रथ यात्रा भारत की सनातन सभ्यतागत विरासत, आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है : विजेन्द्र गुप्ता
प्रकाशित: 17-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत की सनातन सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक है, जो आस्था, समावेशिता, सेवा और सामूहिक सद्भाव जैसे शाश्वत मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसी गौरवशाली परंपराओं के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक सुदृढ़ होती है। यह विचार दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने आज रोहिणी सेक्टर-11 स्थित जगन्नाथ मंदिर में ओड़िया समाज द्वारा आयोजित ‘गुंडिचा एवं बहुदा रथ यात्रा-2026' में सहभागिता करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा से सभी के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, जिसे सामान्यत ‘रथों का महापर्व' भी कहा जाता है, अपनी विशिष्ट पहचान उस भव्य शोभायात्रा से प्राप्त करती है जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन विशाल लकड़ी के रथों पर विराजमान होकर अपनी पवित्र यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारंभ होकर नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व भारत के सबसे प्राचीन एवं विशाल धार्मिक उत्सवों में से एक है। श्री गुप्ता ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समानता, करुणा और जनभागीदारी जैसे उन मूल्यों का सशक्त प्रतीक है जिन्होंने सदियों से भारत की सभ्यतागत यात्रा को दिशा प्रदान की है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि रथ यात्रा जैसे पर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को पुन स्थापित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के लोगों के बीच एकता एवं भाईचारे के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से जुड़ी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ओड़िया समाज के प्रयासों की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें नई पीढ़ी को भारत की सभ्यतागत विरासत तथा साझा सांस्कृतिक मूल्यों से निरंतर जोड़ने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
नई दिल्ली। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत की सनातन सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक है, जो आस्था, समावेशिता, सेवा और सामूहिक सद्भाव जैसे शाश्वत मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसी गौरवशाली परंपराओं के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक सुदृढ़ होती है। यह विचार दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने आज रोहिणी सेक्टर-11 स्थित जगन्नाथ मंदिर में ओड़िया समाज द्वारा आयोजित ‘गुंडिचा एवं बहुदा रथ यात्रा-2026' में सहभागिता करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा से सभी के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, जिसे सामान्यत ‘रथों का महापर्व' भी कहा जाता है, अपनी विशिष्ट पहचान उस भव्य शोभायात्रा से प्राप्त करती है जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन विशाल लकड़ी के रथों पर विराजमान होकर अपनी पवित्र यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारंभ होकर नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व भारत के सबसे प्राचीन एवं विशाल धार्मिक उत्सवों में से एक है। श्री गुप्ता ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समानता, करुणा और जनभागीदारी जैसे उन मूल्यों का सशक्त प्रतीक है जिन्होंने सदियों से भारत की सभ्यतागत यात्रा को दिशा प्रदान की है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि रथ यात्रा जैसे पर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को पुन स्थापित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के लोगों के बीच एकता एवं भाईचारे के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से जुड़ी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ओड़िया समाज के प्रयासों की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें नई पीढ़ी को भारत की सभ्यतागत विरासत तथा साझा सांस्कृतिक मूल्यों से निरंतर जोड़ने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।