होर्मुज मार्ग को बंद करने से दहली दुनिया : छाये आर्थिक संकट के बादल
प्रकाशित: 06-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी महायुद्ध अब वैश्विक आर्थिक संकट की ओर बढ़ गया है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस रस्ते से गुजरने वाले जहाजों पर गोलाबारी की जाने लगी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर किसी भी जहाज ने इस रास्ते से गुजरने की कोशिश की, तो उसे आग के हवाले कर दिया जाएगा। व्झ्श्दुह के अनुसार आपूर्ति बाधित रहने पर ब्रेंट ाtढड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इस मार्ग से गुजरने वाला तेल भारत के कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। दुनिया के कुल दैनिक तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी 33 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देशों का तेल निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक, एtraग्t द प्दस्ल्z दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से हर दिन लगभग 2 से 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं जो वैश्विक दैनिक तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत और समुद्री तेल व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है. ईरान और इजरायल - अमेरिका युद्ध के बीच ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य जल मार्ग को बंद करने की धमकी से विश्व के अनेक देश दहल उठे है। इस जल मार्ग के वैश्विक महत्त्व के बारे में जन साधारण को जानना जरुरी है। ईरान इजरायल युद्ध ने इस महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से खबरों में ला दिया है। ईरान इजरायल युद्ध ने इस महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से खबरों में ला दिया है। ईरान के फैसले से दुनियाभर के देश सकते में है, जिसके फलस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया, जिसका असर हर देश की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा। हालांकि युद्ध थमने से सभी देशों ने राहत की सांस ली है और इस बात का इंतज़ार हो रहा है की ईरान अपने इस फैसले को वापस ले। यह सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक, ईरान और कतर से आने वाले तेल और गैस के लिए महत्वपूर्ण है। इस जलमार्ग के बंद होने से भारत पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावनाएं व्यक्त की जाने लगी। भारत को अपना अधिकतर कच्चा तेल दूसरे देशों से मिलता है, और इसका एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, जो इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत अपनी दैनिक जरूरतों का लगभग 30 फीसदी तेल होमुर्ज जलडमरूमध्य के जरिये मंगाता है, ऐसे में होमुर्ज स्ट्रेट के बंद होने से लगभग 30 फीसदी तेल के आयात पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाएगी। भारत में हर दिन 5.5 मिलियन बैरल की खपत है। भारत लगभग 1.5-2 मिलियन बैरल कच्चा तेल होमुर्ज स्ट्रेट से मंगाता है एक जानकारी के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकीर्ण लेकिन महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यह फारस की खाड़ी को उत्तर में ओमान की खाड़ी से दक्षिण में जोड़ता है और अरब सागर तक फैला हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग 161 किलोमीटर लंबा है और अपने सबसे संकरे बिंदु पर 33 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि शिपिंग लेन दोनों दिशाओं में सिर्फ तीन किलोमीटर चौड़ी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के टैंकरों के लिए पर्याप्त गहरा है और इसका उपयोग पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादकों और उनके ग्राहकों द्वारा किया जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल और तेल उत्पादों की खेप आती है। 2022 में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह औसतन 21 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, जो वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 21 प्रतिशत है। इसके अलावा, ओपेक के सदस्य सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक एशियाई देशों को अपने अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से करते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की एक तिहाई तरलीकृत प्राकृतिक गैस एलएनजी इसी मार्ग से होकर गुजरती है। यही कारण है कि जलडमरूमध्य महत्वपूर्ण है और कई लोग इसे दुनिया की तेल नस भी कहते हैं।
-बाल मुकुन्द ओझा,
मालवीय नगर, जयपुर।
-बाल मुकुन्द ओझा,
मालवीय नगर, जयपुर।