विवाहेत्तर सम्बन्धों के कारण बढ़ती हत्या और आत्महत्या चिंता का विषय
प्रकाशित: 16-08-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
बसंत कुमार
1990 के दशक में एक खबर बनी थी कि विवाहेत्तर सम्बन्धों के कारण देश ने प्रकाश पादुकोण की टक्कर का एक और प्रतिभावान खिलाड़ी सैय्यद मोदी खो दिया था जो यदि जीवित रहता तो इंग्लैंड ओपन सहित देश के लिए कई मेडल का सकता था पर लखनऊ में स्टेडियम से निकलते समय हत्या कर दी गई थी। 1979-80 में जब मैं भारतीय रेल में नौकरी करता था तो मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी स्वामी धनेश्वर प्रसाद जो बड़े ही नेक इंसान थे अपने गांव से अपने भाई के लड़के को दिल्ली में पढ़ा लिखा कर आईएएस बनाने के लिए लाए, उस लड़के की उम्र 19-20 वर्ष थी, स्वामीजी दिन में ऑफिस में लोगो से भतीजे की प्रतिभा की तारीफ करते रहते और उसके आईएएस बनने के ख्वाब देखते रहते, घर में उनकी 32 वर्षीय पत्नी और उनके भतीजे में प्यार हो गया और सारी सीमाओं को पार कर गया और घर में स्वामी जी की पत्नी द्वारा बेकद्री शुरु हो गई, जो पत्नी दिन रात अपने पति देव का ख्याल रखती थी वह उन्हें बात बात पर झिड़कती थी और उनसे ज्यादा खयाल उनके भतीजे का रखने लगी और कुछ दिन बाद दोनों घर छोड़कर भाग गए और पत्नी ने स्वामी जी पर मुकदमा दर्ज कर दिया, स्वामी जी पत्नी की बेवफाई के चलते 46 वर्ष की आयु में दो बच्चों को छोड़कर दुनिया से चले गए। पर आज कल विवाहेत्तर सम्बन्धों में बाढ-सी आ गई है हर रोज ऐसे संबंधों के कारण पतियों की हत्या से लेकर आत्महत्या की घटनाएं हो रही है। ऐसे में इस बात का विश्लेषण करना आवश्यक हो गया है कि इतनी अधिक संख्या में विवाहेत्तर सम्बन्ध क्यों हो रहे हैं आखिर इनका कारण क्या है?
आज कल विवाहेत्तर संबंधों के कारण आए दिन हत्या आत्म हत्या की घटनाएं बढ़ रही है और पति-पत्नी के बीच तलाक के केस बहुत ज्यादा हो रहे हैं और कुछ युवा तो शादी करने से भी इनकार कर रहे हैं। आज कल विवाहेत्तर सम्बन्ध में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और आधुनिकता के नाम पर बहुत बढ़ोत्तरी हो रही है, जो भारतीय और वैश्विक समाज में पारिवारिक ताने-बाने को खोखला कर रही है। यह केवल दो व्यक्तियों के निजी जीवन का मामला नहीं रह गया है बल्कि यह पूरे समाज बेहत घातक प्रभाव डाल रहा है और इसके निम्न परिणाम दिखाई कर रहे हैं-
विश्वास का अंत - पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की नींव विश्वास और आदर पर टिकी होती है और विवाहेत्तर जैसे नाजायज रिश्ते से यह विश्वास हमेशा के लिए टूट जाता है और फिर भी जुड़ता और ठगा हुआ जीवन साथी बाकी बची हुई जिंदगी ऐसे दुख के साथ जीता है जिसके बारे में किसी से कह नहीं सकता।
बच्चों पर मानसिक दबाव -विवाहेत्तर संबंधों के कारण मां बाप के बीच जो कलह होती है उसका सबसे बुरा असर बच्चों के कोमल मन पर पड़ता है, जिससे वे हीन भावना व असुरक्षा के शिकार हो जाते हैं।
