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भारत के कृषि, खाद्य क्षेत्र को जलवायु बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने की जरूरत : क्लाइमेट ग्रुप

प्रकाशित: 28-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
सिंगापुर, (भाषा)। भारत के कृषि क्षेत्र और खाद्य उद्योग को जलवायु में हो रहे बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने की जरूरत है। एक जलवायु संग"न ने यह बात कही है।
सिंगापुर में आयोजित क्लाइमेट ग्रुप एशिया एक्शन समिट एंड फिलन्थ्रॉपी एशिया समिट के मौके पर क्लाइमेट ग्रुप की भारत में कार्यकारी निदेशक दिव्या शर्मा ने कहा कि भारत के कृषि क्षेत्र और खाद्य उद्योग को बढ़ते जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने के लिए तेजी से अनुकूलन उपाय अपनाने होंगे। शर्मा ने कहा कि देश में अत्यधिक गर्मी, अनिश्चित मानसून तथा भूजल संकट खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और खाद्य क्षेत्रों में मजबूती लाने के लिए किसानों, उद्योगों, व्यापारिक संग"नों और सरकार सभी की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि क्लाइमेट ग्रुप के सहयोग से एक उद्योग-आधारित ग"बंधन तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पौष्टिक, कम उत्सर्जन वाले तथा टिकाऊ खाद्य उत्पादों की मांग और आपूर्ति को बढ़ावा देना है। जलवायु जोखिम सूचकांक (सीआरआई) के अनुसार, भारत जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित देशों में नौवें स्थान पर है। इसके बावजूद भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा और परिवहन के विद्युतीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
देश ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
शर्मा ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक माहौल में भारत की अर्थव्यवस्था को कॉर्बन उत्सर्जन से मुक्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भरोसा जताया कि वर्तमान प्रगति को देखते हुए भारत 2070 से पहले भी शुद्ध शून्य कॉर्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकता है।