नीट पेपर लीक केस में जवाबदेही तय हो
प्रकाशित: 30-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विधि संवाददाता
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी से संबंधित मूल समस्या तब तक समाप्त नहीं होगी जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं हो जाती। उसने यह भी कहा कि हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर गंभीर है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि कोई खामी न रह जाए। मेहता ने न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पी" को बताया कि 21 जून को होने वाली नीट-यूजी परीक्षा के लिए कुछ नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। पी" ने कहा, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक असल समस्या का समाधान नहीं होगा। उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में से एक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का पुनर्ग"न या प्रतिस्थापन करने और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) आयोजित करने के वास्ते एक मजबूत एवं स्वायत्त प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। पी" ने कहा यदि ऐसा कुछ होता है, तो यह न केवल विद्यार्थियों बल्कि उनके परिवारों के लिए भी वास्तव में बहुत दुखद होता है। उसने कहा, जवाबदेही तभी प्रभावी होगी जब आपको पता हो कि जिम्मेदारी किसके कंधों पर है। मेहता ने कहा कि यह मुद्दा युवाओं से संबंधित है और सरकार उनकी चिंताओं को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा, 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए कुछ नई व्यवस्थाएं भी की गई हैं। इसके बारे में अभी खुलासा करना उचित नहीं होगा, अन्यथा इसका मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। इसकी निगरानी उच्चतम स्तर पर की जा रही है। मेहता ने कहा, प्रधानमंत्री स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं ताकि कोई खामी न रह जाए। पी" ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का उदाहरण देते हुए कहा कि आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कभी भी प्रश्नपत्र लीक जैसी स्थिति नहीं हुई और एनटीए को अन्य संस्थानों से सीखने की जरूरत है। पी" ने कहा, अगर इस तरह की कोई घटना घटती है तो यह न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि उनके परिवारों और सभी के लिए बहुत ही दुखद होती है। इसने कहा, वे इससे भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। पी" ने इस समस्या पर भी प्रकाश डाला कि ज्यादातर संस्थान तदर्थ (अस्थायी) प्रकृति के थे। इसने कहा, इतना ही नहीं, आपको सर्वश्रेष्" अधिकारी काम पर लगे हुए मिलेंगे और हर कोई उन पर निर्भर करेगा। यह हमारे देश में हर जगह की स्थिति है। पी" ने कहा, क्षमता किसी व्यक्ति में नहीं, बल्कि संस्था में होती है। आपको इसी के लिए तैयारी करनी होगी। उसने उल्लेख किया कि उसके 25 मई के आदेश के अनुसार, एनटीए के निदेशक (विधिक) ने एक हलफनामा दायर किया है। पी" ने कहा, हम आपके हलफनामे का अध्ययन करेंगे। इसने यह भी उल्लेख किया गया है कि इसरो के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में एनटीए सुधारों पर उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति के मानद अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने भी एक हलफनामा दायर किया है जिसमें समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन और भविष्य की कार्ययोजना का संकेत दिया गया है। पी" ने केंद्र से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा जिसमें यह बताया जाए कि परीक्षा के संचालन की प्रक्रिया वर्ष दर वर्ष कैसे और किस तरीके से की जाएगी। पी" ने कहा, यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाये कि एनटीए के पास भौतिक और बौद्धिक दोनों प्रकार के संसाधन हों ताकि 2024 या 2026 की परीक्षाओं के आयोजन के दौरान हुई घटना दोबारा न हो।
पी" ने कहा कि केंद्र सरकार छह सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करे। पी" ने मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में करना तय किया। सुनवाई के दौरान, पी" ने अदालत में मौजूद राधाकृष्णन से पूछा कि कार्यान्वयन की कितनी निगरानी की गई है। पी" ने पूछा, यह विफलता कैसे हुई, यह भी बताएं। पी" ने कहा, उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश के आधार पर निगरानी के बावजूद, यदि यह घटना हुई है, तो मूल सिफारिश में कुछ गड़बड़ है क्योंकि उसमें ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की गई थी जो उत्पन्न हो सकती थी। राधाकृष्णन ने कहा कि कई सिफारिशों पर पहले ही अमल शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि 2025 में, नीट-यूजी का आयोजन लगभग संतोषजनक ढंग से किया गया था और कुछ परीक्षा केंद्रों में बिजली गुल होने की कुछ घटनाएं हुई थीं। एनटीए ने तीन मई को नीट परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई को यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इक्कीस जून को पुनर्परीक्षा निर्धारित की गई है। इस पूरे प्रकरण की अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है। वर्ष 2024 में नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र कथित तौर पर लीक होने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रश्न पत्र लीक से निपटने के उद्देश्य से कई निर्देश जारी किये थे। उच्चतम न्यायालय ने 25 मई को याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा था कि यह दुखद है कि एनटीए ने पहले के नीट प्रश्नपत्र लीक से सबक नहीं सीखा है। न्यायालय ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए परीक्षा एजेंसी की जगह एक मजबूत और स्वायत्त निकाय स्थापित करने संबंधी याचिकाओं पर केंद्र, एनटीए और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब तलब किया था।
