अंधविश्वास व अवैज्ञानिक सोच की भयावह तस्वीर छत्तीसगढ़ नरबलि घटना
प्रकाशित: 19-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार क्षेत्र से सामने आई कथित नरबलि की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यदि जांच में यह तथ्य सही साबित होते हैं कि किसी रहस्यमय खजाने की प्राप्ति के लालच में लोगों की बलि देने जैसी साजिश रची गई थी, तो यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और अवैज्ञानिक सोच की भयावह तस्वीर भी है। बताया जा रहा है कि एक दुकानदार द्वारा 21 लोगों की नरबलि देने की योजना बनाई गई थी और इस दौरान लगभग आठ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मृतकों के शवों को कब्र से निकलवाकर वैज्ञानिक परीक्षण और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी मृत्यु का वास्तविक कारण क्या था और कहीं उन्हें कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं दिया गया था। मृतकों के संबंध में यह जानकारी सामने आई है कि शराब पीने के लगभग 15 मिनट के भीतर उनकी मृत्यु हो गई थी। यह तथ्य स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े करता है। क्या शराब में कोई जहरीला पदार्थ मिलाया गया था? क्या यह किसी सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था? या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण था? इन सभी प्रश्नों का उत्तर केवल निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच से ही सामने आ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि जांच एजेंसियां बिना किसी दबाव के तथ्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचें और दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाएं।
इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि देश आज विज्ञान, तकनीक और डिजिटल ाढांति के युग में प्रवेश कर चुका है। भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। इसके बावजूद समाज के कुछ हिस्सों में आज भी अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका और चमत्कारों पर आधारित सोच का प्रभाव दिखाई देता है। यह स्थिति बताती है कि तकनीकी विकास के साथ-साथ सामाजिक और बौद्धिक जागरूकता का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है।
अंधविश्वास केवल व्यक्ति विशेष को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह पूरे समाज को पीछे धकेलने का काम करता है। इसके कारण लोग तर्क और विज्ञान के बजाय भ्रम और भय के आधार पर निर्णय लेने लगते हैं। कई बार इसी मानसिकता का लाभ उठाकर कुछ लोग भोले-भाले नागरिकों को ठगते हैं, उनका शोषण करते हैं और उन्हें अपराध की ओर धकेल देते हैं। इतिहास गवाह है कि अंधविश्वास के कारण अनेक निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई है और अनेक परिवार बर्बाद हुए हैं।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।
इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि देश आज विज्ञान, तकनीक और डिजिटल ाढांति के युग में प्रवेश कर चुका है। भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। इसके बावजूद समाज के कुछ हिस्सों में आज भी अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका और चमत्कारों पर आधारित सोच का प्रभाव दिखाई देता है। यह स्थिति बताती है कि तकनीकी विकास के साथ-साथ सामाजिक और बौद्धिक जागरूकता का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है।
अंधविश्वास केवल व्यक्ति विशेष को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह पूरे समाज को पीछे धकेलने का काम करता है। इसके कारण लोग तर्क और विज्ञान के बजाय भ्रम और भय के आधार पर निर्णय लेने लगते हैं। कई बार इसी मानसिकता का लाभ उठाकर कुछ लोग भोले-भाले नागरिकों को ठगते हैं, उनका शोषण करते हैं और उन्हें अपराध की ओर धकेल देते हैं। इतिहास गवाह है कि अंधविश्वास के कारण अनेक निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई है और अनेक परिवार बर्बाद हुए हैं।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।