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मधुमेह, उच्च रक्तचाप एवं मोटापा दिल्ली में बढ़ती बीमारियां

प्रकाशित: 12-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
देश की राजधानी दिल्ली में उच्च रक्तचाप से 28ज्ञ् महिलाएं और करीब 22ज्ञ् पुरुष पीड़ित है इसी तरह मधुमेह की बीमारी से भी करीब 20ज्ञ् दिल्ली वाले पीड़ित हैं अकेले दिल्ली में ही मोटापे की संख्या बहुत बड़ी हो बन चुकी है। इन 3 बड़ी बीमारियों का मुख्य कारण तेजी से बदलती जीवनशैली, शहरी करण, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण गैर-संचारी रोगों की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा आज केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं रह गई हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी बड़ा प्रभाव डालने वाले कारक बन चुके हैं। देश की राजधानी में गुणवत्ता वाले हॉस्पिटल है और इलाज की बेहतर सुविधा है इसके अलावा तिरुपति आयुर्वैदिक उपचार केंद्र भी बड़ी संख्या में है लेकिन स्थिति आज भी विकट बनी हुई है। यदि दिल्ली के हिसाब से सोचा जाए तो देश भर में मधुमेह उच्च स्टाफ और मोटापे की समस्या बहुत बड़े पैमाने पर है। मधुमेह महासंघ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 10 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, जबकि 13 से 14 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक श्रेणी में हैं। देश की कुल वयस्क आबादी को देखें तो लगभग 11ज्ञ् वयस्क मधुमेह से प्रभावित हैं। यदि मधुमेह और प्री-डायबिटीज दोनों को मिलाकर देखा जाए तो लगभग हर पांचवां भारतीय किसी न किसी रूप में रक्त शर्करा असंतुलन की समस्या से जूझ रहा है। यही कारण है कि भारत को लंबे समय से ‘डायबिटीज कैपिटल' कहे जाने की चर्चा होती रही है। उच्च रक्तचाप की स्थिति भी चिंताजनक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और विभिन्न स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार भारत में लगभग 22-30ज्ञ् वयस्क किसी न किसी स्तर पर उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। अनुमान है कि देश में 20 करोड़ से अधिक लोग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इनमें से बड़ी संख्या को अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं होती और कई मरीज नियमित उपचार नहीं लेते। उच्च रक्तचाप हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। मोटापा भी तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 24ज्ञ् से अधिक महिलाएं और लगभग 23ज्ञ् पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आते हैं। महानगरों और शहरी क्षेत्रों में यह प्रतिशत और भी अधिक है। बच्चों और किशोरों में भी मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो भविष्य में मधुमेह और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।