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तोतों ने उड़ाई अनार की 'दावत' तो किसान ने लगाई गुहार, 10 साल बाद बॉम्बे HC ने दिया ये दिलचस्प फैसला

प्रकाशित: 27-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
तोतों ने उड़ाई अनार की 'दावत' तो किसान ने लगाई गुहार, 10 साल बाद बॉम्बे HC ने दिया ये दिलचस्प फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए एक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि तोते जंगली जानवर की श्रेणी में आते हैं और अगर वे किसानों की फसल खराब करते हैं तो सरकार के लिए उन्हें मुआवजा देना जरूरी होगा. अदालत ने अपने इस फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया कि वह एक किसान को उसके अनार के पेड़ों को हुए नुकसान के लिए भुगतान करे.
जंगली तोतों ने तबाह की फसल
बता दें कि यह मामला वर्धा जिले के हिंगी गांव में रहने वाले 70 साल के किसान महादेव डेकाटे से संबंधित है. किसान ने अदालत में बताया कि मई 2026 में वन्यजीव अभयारण्य ( Wildlife Sanctuary) से आए कुछ जंगली तोतों ने अनके अनार के बगीचों को काफी नुकसान पहुंचाया. इसके लिए उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की थी. किसान का कहना था कि तोतों के चलते उसके अनार के 200 पेड़ प्रभावित हुए. इसको लेकर कोर्ट ने सरकार से किसान को प्रति पेड़ 200 रुपये के हिसाब से कुल 40,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया.
कोर्ट ने दिया मुआवजे का आदेश
सरकार का कहना था कि पुराने सरकारी आदेशों के तहत केवल बाइसन और हाथी जैसे जंगली जानवरों की ओर से नुकसान पहुंचाने पर ही किसान को मुआवजा मिल सकता है, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि अगर कुछ ही जानवरों के चलते हुए नुकसान पर मुआवजा दिया जाए और बाकी को अनदेखा कर दिया जाए तो यह बराबरी के सिद्धांत के विरुद्ध होगा. कोर्ट ने इसे सरासर आर्टिकल 14 का उल्लंघन बताया.
किसान को हुआ 20 लाख का नुकसान
कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत तोते समेत उनसे जुड़ी कई प्रजातियां संरक्षित हैं. ऐसे में उन्हें राज्य की संपत्ति माना जाता है. जब कानून की ओर से उम्मीद की जाती है कि नागरिक वन्यजीवों की रक्षा करें तो यह भी आवश्यक है कि सरकार उनकी वजह से हुए नुकसान की भरपाई करे. अदालत ने चेतावनी दी कि अगर इस समस्या में किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा तो उन्हें अपनी फसलों को बचाने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे, जिससे वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में कानून का मकसद ही खत्म हो जाएगा. बता दें कि किसान का दावा है कि उसे लगभग 20 लाख का नुकसान हुआ हैय वहीं एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट का भी कहना था कि निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पक्षियों ने 50 प्रतिशत फल खराब किए थे.