घरेलू हिंसा और अपराध - कई मामलों में सच्चाई सामने आने पर घरेलू हिंसा, मारपीट, हत्या आत्महत्या जैसी जघन्य घटनाएं समाज को कलंकित करती है।
नैतिक मूल्यों का पतन -विवाहेत्तर संबंधों से समाज के नैतिक मूल्यों का पतन होता है।
अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए प्रसिद्ध भारत में विवाह जैसी परंपरा का टूटना बहुत बुरा संकेत है विदेशी जहां हमारी संस्कृति और परंपरा को अपना रहे हैं वहीं हम भारतवासी विदेशी संस्कृति और परंपरा का आँख मूद कर उसकी नकल कर रहे हैं, सामूहिक परिवार से हटकर अब न्यूक्लियर फैमिली की तरफ बढ़ रहे हैं पर विवाहेत्तर संबंधों में आई बाढ़ से अब न्यूक्लियर परिवार भी टूट रहे हैं।
यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि विवाहेत्तर संबंधों के कारण समाज में बड़ा गंभीर खतरा पैदा हो गया है जिन सगे भाई भतीजों नजदीकी रिश्तेदारों के भरोसे व्यक्ति अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी दे करअपनी नौकरी या व्यापार के लिए जाता था पर आज जब उसे पता चलता हैं कि उसकी अर्धांगिनी उसी भरोसे वाले भाई या रिश्तेदार के साथ अनैतिक संबंध बनाए हुए हैं तो उसके दिल पर क्या गुजरता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। मद्रास उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि इस तरह के मामलों से हत्या, आत्म हत्या और अन्य अपराधों में वृद्धि हो रही है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 से वर्ष 2017 में समाज में हत्याओं का दूसरा सबसे बड़ा कारण प्रेम संबंध और विवाहेत्तर सम्बन्ध है। शारीरिक व पैसे की और क्षणिक आनंद की भूख के कारण स्थापित विवाहेत्तर सम्बन्ध जन्म-जन्मान्तर के संबंध निभाने वाले पति-पत्नी के रिश्ते को तबाह कर देते हैं। विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त महिलाओं का कुछ समय बाद शारीरिक आकर्षण समाप्त हो जाने के पश्चात अपने प्रेमी द्वारा तिरस्कृत कर दिए जाने के पश्चात पति की याद आती है पर तब तक सब कुछ समाप्त हो गया होता है।
समाज में विवाहेत्तर सम्बन्ध हमेशा गुनाह की नजर से देखे जाते हैं क्योंकि क्षणिक सुख के लिए इन संबंधों के कारण समाज की सबसे बड़ी परम्परा विवाह के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है। समाज कितना ही आधुनिक हो जाए पर विवाहेत्तर संबंधों को स्वीकार नहीं करता। बावजूद इसके समाज में इस प्रकार के अनैतिक संबंधों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पहले पारंपरिक रूप में अरेंज्ड शादियों में दूल्हे की शक्ल के अतिरिक्त उसकी योग्यता व्यवहार कुशलता परिवार की पृष्ठभूमि आदि को देख कर शादिया की जाती थी और दोनों पति-पत्नी सारे जीवन एक दूसरे की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहते थे पर अज कल ऐसे पति पत्नियों की संख्या घट रही है, कोई जरा सा आकर्षक शक्ल वाला व्यक्ति मिला कि जीवन पर्यन्त चलने वाले संबंध की तिलांजलि देकर क्षणिक संबंध बना लेती हैं जो उनके पूरे जीवन को दो राहें पर खड़ा कर देता है।
