एयरट्रंक भारत में तीन लाख करोड़ का करेगी निवेश: मोदी
प्रकाशित: 06-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। प्रौद्योगिकी कंपनी एयरट्रंक ने 2030 तक भारत में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने की योजना बनाई है। इस निवेश का मकसद भारत की डिजिटल बुनियादी ढांचा क्षमता को समर्थन देते हुए देश को वैश्विक विकास रणनीति के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एयरट्रंक के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रॉबिन खुदा से मुलाकात के बाद शुक्रवार को घोषणा की कि एशिया-प्रशांत और पश्चिम एशिया की प्रौद्योगिकी कंपनी एयरट्रंक भारत में लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी और पांच गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करेगी।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, भारत की डिजिटल बुनियादी ढांचा यात्रा उल्लेखनीय गति पकड़ रही है। एयरट्रंक ने भारत में लगभग तीन लाख करोड़ रुपये (30 अरब डॉलर) का निवेश करने और पांच गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने की योजना की घोषणा की है। यह देश के डिजिटल बुनियादी ढांचा परिवेश में प्रस्तावित सबसे बड़े निवेश में से एक है। मोदी ने कहा कि इस तरह के निवेश से क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई (कृत्रिम मेधा) के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही रोजगार के अवसर सृजित होंगे, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन मिलेगा और नवोन्मेष आधारित विकास में तेजी आएगी। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि विश्व की डिजिटल अर्थव्यवस्था का भविष्य तेजी से भारत में आकार ले रहा है। एयरट्रंक एक हाइपरस्केल डेटा सेंटर विशेषज्ञ है जो एशिया-प्रशांत और पश्चिम एशिया क्षेत्र में क्लाउड, सामग्री और बड़े उद्यमों के लिए एक मंच तैयार करती है। एयरट्रंक के सीईओ खुदा ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सोच ने प्रौद्योगिकी निवेश के लिए इसे दुनिया के सबसे आकर्षक स्थलों में से एक बनने में मदद की है।कंपनी के बयान में उनके हवाले से कहा गया है, भारत के पास वैश्विक एआई पावरहाउस बनने के लिए आवश्यक क्षमता, प्रतिभा और महत्वाकांक्षा है। एयरट्रंक इस दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए उत्साहित है। भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक, ब्लैकस्टोन और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड समर्थित, एयरट्रंक का प्रस्तावित निवेश कार्यक्रम देश में वर्तमान में विचाराधीन सबसे बड़ी डिजिटल अवसंरचना पहल में से एक होगा और क्लाउड और कृत्रिम मेधा में वृद्धि के अगले चरण को सक्षम बनाने में मदद करेगा। एयरट्रंक ने बयान में कहा, कंपनी की योजना 2030 तक भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचा क्षमता के समर्थन में 3,000 अरब रुपये से अधिक का निवेश करने की है, जिससे देश एयरट्रंक की वैश्विक विकास रणनीति का एक प्रमुख केंद्र और कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक निवेश बाजारों में से एक बन जाएगा।
कंपनी ने इस साल अप्रैल में लुमिना क्लाउडइन्फ्रा के अधिग्रहण के माध्यम से भारत में प्रवेश किया था। इस अधिग्रहण के साथ, एयरट्रंक की भारत में मौजूदा विकास परियोजनाओं में मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद में 600 मेगावाट की क्षमता शामिल है।
कंपनी भरोसेमंद, प्रौद्योगिकी नवोन्मेष और ऊर्जा एवं जल दक्षता के साथ डेटा सेंटर परिसरों के विकास और संचालन में अग्रणी है।
वर्ष 2015 में स्थापित, एयरट्रंक ने 2017 में ऑस्ट्रेलिया का पहला और सबसे बड़ा हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित किया। फिर तेजी से विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया और अब एशिया प्रशांत और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हाइपरस्केल डेटा केंद्रों का एक मंच संचालित करती है।
नई दिल्ली। प्रौद्योगिकी कंपनी एयरट्रंक ने 2030 तक भारत में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने की योजना बनाई है। इस निवेश का मकसद भारत की डिजिटल बुनियादी ढांचा क्षमता को समर्थन देते हुए देश को वैश्विक विकास रणनीति के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एयरट्रंक के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रॉबिन खुदा से मुलाकात के बाद शुक्रवार को घोषणा की कि एशिया-प्रशांत और पश्चिम एशिया की प्रौद्योगिकी कंपनी एयरट्रंक भारत में लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी और पांच गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करेगी।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, भारत की डिजिटल बुनियादी ढांचा यात्रा उल्लेखनीय गति पकड़ रही है। एयरट्रंक ने भारत में लगभग तीन लाख करोड़ रुपये (30 अरब डॉलर) का निवेश करने और पांच गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने की योजना की घोषणा की है। यह देश के डिजिटल बुनियादी ढांचा परिवेश में प्रस्तावित सबसे बड़े निवेश में से एक है। मोदी ने कहा कि इस तरह के निवेश से क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई (कृत्रिम मेधा) के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही रोजगार के अवसर सृजित होंगे, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन मिलेगा और नवोन्मेष आधारित विकास में तेजी आएगी। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि विश्व की डिजिटल अर्थव्यवस्था का भविष्य तेजी से भारत में आकार ले रहा है। एयरट्रंक एक हाइपरस्केल डेटा सेंटर विशेषज्ञ है जो एशिया-प्रशांत और पश्चिम एशिया क्षेत्र में क्लाउड, सामग्री और बड़े उद्यमों के लिए एक मंच तैयार करती है। एयरट्रंक के सीईओ खुदा ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सोच ने प्रौद्योगिकी निवेश के लिए इसे दुनिया के सबसे आकर्षक स्थलों में से एक बनने में मदद की है।कंपनी के बयान में उनके हवाले से कहा गया है, भारत के पास वैश्विक एआई पावरहाउस बनने के लिए आवश्यक क्षमता, प्रतिभा और महत्वाकांक्षा है। एयरट्रंक इस दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए उत्साहित है। भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक, ब्लैकस्टोन और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड समर्थित, एयरट्रंक का प्रस्तावित निवेश कार्यक्रम देश में वर्तमान में विचाराधीन सबसे बड़ी डिजिटल अवसंरचना पहल में से एक होगा और क्लाउड और कृत्रिम मेधा में वृद्धि के अगले चरण को सक्षम बनाने में मदद करेगा। एयरट्रंक ने बयान में कहा, कंपनी की योजना 2030 तक भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचा क्षमता के समर्थन में 3,000 अरब रुपये से अधिक का निवेश करने की है, जिससे देश एयरट्रंक की वैश्विक विकास रणनीति का एक प्रमुख केंद्र और कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक निवेश बाजारों में से एक बन जाएगा।
कंपनी ने इस साल अप्रैल में लुमिना क्लाउडइन्फ्रा के अधिग्रहण के माध्यम से भारत में प्रवेश किया था। इस अधिग्रहण के साथ, एयरट्रंक की भारत में मौजूदा विकास परियोजनाओं में मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद में 600 मेगावाट की क्षमता शामिल है।
कंपनी भरोसेमंद, प्रौद्योगिकी नवोन्मेष और ऊर्जा एवं जल दक्षता के साथ डेटा सेंटर परिसरों के विकास और संचालन में अग्रणी है।
वर्ष 2015 में स्थापित, एयरट्रंक ने 2017 में ऑस्ट्रेलिया का पहला और सबसे बड़ा हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित किया। फिर तेजी से विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया और अब एशिया प्रशांत और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हाइपरस्केल डेटा केंद्रों का एक मंच संचालित करती है।