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उद्धव की शिवसेना में टूट तय

प्रकाशित: 19-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
उद्धव की शिवसेना में टूट तय
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब "ाकरे) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह बृहस्पतिवार को यहां उसके संसदीय दल की बै"क में शामिल नहीं हुए जिससे पार्टी में विभाजन के संकेत स्पष्ट हो गए और अनुपस्थित सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की संभावनाएं प्रबल हो गईं।
इस घटनाक्रम से नाराज नजर आ रहे शिवसेना (उबा"ा) के एकमात्र राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने बै"क में शामिल नहीं होने वाले सांसदों पर निशाना साधा और उनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि गद्दारों को शिवसैनिकों के गुस्से से बचने के लिए भारतीय वायुसेना की सुरक्षा की आवश्यकता पड़ेगी।
शिवसेना (उबा"ा) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे बै"क में शामिल हुए। राउत भी बै"क में मौजूद थे। शेष छह सांसदों की गैर मौजूदगी ने पार्टी के संसदीय दल में विभाजन की लगभग पुष्टि कर दी। बै"क में शामिल नहीं होने वाले सांसद नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे हैं। बै"क के बाद सावंत ने संवाददाताओं से कहा कि इन छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। लोकसभा में शिवसेना (उबा"ा) के नेता सावंत ने कहा, उनसे पूछा जाएगा कि व्हिप जारी किए जाने के बावजूद वे बै"क में शामिल क्यों नहीं हुए। उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा। यदि वे जवाब नहीं देते हैं तो हम उनकी सदस्यता रद्द किए जाने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखेंगे। राउत ने कहा कि सांसदों के बै"क में शामिल नहीं होने को पार्टी के व्हिप का उल्लंघन माना जाएगा और उन्हें सांसद के तौर पर अयोग्य "हराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है।सूत्रों ने बताया कि सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया है।उन्होंने कहा कि हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है क्योंकि माना जा रहा है कि अध्यक्ष कार्यालय को सत्यापन के लिए कुछ सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत है और यह प्रक्रिया आगामी दिनों में पूरी होने की संभावना है।सूत्रों ने बताया कि फिलहाल हस्ताक्षरों का सत्यापन किया जा रहा है।सावंत ने कहा कि यदि ऐसा कोई पत्र है तो बागी सांसदों को उसे सार्वजनिक करना चाहिए। राउत ने कहा, इस बार उनके (बागी नेताओं के) लिए राह आसान नहीं है और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। राउत ने चेतावनी देते हुए कहा, गद्दार न तो अपने घर जा पाएंगे और न ही अपने निर्वाचन क्षेत्रों में। उन्हें उचित सबक सिखाया जाएगा।
उन्हें घर पहुंचने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ेगी और सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने देश के मौजूदा राजनीतिक हालात के लिए उच्चतम न्यायालय और निर्वाचन आयोग को भी जिम्मेदार "हराया।शिवसेना (उबा"ा) ने बुधवार को तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सांसदों को बृहस्पतिवार पूर्वाह्न 11 बजे बै"क में शामिल होने का निर्देश दिया था। इस कदम का उद्देश्य बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की संभावित कार्यवाही का रास्ता तैयार करना था।
लोकसभा में शिवसेना (उबा"ा) के नौ सदस्य हैं और दल-बदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा।
सावंत ने बै"क से पहले संवाददाताओं से कहा था, व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पार्टी प्रमुख (उद्धव "ाकरे) से विचार-विमर्श के बाद कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, शिंदे गुट के सूत्रों ने व्हिप की वैधता पर सवाल उ"ाते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल रोधी कानून) के तहत व्हिप केवल सदन की कार्यवाही के लिए जारी किया जा सकता है, पार्टी की आंतरिक बै"कों के लिए नहीं।
शिंदे गुट के एक पदाधिकारी ने कहा, अदालतें कई बार कह चुकी हैं कि कोई राजनीतिक दल संग"नात्मक अनुशासन के तहत (बै"कों में शामिल होने समेत) आंतरिक निर्देश जारी कर सकता है लेकिन ऐसे व्हिप का पालन नहीं करने पर दसवीं अनुसूची के तहत तब तक कार्रवाई नहीं हो सकती, जब तक कि मामला सदन में मतदान से जुड़ा न हो।
सूत्रों के अनुसार, शिंदे मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचे और बुधवार को मुंबई लौट गए। अविभाजित शिवसेना में 2022 में हुए विभाजन के मुख्य सूत्रधार शिंदे ही थे। उस विभाजन के कारण महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी।
सावंत, देसाई और राउत ने बुधवार को बिरला से मुलाकात कर उनसे किसी भी गैरकानूनी दल-बदल को रोकने का आग्रह किया था।
देसाई ने कहा था, कानून के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने पर भी कोई समूह सीधे किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता। किसी समूह के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत होने पर केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है।