रूम तक जाना और ईंवीएम मशीनों को लेकर चेतावनी देना एक ओर जहां उनकी बेचैनी को बताता है तो वहीं दूसरी ओर सुवेन्दु अधिकारी का यह कहना कि मतदान के दौरान ममता बनजी का 50-60 समर्थकों के साथ क्षेत्र में घूमना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। यह भाजपा के रुख को बताता है कि वह सीएम को छूट देने के मूड में नहीं है। लम्बे समय से प. बंगाल में चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसा, बूथों पर कब्जा, फजी मतदान एक ऐसी हकीकत बन गए थे जिससे पार पाना आसान नहीं था। इसे ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने इस बार चुनाव को दो चरणों में कराने का पैसला किया जिसका परिणाम शानदार रहा। दोनों चरणों में मतदान लगभग शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। हिंसा के कारण कहीं से भी एक भी मौत की खबर नहीं मिली।
वुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर किसी बड़ी गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली। सिर्प 15 बूथों पर पुनर्मतदान होगा जो कि बेहद मामूली बात है। इस कामयाबी का सेहरा निश्चित रूप से चुनाव आयोग के सिर बांधा जाना चाहिए। चुनाव आयोग के बाद इस कामयाबी का व्रेडिट सुप्रीम कोर्ट को मिलना चाहिए जिसने एसआईंआर को रोकने वालों के मंसूबे सफल नहीं होने दिए और राज्य में शांतिपर्ण चुनाव की कोशिशों को अपना समर्थन दिया। पीएम मोदी ने मतदाताओं को भरोसे में लेते हुए कहा कि यदि भाजपा जीतती है तो वह स्वयं शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इससे मतदाताओं की हिम्मत बढ़ी। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को बख्शा नहीं जाएगा। इन चुनावों के शांतिपूर्ण ढंग से होने के लिए वेंद्रीय गृह मंत्रालय को भी व्रेडिट मिलना चाहिए।
वेंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिकार्ड 2.40 लाख पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान प. बंगाल की सड़कों पर उतारकर भय रहित, निष्पक्ष चुनाव कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वेंद्रीय गृह मंत्रालय के इसी कदम के चलते राज्य में दोनों चरणों में 92.47 फीसदी मतदान हुआ। यह भारत की स्वतंत्रता के बाद प. बंगाल में किसी भी चुनाव में अब तक का सबसे अधिक मतदान है। पहले राज्य का मतदाता सरकार के विरोध में मतदान करने से डरता था। उसे लगता था कि यदि उसने सरकार के खिलाफ मतदान किया तो उसे चुनाव बाद हिंसा का शिकार होना पड़ेगा। लेकिन अमित शाह के दो बड़े पैसलों ने उनका भरोसा बढ़ाया। पहला, शाह ने कहा कि वह चुनाव के दौरान 15 दिन प. बंगाल में ही रहेंगे और दूसरा राज्य में तैनात बलों में से लगभग एक तिहाईं जवान वोटिंग होने के बाद भी दो महीनों तक राज्य में ही रहेंगे। रहीसही कसर अजय पाल शर्मा जैसे पुलिस अफसरों ने पूरी कर दी जिन्होंने धमकी देने वाले टीएमसी नेताओं के खिलाफ चेतावनी देने में कोताही नहीं बरती। उम्मीद है कि अब जब मतदाताओं के दिल से भय निकल चुका है और लोकतंत्र में लोगों का भरोसा बढ़ा है तो हमें जल्द ही तेजी से प्रगति करता हुआ एक ऐसा प. बंगाल देखने को मिलेगा जो अब तक के प. बंगाल से बिल्वुल अलग होगा।
.उम्मीद है कि अब जब मतदाताओं के दिल से भय निकल चुका है और लोकतंत्र में लोगों का भरोसा बढ़ा है तो हमें जल्द ही तेजी से प्रगति करता हुआ एक ऐसा पश्चिम बंगाल देखने को मिलेगा जो अब तक के पश्चिम बंगाल से बिल्वुल अलग होगा