वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

साइलेंट हेल्थ क्राइसिस बन चुकी है नींद की कमी

प्रकाशित: 24-08-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
भारत में नींद की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। एक ऑनलाइन वैश्विक सर्वे की माने तो देश पर्याप्त नींद नहीं लेने के कारण स्वास्थ्य सम्बन्धी विकारों से जूझ रहा है। देश के लगभग 60 प्रतिशत लोग छह घंटे की नींद नहीं लेने के कारण विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे है। इनमें बड़ी संख्या में युवा भी शामिल है। सर्वे में भारत के 348 जिलों के 43 हज़ार लोगों को शामिल किया गया जिनमें 61 प्रतिशत पुरुष और 39 प्रतिशत महिलाएं थी। नींद की कमी धीरे-धीरे एक साइलेंट हेल्थ ाढाइसिस बन चुकी है। पहले नींद को आराम या आदत माना जाता था, लेकिन अब शोध यह दिखाते हैं कि कम नींद का सीधा असर दिमाग, दिल, इम्यून सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की उभरती हुई समस्या बताया है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार लगभग हर तीन में से एक वयस्क रोजाना पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहा। भारत में किए गए एक बड़े सर्वे में पाया गया कि युवा वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक बढ़ी है, जहां रात देर तक फोन का इस्तेमाल, ओवरवर्क, तनाव और अनियमित दिनचर्या नींद का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुके हैं। आजकल की खराब लाइफ स्टाइल, वर्क फ्रॉम होम, पीन से चिपटे रहने और काम के बढ़ते दबाव के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल चुकी है। बदलते वर्किंग स्टाइल के कारण लोगों के पास पर्याप्त नींद लेने का समय भी नहीं बचता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च बताती है कि जो लोग 5 घंटे से कम सोते हैं, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 30-40 फीसदी बढ़ जाता है। नींद की कमी शरीर में सूजन बढ़ा देती है, जिससे ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल गड़बड़ा सकते हैं। कई डॉक्टर बताते हैं कि नींद की कमी मोटापे को भी बढ़ाती है, क्योंकि देर से सोने पर भूख बढ़ाने वाला हार्मोन “घ्रेलिन'' बढ़ जाता है और शरीर को गलती से कैलोरी की जरूरत महसूस होने लगती है। यही कारण है कि कम सोने वाले लोग रात में जंकफूड ज्यादा खाते हैं।
नींद की कमी का सामना कर रहे लोगों में 72 प्रतिशत वाशरूम का बार बार उपयोग करने सहित ख़राब लाइफ स्टाइल, पीन देखने, शराब सेवन और रात्रि में देर तक काम करने आदि बड़े कारण बताये गए है। सर्वे में बताया गया है पर्याप्त नींद नहीं लेने के कारण आँखों और ह्रदय से जुडी बीमारियां आम बात है। डायबिटीज और मोटापा की चपेट में भी लोग आ रहे है। सड़क दुर्घटनाओं को भी नींद का एक कारण बताया गया है।
नींद का असर न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जहाँ तक युवा भारत की बात है, आजकल युवाओं में तनाव की समस्या को लेकर देशवासी बेहद चिंतित है। तनाव की वजह से कम उम्र में ही युवा डिप्रेशन के शिकार होने लगे हैं। खासतौर से काम करने वाले युवा यानि को नौकरी कर रहे हैं उनके अंदर ठहराव, लगन और काम के लिए पैशन बहुत कम है। जरा-जरा सी बातों पर स्ट्रेस लेने लगते हैं। हाल की में हुई एक स्टडी में भी ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं। जिसमें 25 साल के युवा कर्मचारियों में से 90 प्रतिशत का मन और दिमाग बेचैन पाया गया है। जिसकी वजह से कई बार अपने आप को हानि पहुंचाने तक के ख्याल इनके मन में आने लगते हैं। तनाव और डिप्रेशन से बचना है तो सबसे पहले हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। नींद की कमी के चलते कर्मचारियों की कार्य क्षमता भी प्रभावित हो रही है। रिसर्च से पता चला है कि नींद की कमी वाले कर्मचारी गलतियां करने की ज्यादा संभावना रखते हैं, उनकी एकाग्रता घट जाती है और उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता भी कम हो जाती है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है।
बाल मुकुन्द ओझा
मालवीय नगर, जयपुर।