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वार्ता को दिया मीनाब 168 नाम

प्रकाशित: 25-06-2026 | लेखक: अनिल नरेंद्र
वार्ता को दिया मीनाब 168 नाम
स्विट्जरलैंड में रविवार को अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को मीनाब 168 नाम दिया गया। मानना पड़ेगा कि नैरेटिव सेट करने में ईरानियों का जवाब नहीं है। वह कैसे अपने शहीदों को न तो भूलते हैं और न ही दुनिया को भूलने देते हैं। ईरान चाहता है कि पूरी दुनिया ईरान पर अमेरिका और इजरायल के अत्याचारों की दास्तां देखें और सुनें। ईरानी प्रेस टीवी के अनुसार ये नाम मीनाब स्कूल पर अमेरिकी-इजरायली टॉमहॉक मिसाइल हमले में मारी गई 168 स्कूल बच्चियों के सम्मान में दिया गया। इस स्कूल (मीनाब) पर 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ही हमला हुआ था। दरअसल, ईरान पिछले तीन महीने से एक कैंपेन मीनाब 168 चला रहा है और इसे खूब प्रसारित कर रहा है। हर मंच पर ईरान उस कैंपेन के साथ नजर आता है। स्विट्जरलैंड और यहां तक की फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल में भी यह नजर आया। आइए इसके पीछे की कहानी भी जानते हैं... स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ समझौता वार्ता से पहले ईरान ने फैसला लेकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। दरअसल, ईरान और स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ शांति समझौता वार्ता को मीनाब 168 नाम दिया है। अमेरिका से वार्ता के लिए ईरान का प्रतिनिधिमंडल उसी जहाज में पहुंचा जिस पर मीनाब 168 लिखा था। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बेल्जियम के खिलाफ मैच खेलने के लिए मैदान में उतरे ईरान के फुटबाल खिलाड़ियों की जसी पर मीनाब 168 लिखा था। हमले में मारी गई बच्चियों के सम्मान में ईरान दुनिया को उनकी शहादत को भूलने नहीं दे रहा है। पिछले तीन महीने से ईरान पूरी दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि लड़ाई के पहले दिन ही किस तरह अमेरिका-इजरायल ने मानवता की सारी हदें पार करते हुए निर्देष मीनाब स्कूल की बच्चियों को मार डाला। हमले में मारी गई 168 स्कूली बच्चियों के सम्मान में और उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए मीनाब 168 अभियान चलाया जा रहा है। आईआरजीसी के कथित ठिकाने पर हमले की आड़ में मिसाइल एक बच्चों के स्कूल पर जा गिरी। अमेरिका इससे इंकार करता रहा। पहले तो उसने कहना शुरू कर दिया कि यह मिसाइल खुद ईरान ने गलती से मार दी पर फिर अमेरिकी मीडिया ने इसका पर्दाफाश करते हुए साबित किया कि यह मिसाइल अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल थी जो बहरीन के एयरबेस से मारी गई थी। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन के इस अमेरिकी बेस को निशाना बनाया और तबाह किया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले राउंड में इस्लामाबाद पहुंचा था तो जिस विमान में वे आए थे उसकी कुर्सियों पर शहीद हुई बच्चियों के स्कूल बैग, किताबें, खाने के टिफिन इत्यादि रखे हुए थे ताकि सारी दुनिया इस हुए जुल्म को देख सके। ईरान चाहता है कि पूरी दुनिया ईरान पर अमेरिका और इजरायल के अत्याचारों की दास्तां सुने और देखें कि यह दोनों देश अपने फायदे के लिए किस हद तक जा सकते हैं। इसलिए फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिकी शहर लॉसएंजिल्स में ईरान और बेल्जियम के बीच हुए मैच के दौरान कई ईरानी प्रशंसकों ने मीनाब हमले में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि देने वाली तस्वीरें और जसी लहराई। ईरान के खिलाड़ी भी मीनाब 168 स्टिकर वाली जसी पहने दिखे। एक समर्थक ने एक स्टिकर दिखाया जिस पर एक स्कूल बैग बना था और उस पर 168 लिखा था। हैशटेग एंजल ऑफ मीनाब भी था और संदेश था कि इजरायल और अमेरिका के हमले में मारे गए मीनाब स्कूल के 168 बच्चों को याद रखें। बता दें कि भारत में अप्रैल में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में भी ईरान मीनाब 168 लिखे विमान में भारत आया था। अमेरिका से शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की यात्रा से पहले ईरानी संसद के स्पीकर बगेर गालिबफ ने ईरान के मिजाज का संकेत देते हुए समय पर तस्वीरें शेयर की जिसमें मीनाब हमले में मारी गई स्कूली बच्चियों की फोटो हवाई जहाज की सीटों पर चिपकी हुई थीं और वे उनके सामने खड़े होकर यानी कह रहे हों, इस फ्लाइट में मेरे सहयात्री।
-अनिल नरेन्द्र