हमने प्रारंभ स्वामी धनेश्वर प्रसाद के साथ हुई घटना जिसमें उनके सगे भतीजे,जिसे वे आई ए एस बनाना चाहते थे, ने उनके साथ विश्वासघात किया और उनके द्वारा दी गई सुख सुविधाओं का फायदा उठाते हुए अपनी सगी चाची को ही लेकर भाग गया। आज काल की स्वार्थी दुनिया में कुछ लोग इतने सीधे और भावुक होते हैं कि अपने भाई भतीजों या अन्य रिश्तेदारों को इस उम्मीद में रख लेते है कि यह मेरे पास रहकर पढ़ लिख कर कुछ बन जायेगा पर जब उन्हें पता चलता हैं कि उसने रिश्ते और मर्यादाओं को ताख पर रख कर उनकी पत्नी या बहन बेटी से शारीरिक रिश्ते बना लिए हैं तो उनके पास ग्लानि पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचता और कई बार ऐसे लोग आत्म हत्या करते हैं या फिर धनेश्वर प्रसाद की तरह घुट घुट कर मर जाते हैं। इसलिए आज की स्वार्थी दुनिया में किसी को भी अपने परिवार के साथ रखने की भूल न करे, चाहे कोई कितना ही सगा हो। क्योंकि आज कल इन्हीं विवाहेत्तर या अवैध संबंधों के कारण बड़े पैमाने पर हत्या और आत्महत्या की घटनाएं हो रही है।
मानव व्यवहार की एक फितरत होती है कि नए को लेकर आकर्षित होना, कुछ लोग बड़ी सरलता से इस आकर्षण की लपेट में आ जाते हैं। कई बार दाम्पत्य जीवन मे आर्थिक तंगी नौकरी में परेशानी, बीमारी आदि से तनाव होने के कारण तनाव आ जाना स्वाभाविक होता है और ऐसे मौके का फायदा आपका शरणार्थी मेहमान उठा लेता है। पर कुछ लोगों को शारीरिक सम्बन्धो में नए अनुभव की लालसा या वक्त के साथ पति-पत्नी के सम्बन्धों में निरसता के चलते दूसरों के प्रति आकर्षित कर देती है। जो बिलकुल ही गलत होता है क्योंकि विवाहेत्तर सम्बन्धो में बहकर लोग जीवन साथी से तलाक ले लेते हैं पर उन्हें बहुत पछतावा होता है जब उन्हें पता चलता है कि यह रिश्ता प्यार नहीं बल्कि शारीरिक भूख मिटाने के लिय था।
अधिकांश मामलों में अपने बच्चो के भविष्य के खातिर पति पत्नी सब कुछ जानते हुए एक साथ रहते हैं पर उनके बीच का संबंध पहले जैसा नहीं रह पाता और जीवन साथी का विश्वासघात व्यक्ति को कई बार डिप्रेशन या मानसिक अवसाद का रोगी बना देता है और अपने जीवन साथी के साथ पहले जैसे सम्बन्ध स्थापित करने में असफल रहता है पर इसका एक ही रास्ता है कि दुख, क्षोभ, अहम घृणा को भुलाकर एक नई शुरुआत करे क्योंकि समय बड़े बड़े जख्मों को भुला देता है पर यह ध्यान रहे आपके आस पास के लोग इन जख्मो को कुरेदते रहते हैं।
कैसी विडम्बना है कि विगत कुछ दशकों से पूरे देश में करवाचौथ का त्योहार एक त्यौहार ही नहीं बल्कि स्टेटस सिम्बल बन गया है और तब से पहले की तुलना में विवाहेत्तर सम्बन्धों के कारण हत्या, आत्महत्या जैसी मामले अप्रत्यासित रूप से बढ़ गए हैं, आए दिन तलाक के मुकदमे भी बढ़ रहे हैं जिसके कारण आज की शिक्षित युवा पीढ़ी शादी जैसे बंधन से भाग रही है पर सामाजिक चिंतको का इस समस्या की ओर ध्यान नहीं जा रहा है। इस समय आवश्यकता इस बात की है कि शादी जैसे पवित्र बंधन की महत्ता को पुनर्स्थापित किया जाए और छोटी छोटी बातों पर तलाक के मामले दायर करने वाले नव विवाहित जोड़ों के विवाद मध्यस्थता के माध्यम से निपटाये जाए।
