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संक्रमण को मौसमी बीमारी मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं

प्रकाशित: 23-08-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी चिंता का विषय है। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पिछले 24 घंटे में स्वाइन फ्लू के 114 नए मामलों की पुष्टि हुई है और संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 1,777 तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 229 मामले दर्ज हुए थे, यानी इस वर्ष पांमण के मामले लगभग सात से आठ गुना अधिक बताए जा रहे हैं। एक 62 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मृत्यु की सूचना भी सामने आई है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि संक्रमण को केवल मौसमी बीमारी मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला श्वसन पांमण है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या नजदीकी संपर्क में आने से इसके फैलने की संभावना रहती है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं तथा पहले से सांस, हृदय, मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग इसके गंभीर प्रभाव की अधिक जोखिम वाली श्रेणी में हो सकते हैं। इसलिए मामलों में अचानक वृद्धि को स्वास्थ्य विभाग के लिए शुरुआती चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए। सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि वह अस्पतालों में निगरानी और जांच की व्यवस्था को मजबूत करे। दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पतालों से रोजाना संक्रमण के आंकड़े एकत्र कर उनका विश्लेषण किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि संक्रमण किन इलाकों और आयु वर्गों में तेजी से फैल रहा है। संदिग्ध मरीजों की जांच, गंभीर मरीजों की समय पर पहचान और आवश्यक उपचार की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहनी चाहिए। अस्पतालों में ऑक्सीजन, आवश्यक दवाओं, प्रशिक्षित कर्मचारियों और संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था की नियमित समीक्षा भी जरूरी है। सरकार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, मोहल्ला क्लीनिकों और सरकारी अस्पतालों के माध्यम से लोगों को यह जानकारी देनी चाहिए कि स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण क्या हैं और किस स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में दर्द, शरीर में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर लंबे समय तक घर पर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है। खासकर बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारी वाले लोगों में सांस लेने में कठिनाई या हालत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है। टीकाकरण को लेकर भी सरकार को वैज्ञानिक एवं स्पष्ट जन-जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। इन्फ्लुएंजा वैक्सीन हर व्यक्ति के लिए हर परिस्थिति में अनिवार्य नहीं है, लेकिन उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार मौसमी फ्लू टीकाकरण महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय हो सकता है। लोगों को यह भी समझाना जरूरी है कि वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमण पूरी तरह असंभव नहीं होता, लेकिन गंभीर बीमारी और जटिलताओं का जोखिम कम करने में इसका महत्व हो सकता है। स्कूलों, कार्यालयों, बाजारों, सार्वजनिक परिवहन और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संक्रमण से बचाव के उपायों को गंभीरता से लागू करना चाहिए। जिन लोगों में फ्लू जैसे लक्षण हों, उन्हें बीमारी की अवस्था में भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए। स्कूलों और कार्यालयों में बीमार व्यक्ति को जबरन उपस्थित होने के बजाय पर्याप्त आराम और चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में मदद मिल सकती है।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।