शिवसेना-उबा"ा के सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिले
प्रकाशित: 25-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। शिवसेना (उबा"ा) के दो सांसदों ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उनसे आग्रह किया कि वह पार्टी के छह बागी सांसदों द्वारा उन्हें सौंपी गई मांगों को साझा करें।
यह मुलाकात पार्टी के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में शामिल होने के दो दिन बाद हुई है। बिरला से मिलने के बाद, शिवसेना (उबा"ा) के सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संविधान के प्रावधानों का पालन करने का आग्रह किया और बागी गुट की ओर से सौंपी गई मांगों की एक प्रति मांगी। सावंत ने कहा, हमने उनसे (बिरला) पूछा कि क्या उन्हें बागी गुट से कोई अपील मिली है। लोकसभा अध्यक्ष ने हमे बताया है कि (पार्टी के) बागी सांसदों की तरफ से उन्हें लिखित में कुछ भी नहीं मिला है। देसाई ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के सामने इस बात पर जोर दिया कि दसवीं अनुसूची में स्पष्ट है, विधायी दल का कोई भी गुट अपनी मर्जी से किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता, भले ही उनके पास दो-तिहाई बहुमत हो। देसाई ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष अपने कार्यालय से जानकारी लेने के बाद उन्हें बताएंगे कि क्या बागी सांसदों ने लिखित में कुछ सौंपा है।उद्धव "ाकरे नीत शिवसेना (उबा"ा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं।सावंत, देसाई और राजाभाऊ वाजे अब भी शिवसेना (उबा"ा) के साथ बने हुए हैं। पार्टी छोड़ चुके सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।
फरवरी 2023 में निर्वाचन आयोग ने शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। शिंदे ही 2022 में अविभाजित शिवसेना में हुए विभाजन के मुख्य सूत्रधार थे, जिसके कारण महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार गिर गई थी।
नई दिल्ली। शिवसेना (उबा"ा) के दो सांसदों ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उनसे आग्रह किया कि वह पार्टी के छह बागी सांसदों द्वारा उन्हें सौंपी गई मांगों को साझा करें।
यह मुलाकात पार्टी के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में शामिल होने के दो दिन बाद हुई है। बिरला से मिलने के बाद, शिवसेना (उबा"ा) के सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संविधान के प्रावधानों का पालन करने का आग्रह किया और बागी गुट की ओर से सौंपी गई मांगों की एक प्रति मांगी। सावंत ने कहा, हमने उनसे (बिरला) पूछा कि क्या उन्हें बागी गुट से कोई अपील मिली है। लोकसभा अध्यक्ष ने हमे बताया है कि (पार्टी के) बागी सांसदों की तरफ से उन्हें लिखित में कुछ भी नहीं मिला है। देसाई ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के सामने इस बात पर जोर दिया कि दसवीं अनुसूची में स्पष्ट है, विधायी दल का कोई भी गुट अपनी मर्जी से किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता, भले ही उनके पास दो-तिहाई बहुमत हो। देसाई ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष अपने कार्यालय से जानकारी लेने के बाद उन्हें बताएंगे कि क्या बागी सांसदों ने लिखित में कुछ सौंपा है।उद्धव "ाकरे नीत शिवसेना (उबा"ा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं।सावंत, देसाई और राजाभाऊ वाजे अब भी शिवसेना (उबा"ा) के साथ बने हुए हैं। पार्टी छोड़ चुके सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।
फरवरी 2023 में निर्वाचन आयोग ने शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। शिंदे ही 2022 में अविभाजित शिवसेना में हुए विभाजन के मुख्य सूत्रधार थे, जिसके कारण महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार गिर गई थी।