हथकरघा विरासत को नया मंच: डॉ. एम. बीना ने किया 'सूत संगम' स्पेशल हैंडलूम एक्सपो का शुभारंभ
प्रकाशित: 26-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली: विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की आयुक्त डॉ. एम. बीना ने जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में आयोजित आठ दिवसीय विशेष हैंडलूम एक्सपो "सूत संगम" का उद्घाटन किया। 24 जून से 01 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों के बुनकर और कारीगर अपनी उत्कृष्ट हथकरघा परंपराओं एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नेशनल डिज़ाइन सेंटर एवं इंडिया हैंडलूम के सहयोग से आयोजित इस विशेष एक्सपो का उद्देश्य भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देना, बुनकरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना तथा उपभोक्ताओं को प्रामाणिक हैंडलूम उत्पादों से जोड़ना है।
इस अवसर पर डॉ. एम. बीना ने कहा कि, "सूत संगम केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की विविध हथकरघा परंपराओं, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने का प्रयास है। यह आयोजन बुनकरों को सीधे ग्राहकों से जोड़कर उन्हें बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।"
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देशभर के बुनकरों और कारीगरों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सरकार भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने, बुनकरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा पारंपरिक शिल्प को नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
यह आठ दिवसीय एक्सपो प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक आम जनता के लिए खुला है। देशभर से आए 70 से अधिक बुनकर, स्वयं सहायता समूह एवं सहकारी संस्थाएँ इसमें भाग ले रही हैं। आगंतुकों को विभिन्न राज्यों के पारंपरिक हथकरघा उत्पादों, आकर्षक डिज़ाइनों और हस्तनिर्मित वस्त्रों की विविधता को एक ही छत के नीचे देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है।
प्रदर्शनी में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, Punjab, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के प्रामाणिक हैंडलूम सिल्क एवं कॉटन साड़ियाँ, सूट-दुपट्टा सेट, शॉल, स्टोल, बेडशीट्स, होम फर्निशिंग्स, कुर्ते, धोती, दरियाँ तथा अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
"सूत संगम" केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की विविध हथकरघा परंपराओं, रंगों और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। यह मंच कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करते हुए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और 'माय हैंडलूम, माय प्राइड' की भावना को सशक्त बनाने का प्रयास है।
विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय की यह पहल भारतीय हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने, बुनकरों की आजीविका को सशक्त बनाने तथा देश की समृद्ध वस्त्र विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदर्शनी 01 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।
विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नेशनल डिज़ाइन सेंटर एवं इंडिया हैंडलूम के सहयोग से आयोजित इस विशेष एक्सपो का उद्देश्य भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देना, बुनकरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना तथा उपभोक्ताओं को प्रामाणिक हैंडलूम उत्पादों से जोड़ना है।
इस अवसर पर डॉ. एम. बीना ने कहा कि, "सूत संगम केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की विविध हथकरघा परंपराओं, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने का प्रयास है। यह आयोजन बुनकरों को सीधे ग्राहकों से जोड़कर उन्हें बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।"
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देशभर के बुनकरों और कारीगरों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सरकार भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने, बुनकरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा पारंपरिक शिल्प को नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
यह आठ दिवसीय एक्सपो प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक आम जनता के लिए खुला है। देशभर से आए 70 से अधिक बुनकर, स्वयं सहायता समूह एवं सहकारी संस्थाएँ इसमें भाग ले रही हैं। आगंतुकों को विभिन्न राज्यों के पारंपरिक हथकरघा उत्पादों, आकर्षक डिज़ाइनों और हस्तनिर्मित वस्त्रों की विविधता को एक ही छत के नीचे देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है।
प्रदर्शनी में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, Punjab, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के प्रामाणिक हैंडलूम सिल्क एवं कॉटन साड़ियाँ, सूट-दुपट्टा सेट, शॉल, स्टोल, बेडशीट्स, होम फर्निशिंग्स, कुर्ते, धोती, दरियाँ तथा अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
"सूत संगम" केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की विविध हथकरघा परंपराओं, रंगों और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। यह मंच कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करते हुए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और 'माय हैंडलूम, माय प्राइड' की भावना को सशक्त बनाने का प्रयास है।
विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय की यह पहल भारतीय हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने, बुनकरों की आजीविका को सशक्त बनाने तथा देश की समृद्ध वस्त्र विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदर्शनी 01 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।