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प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता को 115 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाना मुख्य लक्ष्य,निदेशक, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान

प्रकाशित: 17-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ,(वीअ)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास एवं चीनी मिल के कैबिनेट मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी मुख्य अतिथि एवं राज्य मंत्री विकास एवं चीनी मिल (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय सिंह गंगवार अति विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
माननीय मंत्री जी ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के कड़े परिश्रम और सरकार द्वारा समय पर उपलब्ध कराई जा रही उन्नत तकनीक व कृषि इनपुट की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में गन्ने के उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल दर्ज की है। उन्होंने कहा कि यद्यपि भाषण और धरातलीय व्यावहारिकता में अंतर होता है, परंतु यह सर्वविदित है कि कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास और सकारात्मक बदलाव हुए हैं। प्रधानमंत्री जी के कुशल दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में खाद्य तेलों और दालों के अत्यधिक आयात को कम करने के लिए इनके घरेलू उपभोग और उत्पादन में संतुलन लाना होगा, क्योंकि वर्तमान में भारत इन वस्तुओं का सबसे बड़ा आयातक है। गन्ना खेती की घटती लाभप्रदता पर चिंता व्यक्त करते हुए मा0 मंत्री जी ने वैज्ञानिकों से विशेष अनुसंधान करने का आग्रह किया कि वैज्ञानिकों द्वारा मात्र 6 महीने में तैयार होने वाली प्रजातियां विकसित की जाएं। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘क्लाइमेट स्मार्ट' प्रजातियां तैयार की जाएं। जल संकट को देखते हुए उच्च जल उपयोग दक्षता वाली प्रजातियों का विकास हो। कीटों और गंभीर बीमारियों के प्रति टिकाऊ प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्में बनाई जाएं।
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूजल के दूषित होने और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने नैनो यूरिया जैसी तकनीकों के लिए व्यापक संवेदीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों से कम्पोस्ट और जैविक खादों के अधिकाधिक उपयोग की अपील की। श्री चौधरी जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि तथा विशेष रूप से गन्ना फसल की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश के लाखों किसानों की आजीविका गन्ना खेती पर आधारित है। पिछले वर्षों में प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों तथा किसानों की मेहनत के परिणामस्वरूप गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।