(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव हैं।)
1990 के दशक में एक खबर बनी थी कि विवाहेत्तर सम्बन्धों के कारण देश ने प्रकाश पादुकोण की टक्कर का एक और प्रतिभावान खिलाड़ी सैय्यद मोदी खो दिया था जो यदि जीवित रहता तो इंग्लैंड ओपन सहित देश के लिए कई मेडल का सकता था पर लखनऊ में स्टेडियम से निकलते समय हत्या कर दी गई थी। 1979-80 में जब मैं भारतीय रेल में नौकरी करता था तो मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी स्वामी धनेश्वर प्रसाद जो बड़े ही नेक इंसान थे अपने गांव से अपने भाई के लड़के को दिल्ली में पढ़ा लिखा कर आईएएस बनाने के लिए लाए, उस लड़के की उम्र 19-20 वर्ष थी, स्वामीजी दिन में ऑफिस में लोगो से भतीजे की प्रतिभा की तारीफ करते रहते और उसके आईएएस बनने के ख्वाब देखते रहते, घर में उनकी 32 वर्षीय पत्नी और उनके भतीजे में प्यार हो गया और सारी सीमाओं को पार कर गया और घर में स्वामी जी की पत्नी द्वारा बेकद्री शुरु हो गई, जो पत्नी दिन रात अपने पति देव का ख्याल रखती थी वह उन्हें बात बात पर झिड़कती थी और उनसे ज्यादा खयाल उनके भतीजे का रखने लगी और कुछ दिन बाद दोनों घर छोड़कर भाग गए और पत्नी ने स्वामी जी पर मुकदमा दर्ज कर दिया, स्वामी जी पत्नी की बेवफाई के चलते 46 वर्ष की आयु में दो बच्चों को छोड़कर दुनिया से चले गए। पर आज कल विवाहेत्तर सम्बन्धों में बाढ-सी आ गई है हर रोज ऐसे संबंधों के कारण पतियों की हत्या से लेकर आत्महत्या की घटनाएं हो रही है। ऐसे में इस बात का विश्लेषण करना आवश्यक हो गया है कि इतनी अधिक संख्या में विवाहेत्तर सम्बन्ध क्यों हो रहे हैं आखिर इनका कारण क्या है?
आज कल विवाहेत्तर संबंधों के कारण आए दिन हत्या आत्म हत्या की घटनाएं बढ़ रही है और पति-पत्नी के बीच तलाक के केस बहुत ज्यादा हो रहे हैं और कुछ युवा तो शादी करने से भी इनकार कर रहे हैं। आज कल विवाहेत्तर सम्बन्ध में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और आधुनिकता के नाम पर बहुत बढ़ोत्तरी हो रही है, जो भारतीय और वैश्विक समाज में पारिवारिक ताने-बाने को खोखला कर रही है। यह केवल दो व्यक्तियों के निजी जीवन का मामला नहीं रह गया है बल्कि यह पूरे समाज बेहत घातक प्रभाव डाल रहा है और इसके निम्न परिणाम दिखाई कर रहे हैं-
विश्वास का अंत - पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की नींव विश्वास और आदर पर टिकी होती है और विवाहेत्तर जैसे नाजायज रिश्ते से यह विश्वास हमेशा के लिए टूट जाता है और फिर भी जुड़ता और ठगा हुआ जीवन साथी बाकी बची हुई जिंदगी ऐसे दुख के साथ जीता है जिसके बारे में किसी से कह नहीं सकता।
बच्चों पर मानसिक दबाव -विवाहेत्तर संबंधों के कारण मां बाप के बीच जो कलह होती है उसका सबसे बुरा असर बच्चों के कोमल मन पर पड़ता है, जिससे वे हीन भावना व असुरक्षा के शिकार हो जाते हैं।
घरेलू हिंसा और अपराध - कई मामलों में सच्चाई सामने आने पर घरेलू हिंसा, मारपीट, हत्या आत्महत्या जैसी जघन्य घटनाएं समाज को कलंकित करती है।
