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भारत की विकास यात्रा पर चीन की नजर: क्वाड और कश्मीर पर पुरानी नीति

प्रकाशित: 28-05-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
भारत की विकास यात्रा पर चीन की नजर: क्वाड और कश्मीर पर पुरानी नीति
आदित्य नरेन्द्र
26 मई 2026 को नई दिल्ली में क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। इस बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
चीन ने ऐतिहासिक रूप से क्वाड को एशियन नाटो करार देते हुए इसका विरोध किया है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बताया है। चीन का मानना रहा है कि क्वाड उसकी आर्थिक और सैन्य प्रभाव को रोकने का प्रयास है। दिल्ली में हुई इस बैठक के संदर्भ में भी चीन की पुरानी आपत्ति सामने आ रही है, जो भारत की बढ़ती भूमिका और क्षेत्रीय साझेदारियों से उसकी असहजता को दर्शाती है।
इसी ाढम में, चीन और पाकिस्तान के हालिया संयुक्त बयानों में जम्मू-कश्मीर को इतिहास की बची हुई समस्या बताया गया है और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (ळऱएण्) के प्रस्तावों, ळऱ चार्टर तथा द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार सुलझाने की बात कही गई है। पाकिस्तान की ओर से कश्मीर की स्थिति पर ब्रिफिंग के बाद चीन ने इस मुद्दे पर अपना रुख दोहराया है।
भारत ने ऐसे बयानों को अनावश्यक संदर्भ करार दिया है और स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत का इस मुद्दे पर रुख सुसंगत और स्पष्ट है।
भारत तेजी से विकसित हो रहा है। क्वाड जैसी साझेदारियां इंडो-पैसिफिक में शांति, समृद्धि और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास हैं। चीन की इन बैठकों और क्षेत्रीय मुद्दों पर लगातार आपत्ति उसकी उस मानसिकता को उजागर करती है जो भारत की प्रगति और स्वतंत्र विदेश नीति को स्वीकार करने में कठिनाई महसूस करती है।
भारत अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और विकास के एजेंडे पर दृढ़ है। क्वाड बैठक इस संकल्प को और मजबूत करती है कि लोकतांत्रिक देश मिलकर खुले, स्वतंत्र और समृद्ध इंडो-पैसिफिक का निर्माण करेंगे। कुछ चीजें वाकई नहीं बदलतीं लेकिन भारत की विकास गाथा रुकने वाला नहीं है।