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भविष्य की रूपरेखा

प्रकाशित: 16-08-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
भविष्य की रूपरेखा
शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 13वें संबोधन के 77 मिनट में देश के विकास का लेखा-जोखा ही नहीं प्रस्तुत किया बल्कि उन्होंने कई योजनाओं की घोषणा भी की है। सबसे सुखद क्षण तब आया जब संपूर्ण वन्दे मातरम का गायन पहली बार संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री ने आशा के अनुरूप ही युवाओं, महिलाओं और विज्ञान के बारे में एलान किया। एक करोड़ युवाओं को मुफ्त आटीफिसियल इंटेलीजेंस की टेनिंग या आनलाइन मुफ्त कोचिंग, ये सभी मध्यम वगीय परिवारों पर फोकस करने का प्रयास है। प्रधानमंत्री ने 5 से 15 वर्ष के आयु के बच्चों को खेल में प्रवीणता लाने के लिए टैलेंट हंट योजना का एलान करके प्रयास किया है कि देश में खेल का अच्छा माहौल बने और युवा खिलाड़ी प्रगति के लिए अवसर का लाभ उठाएं।
प्रधानमंत्री ने लालकिले के प्राचीर से शक्ति की सप्तधारा का आ"ान किया। इस सप्तधारा की पहली शक्ति है उत्पादन। दूसरी शक्ति है कृषि और फूड प्रोडक्शन, तीसरी शक्ति तकनीक एवं इनोवेशन, चौथी है गति शक्ति, पांचवी है रक्षा शक्ति, छठी है ग्रीन एवं ब्ल्यू, इकोनामी तथा सातवीं शक्ति है साफ्ट पावर।
प्रधानमंत्री ने सेमी कण्डक्टर संयंत्र स्थापित करने की घोषणा करके आत्मनिर्भर की तरफ तेजी से बढ़ने का प्रामाणिक विश्वास दिलाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने तीन सेमी कण्डक्टर संयंत्रों में पहले ही उत्पादन शुरू कर दिया है और आने वाले दिनों में पांच से आठ संयंत्र केन्द्र और स्थापित किए जाने की उम्मीद है।दरअसल भारत एक संप्रभुता संपन्न राष्ट्र है और राष्ट्र तभी प्रगति कर सकता है जब नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप सत्ताधारी सोचें और कार्य करें। आकांक्षाएं तो सभी नागरिकों की अलग-अलग होती हैं। विकास के प्रति सकारात्मक चिंतन रखने वालों के साथ अपराधी प्रवृत्ति के नकारात्मक प्रवृत्ति के लोग भी होते हैं। उनकी भी आकांक्षाएं होती हैं। अब अपराध, घपले, घोटाले वालों की आकांक्षाओं का कोई सरकार भला कैसे संतुष्ट कर सकती है।
लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी की यह घोषणा सुखद लगी कि देश के नक्सल पीड़ित क्षेत्र हिंसा से मुक्त हो चुके हैं किन्तु जब उन्होंने यह कहा कि दिमागी नक्सली अभी भी हमारे समाज में सक्रिय हैं, तब उन्होंने देशवासियों को एक चुनौती भी दे दी। दिमागी नक्सली का मतलब बारूदी विचारों वाले अति वामपंथी ही नहीं होते बल्कि वे भी होते हैं जो जनमानस को भ्रमित करने के लिए भारत विरोधी एनजीओ के झूठे आंकड़े पेश कर युवकों के मस्तिष्क में भय, भ्रम और निराशा का भाव भरते हैं।
बहरहाल संप्रभुता संपन्न राष्ट्र में सहमति और असहमति भाव के सम्मिश्रण से ही लोकतंत्र का निर्माण हुआ और आज हम उन ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं जहां कि हमें हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति ही नहीं तेज गति से आगे बढ़ने का अवसर भी आसान लगने लगा है। अकर्मण्यता और निरर्थकता से ग्रसित चिंतन को पीछे छोड़कर भारत आगे बढ़ रहा है तभी हमारे राष्ट्र को देखने का नजरिया भी दुनिया ने बदल लिया है। एक अरब चालीस करोड़ की जनसंख्या में युवा ही सर्वाधिक संख्या में हैं। युवकों को आशावादी और ऊर्जावान बनाने की जरूरत है। जरूरत इस बात की भी है कि युवाओं को ऐसे चिंतन से सतर्क रहने के लिए सावधान किया जाए जो भारतीय नेशन का पाकिस्तान जैसे ‘क्रिएशन' से तुलना करते हैं। लब्बोलुआब यह है कि शनिवार का प्रधानमंत्री का संबोधन भविष्य की रूपरेखा है।