नैतिक मूल्यों का पतन -विवाहेत्तर संबंधों से समाज के नैतिक मूल्यों का पतन होता है।
अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए प्रसिद्ध भारत में विवाह जैसी परंपरा का टूटना बहुत बुरा संकेत है विदेशी जहां हमारी संस्कृति और परंपरा को अपना रहे हैं वहीं हम भारतवासी विदेशी संस्कृति और परंपरा का आँख मूद कर उसकी नकल कर रहे हैं, सामूहिक परिवार से हटकर अब न्यूक्लियर फैमिली की तरफ बढ़ रहे हैं पर विवाहेत्तर संबंधों में आई बाढ़ से अब न्यूक्लियर परिवार भी टूट रहे हैं।
यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि विवाहेत्तर संबंधों के कारण समाज में बड़ा गंभीर खतरा पैदा हो गया है जिन सगे भाई भतीजों नजदीकी रिश्तेदारों के भरोसे व्यक्ति अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी दे करअपनी नौकरी या व्यापार के लिए जाता था पर आज जब उसे पता चलता हैं कि उसकी अर्धांगिनी उसी भरोसे वाले भाई या रिश्तेदार के साथ अनैतिक संबंध बनाए हुए हैं तो उसके दिल पर क्या गुजरता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। मद्रास उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि इस तरह के मामलों से हत्या, आत्म हत्या और अन्य अपराधों में वृद्धि हो रही है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 से वर्ष 2017 में समाज में हत्याओं का दूसरा सबसे बड़ा कारण प्रेम संबंध और विवाहेत्तर सम्बन्ध है। शारीरिक व पैसे की और क्षणिक आनंद की भूख के कारण स्थापित विवाहेत्तर सम्बन्ध जन्म-जन्मान्तर के संबंध निभाने वाले पति-पत्नी के रिश्ते को तबाह कर देते हैं। विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त महिलाओं का कुछ समय बाद शारीरिक आकर्षण समाप्त हो जाने के पश्चात अपने प्रेमी द्वारा तिरस्कृत कर दिए जाने के पश्चात पति की याद आती है पर तब तक सब कुछ समाप्त हो गया होता है।
समाज में विवाहेत्तर सम्बन्ध हमेशा गुनाह की नजर से देखे जाते हैं क्योंकि क्षणिक सुख के लिए इन संबंधों के कारण समाज की सबसे बड़ी परम्परा विवाह के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है। समाज कितना ही आधुनिक हो जाए पर विवाहेत्तर संबंधों को स्वीकार नहीं करता। बावजूद इसके समाज में इस प्रकार के अनैतिक संबंधों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पहले पारंपरिक रूप में अरेंज्ड शादियों में दूल्हे की शक्ल के अतिरिक्त उसकी योग्यता व्यवहार कुशलता परिवार की पृष्ठभूमि आदि को देख कर शादिया की जाती थी और दोनों पति-पत्नी सारे जीवन एक दूसरे की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहते थे पर अज कल ऐसे पति पत्नियों की संख्या घट रही है, कोई जरा सा आकर्षक शक्ल वाला व्यक्ति मिला कि जीवन पर्यन्त चलने वाले संबंध की तिलांजलि देकर क्षणिक संबंध बना लेती हैं जो उनके पूरे जीवन को दो राहें पर खड़ा कर देता है।