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी से संबंधित मूल समस्या तब तक समाप्त नहीं होगी जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं हो जाती। उसने यह भी कहा कि हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर गंभीर है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि कोई खामी न रह जाए। मेहता ने न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पी" को बताया कि 21 जून को होने वाली नीट-यूजी परीक्षा के लिए कुछ नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। पी" ने कहा, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक असल समस्या का समाधान नहीं होगा। उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में से एक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का पुनर्ग"न या प्रतिस्थापन करने और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) आयोजित करने के वास्ते एक मजबूत एवं स्वायत्त प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। पी" ने कहा यदि ऐसा कुछ होता है, तो यह न केवल विद्यार्थियों बल्कि उनके परिवारों के लिए भी वास्तव में बहुत दुखद होता है। उसने कहा, जवाबदेही तभी प्रभावी होगी जब आपको पता हो कि जिम्मेदारी किसके कंधों पर है। मेहता ने कहा कि यह मुद्दा युवाओं से संबंधित है और सरकार उनकी चिंताओं को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा, 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए कुछ नई व्यवस्थाएं भी की गई हैं। इसके बारे में अभी खुलासा करना उचित नहीं होगा, अन्यथा इसका मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। इसकी निगरानी उच्चतम स्तर पर की जा रही है। मेहता ने कहा, प्रधानमंत्री स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं ताकि कोई खामी न रह जाए। पी" ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का उदाहरण देते हुए कहा कि आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कभी भी प्रश्नपत्र लीक जैसी स्थिति नहीं हुई और एनटीए को अन्य संस्थानों से सीखने की जरूरत है। पी" ने कहा, अगर इस तरह की कोई घटना घटती है तो यह न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि उनके परिवारों और सभी के लिए बहुत ही दुखद होती है। इसने कहा, वे इससे भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। पी" ने इस समस्या पर भी प्रकाश डाला कि ज्यादातर संस्थान तदर्थ (अस्थायी) प्रकृति के थे। इसने कहा, इतना ही नहीं, आपको सर्वश्रेष्" अधिकारी काम पर लगे हुए मिलेंगे और हर कोई उन पर निर्भर करेगा। यह हमारे देश में हर जगह की स्थिति है। पी" ने कहा, क्षमता किसी व्यक्ति में नहीं, बल्कि संस्था में होती है। आपको इसी के लिए तैयारी करनी होगी। उसने उल्लेख किया कि उसके 25 मई के आदेश के अनुसार, एनटीए के निदेशक (विधिक) ने एक हलफनामा दायर किया है। पी" ने कहा, हम आपके हलफनामे का अध्ययन करेंगे। इसने यह भी उल्लेख किया गया है कि इसरो के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में एनटीए सुधारों पर उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति के मानद अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने भी एक हलफनामा दायर किया है जिसमें समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन और भविष्य की कार्ययोजना का संकेत दिया गया है। पी" ने केंद्र से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा जिसमें यह बताया जाए कि परीक्षा के संचालन की प्रक्रिया वर्ष दर वर्ष कैसे और किस तरीके से की जाएगी। पी" ने कहा, यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाये कि एनटीए के पास भौतिक और बौद्धिक दोनों प्रकार के संसाधन हों ताकि 2024 या 2026 की परीक्षाओं के आयोजन के दौरान हुई घटना दोबारा न हो।
पी" ने कहा कि केंद्र सरकार छह सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करे। पी" ने मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में करना तय किया। सुनवाई के दौरान, पी" ने अदालत में मौजूद राधाकृष्णन से पूछा कि कार्यान्वयन की कितनी निगरानी की गई है। पी" ने पूछा, यह विफलता कैसे हुई, यह भी बताएं। पी" ने कहा, उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश के आधार पर निगरानी के बावजूद, यदि यह घटना हुई है, तो मूल सिफारिश में कुछ गड़बड़ है क्योंकि उसमें ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की गई थी जो उत्पन्न हो सकती थी। राधाकृष्णन ने कहा कि कई सिफारिशों पर पहले ही अमल शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि 2025 में, नीट-यूजी का आयोजन लगभग संतोषजनक ढंग से किया गया था और कुछ परीक्षा केंद्रों में बिजली गुल होने की कुछ घटनाएं हुई थीं। एनटीए ने तीन मई को नीट परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई को यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इक्कीस जून को पुनर्परीक्षा निर्धारित की गई है। इस पूरे प्रकरण की अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है। वर्ष 2024 में नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र कथित तौर पर लीक होने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रश्न पत्र लीक से निपटने के उद्देश्य से कई निर्देश जारी किये थे। उच्चतम न्यायालय ने 25 मई को याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा था कि यह दुखद है कि एनटीए ने पहले के नीट प्रश्नपत्र लीक से सबक नहीं सीखा है। न्यायालय ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए परीक्षा एजेंसी की जगह एक मजबूत और स्वायत्त निकाय स्थापित करने संबंधी याचिकाओं पर केंद्र, एनटीए और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब तलब किया था।