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दिल्ली में अंतर-राज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़

प्रकाशित: 19-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, 18 जून ाभाषा दिल्ली पुलिस ने बच्चों की तस्करी करने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कथित तस्कर, बिचौलिए, खरीदार और एक अस्पताल के मालिक समेत 13 लोगों को गिरफ़्तार करने के साथ ही पांच नवजात शिशुओं को बरामद किया है। एक वरिष्" अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त ाडीसीपा रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पांच जून को पहाड़गंज में आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक छद्म ग्राहक भेजा गया जिसके बाद गिरोह का पर्दाफाश हुआ। उन्होंने बताया कि पुलिस ने तीन आरोपियों, ज्योति उर्फ़ कमलेश ा37ा, शालू ा43ा और ललित को तब पकड़ा, जब वे चार-पांच दिन के एक नवजात बच्चे को नकली ग्राहकों को कथित तौर पर बेचने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारी ने बताया कि बच्चे को मुक्त करा लिया गया और फर्जी ग्राहकों द्वारा अग्रिम भुगतान के तौर पर दिए गए 20,000 रुपये बरामद कर लिए गए। उन्होंने बताया कि इसके बाद, पुलिस ने पहाड़गंज थाने में भारतीय न्याय संहिता ाबीएनएसा और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया।
पुलिस ने कहा कि जांच से पता चला कि आरोपी एक बाल तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं जो विभिन्न राज्यों से शिशुओं को लाते थे और उन्हें नि:संतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचते थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, ज्योति गिरोह की प्रमुख समन्वयक थी और बिचौलियों के माध्यम से नवजात शिशुओं को खरीदती थी। जांचकर्ताओं के अनुसार इसमें एक आरोपी सायबा भाई घमर उर्फ कालिया भी शामिल था, जो राजस्थान और गुजरात से शिशुओं को कथित रूप से लाता था। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों द्वारा किए गए खुलासे के आधार पर, पुलिस ने बाद में एक निजी अस्पताल से जुड़ी स्वतंत्र प्रयोगशाला तकनीशियन प्रतिभा और एक चालक विपिन को गिरफ्तार कर लिया, जिसने शिशुओं और गिरोह के सदस्यों को लाने ले जाने में कथित तौर पर मदद की थी।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके पास से 2.92 लाख रुपये नकद बरामद किए, जो नवजात बच्चे को कथित तौर पर खरीदने के लिए थे। पुलिस ने बताया कि एक अन्य आरोपी गुरुग्राम की रहने वाली घरेलू सहायिका ओमवती कथित तौर पर बिचौलिये का काम करती थी और तस्करी गिरोह के लिए बच्चों का इंतज़ाम करती थी। जांचकर्ताओं को बेगमपुर के हीरा मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के मालिक डॉ. विवेकी की भी कथित भूमिका का पता चला। जांचकर्ताओं के अनुसार वह तस्करी करके लाए गए बच्चों को अपने अस्पताल में रखकर गैर-कानूनी तरीके से उन्हें गोद दिलाने में मदद करता था। जांचकर्ताओं के अनुसार इसके लिए वे प्रजनन संबंधी इलाज करवा रहे बेऔलाद जोड़ों में से संभावित खरीदारों की पहचान करता था और माता-पिता होने का सबूत दिखाने के लिए जाली मेडिकल और जन्म से जुड़े दस्तावेज़ तैयार करवाता था। जांचकर्ताओं के अनुसार जांच में पता चला कि यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में फैले तस्कर, ट्रांसपोर्टर, बिचौलिये और खरीदारों के नेटवर्क के ज़रिए काम करता था। पुलिस ने बताया कि बच्चों को अलग-अलग जगहों से लाया जाता था और दिल्ली पहुंचाया जाता था। इसके बाद, उनके कानूनी माता-पिता होने का झू"ा रिकॉर्ड बनाकर उन्हें खरीदारों को बेच दिया जाता था। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने कथित खरीदारों को भी गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि इनमें ग्वालियर के मुकेश और रीमा पाल शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर दो नवजात बच्चों को खरीदा था जबकि पानीपत के सनी अरोड़ा और रितु अरोड़ा ने एक नवजात बच्चे को खरीदा था। उन्होंने बताया कि पानीपत की सारिका के पास से तस्करी करके लाया गया एक बच्चा मिला। पुलिस ने बताया कि गिरोह का मुख्य तस्कर माने जाने वाले कालिया को 17 जून को गुजरात से गिरफ़्तार किया गया। हरियाणा के पानीपत और मध्य प्रदेश के ग्वालियर से चार और बच्चों को मुक्त कराया गया, जिससे बरामद बच्चों की कुल संख्या पांच हो गई है। पुलिस ने बताया कि इनमें लगभग 27 दिन के दो बच्चे और लगभग चार महीने का एक बच्चा शामिल है। उन्होंने कहा कि बरामद बच्चों में से चार के आदिवासी होने का अनुमान है, जबकि एक बच्चा दिल्ली का है। पुलिस ने बताया कि जांच में कई लाख रुपये के गैर-कानूनी लेन-देन का पता चला है, जिसमें कथित तौर पर शिशुओं को 1.5 से 2 लाख रुपये में खरीदा जाता था और फिर 6 से 8 लाख रुपये में बेच दिया जाता था। पुलिस ने बताया कि बरामद सभी पांच बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया है, जिसने उनकी देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए निर्देश जारी किए हैं।पुलिस ने बताया कि बरामद बच्चों के असली माता-पिता की पहचान करने और तस्करी के पूरा नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है।