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मानसून के दौरान जलभराव रोकने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक : निगम आयुक्त

प्रकाशित: 16-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। एमसीडी आयुक्त श्री संजीव खिरवार ने आज ‘ऑपरेशन मिशन' के अंतर्गत आगामी मानसून सीजन से पूर्व दिल्ली में जलभराव एवं नालों की सिल्ट सफाई (डी-सिल्टिंग) से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने हेतु एक महत्वपूर्ण अंतर-विभागीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी), दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईडीसी), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डुसिब) तथा अन्य संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य जलभराव एवं नालों की सिल्ट सफाई कार्य से जुड़े अंतर-विभागीय मुद्दों की पहचान कर उनका समाधान सुनिश्चित करना था, ताकि मानसून से पहले प्रभावी व्यवस्थाएँ की जा सकें। बैठक को संबोधित करते हुए आयुक्त श्री संजीव खिरवार ने कहा कि दिल्ली में चार फीट एवं उससे अधिक चौड़ाई वाले कुल 3,014 नाले हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 3,737 किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि इनमें से 793 नाले नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। आयुक्त ने आगे कहा कि एमसीडी ने मानसून से पूर्व अपने अधिकार क्षेत्र के नालों की लगभग 65 प्रतिशत सिल्ट सफाई का कार्य पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) चार फीट एवं उससे अधिक चौड़ाई वाले 1,375 नालों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार है, जो दिल्ली के कुल बड़े नालों का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि एमसीडी ने ऐसे 215 बिंदुओं की पहचान की है, जहाँ जलभराव एवं सिल्ट सफाई से संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता है। इन समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए चिन्हित नालों का संयुक्त निरीक्षण 19 मई 2026 से पहले होना निर्धारित किया गया है तथा निरीक्षण रिपोर्ट 21 मई 2026 तक उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत की जाएगी।
आयुक्त ने जोर देते हुए कहा कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को रोकने के लिए सभी विभागों एवं एजेंसियों को आपसी समन्वय और बेहतर समझ के साथ कार्य करना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि जलभराव की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए फील्ड स्तर पर समन्वय अनिवार्य है। नालों के मिलन स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए तथा भारी वर्षा के दौरान जलभराव रोकने के लिए इन क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।
श्री संजीव खिरवार ने यह भी कहा कि सभी एजेंसियों को पूर्व अनुभवों से सीख लेते हुए संवेदनशील एवं समस्या-ग्रस्त क्षेत्रों की पहले से पहचान कर योजनाबद्ध एवं व्यवस्थित तरीके से कार्य करना चाहिए।
तैयारियों पर विश्वास व्यक्त करते हुए आयुक्त ने कहा कि उच्च मनोबल, उचित योजना और सभी एजेंसियों के बेहतर समन्वय के माध्यम से दिल्ली आगामी मानसून के दौरान बड़े जलभराव की समस्याओं से बचने में सक्षम होगी।