हमने प्रारंभ स्वामी धनेश्वर प्रसाद के साथ हुई घटना जिसमें उनके सगे भतीजे,जिसे वे आई ए एस बनाना चाहते थे, ने उनके साथ विश्वासघात किया और उनके द्वारा दी गई सुख सुविधाओं का फायदा उठाते हुए अपनी सगी चाची को ही लेकर भाग गया। आज काल की स्वार्थी दुनिया में कुछ लोग इतने सीधे और भावुक होते हैं कि अपने भाई भतीजों या अन्य रिश्तेदारों को इस उम्मीद में रख लेते है कि यह मेरे पास रहकर पढ़ लिख कर कुछ बन जायेगा पर जब उन्हें पता चलता हैं कि उसने रिश्ते और मर्यादाओं को ताख पर रख कर उनकी पत्नी या बहन बेटी से शारीरिक रिश्ते बना लिए हैं तो उनके पास ग्लानि पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचता और कई बार ऐसे लोग आत्म हत्या करते हैं या फिर धनेश्वर प्रसाद की तरह घुट घुट कर मर जाते हैं। इसलिए आज की स्वार्थी दुनिया में किसी को भी अपने परिवार के साथ रखने की भूल न करे, चाहे कोई कितना ही सगा हो। क्योंकि आज कल इन्हीं विवाहेत्तर या अवैध संबंधों के कारण बड़े पैमाने पर हत्या और आत्महत्या की घटनाएं हो रही है।
मानव व्यवहार की एक फितरत होती है कि नए को लेकर आकर्षित होना, कुछ लोग बड़ी सरलता से इस आकर्षण की लपेट में आ जाते हैं। कई बार दाम्पत्य जीवन मे आर्थिक तंगी नौकरी में परेशानी, बीमारी आदि से तनाव होने के कारण तनाव आ जाना स्वाभाविक होता है और ऐसे मौके का फायदा आपका शरणार्थी मेहमान उठा लेता है। पर कुछ लोगों को शारीरिक सम्बन्धो में नए अनुभव की लालसा या वक्त के साथ पति-पत्नी के सम्बन्धों में निरसता के चलते दूसरों के प्रति आकर्षित कर देती है। जो बिलकुल ही गलत होता है क्योंकि विवाहेत्तर सम्बन्धो में बहकर लोग जीवन साथी से तलाक ले लेते हैं पर उन्हें बहुत पछतावा होता है जब उन्हें पता चलता है कि यह रिश्ता प्यार नहीं बल्कि शारीरिक भूख मिटाने के लिय था।
अधिकांश मामलों में अपने बच्चो के भविष्य के खातिर पति पत्नी सब कुछ जानते हुए एक साथ रहते हैं पर उनके बीच का संबंध पहले जैसा नहीं रह पाता और जीवन साथी का विश्वासघात व्यक्ति को कई बार डिप्रेशन या मानसिक अवसाद का रोगी बना देता है और अपने जीवन साथी के साथ पहले जैसे सम्बन्ध स्थापित करने में असफल रहता है पर इसका एक ही रास्ता है कि दुख, क्षोभ, अहम घृणा को भुलाकर एक नई शुरुआत करे क्योंकि समय बड़े बड़े जख्मों को भुला देता है पर यह ध्यान रहे आपके आस पास के लोग इन जख्मो को कुरेदते रहते हैं।
कैसी विडम्बना है कि विगत कुछ दशकों से पूरे देश में करवाचौथ का त्योहार एक त्यौहार ही नहीं बल्कि स्टेटस सिम्बल बन गया है और तब से पहले की तुलना में विवाहेत्तर सम्बन्धों के कारण हत्या, आत्महत्या जैसी मामले अप्रत्यासित रूप से बढ़ गए हैं, आए दिन तलाक के मुकदमे भी बढ़ रहे हैं जिसके कारण आज की शिक्षित युवा पीढ़ी शादी जैसे बंधन से भाग रही है पर सामाजिक चिंतको का इस समस्या की ओर ध्यान नहीं जा रहा है। इस समय आवश्यकता इस बात की है कि शादी जैसे पवित्र बंधन की महत्ता को पुनर्स्थापित किया जाए और छोटी छोटी बातों पर तलाक के मामले दायर करने वाले नव विवाहित जोड़ों के विवाद मध्यस्थता के माध्यम से निपटाये जाए।
(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव हैं।)