BJP MLC का बड़ा हमला: आजमगढ़ एसपी को बताया 'अपराधी', बोले- आंख पर पट्टी बांधकर बूथ अध्यक्ष को मारी गोली
प्रकाशित: 22-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मऊ:
उत्तर प्रदेश के मऊ में आयोजित ‘दिशा' समिति की बैठक उस वक्त सुर्खियों में आ गई, जब बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी ही सरकार के पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी. बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
हुआ यूं कि मऊ में मंगलवार की दोपहर जिला विकास समन्वय और निगरानी (दिशा) समिति की बैठक के बाद बीजेपी के एमएलसी देवेंद्र सिंह ने आजमगढ़ के एसपी डॉ. अनिल कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल निलंबित कर जेल भेजने की मांग कर दी. मीडिया से बातचीत में एमएलसी सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आजमगढ़ का पुलिस कप्तान अपराधी है और उसकी जगह जेल में होनी चाहिए.” उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी 'गुडवर्क' दिखाने के नाम पर फर्जी कार्रवाई कर रहे हैं.
एमएलसी ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि वादी ने अपनी एफआईआर में स्पष्ट लिखा था कि उसके साथ लूट या छिनैती नहीं हुई, बल्कि उसका बैग गिर गया था. इसके बावजूद पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी कार्रवाई कर मामला दर्ज किया.
बूथ अध्यक्ष को गोली मारी: बीजेपी एमएलसी का दावा
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि एक भाजपा बूथ अध्यक्ष को फंसाने के लिए पुलिस ने उसकी आंख पर पट्टी बांधकर गोली मारी और उसे मुठभेड़ का रूप दे दिया. एमएलसी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही एसपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई.
बताया जा रहा है कि यह मामला अभिषेक उर्फ धर्मेंद्र सिंह से जुड़ा है, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस की एसओजी और कोतवाली पुलिस ने जियो कंपनी के मैनेजर से लूट के आरोप में ‘हाफ एनकाउंटर' के बाद गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के चकलाल चंद गांव का निवासी है.
अन्य मुद्दों पर भी जताई नाराजगी
बैठक के दौरान एमएलसी देवेंद्र सिंह ने निजी स्कूलों में किताब और ड्रेस की खरीद को लेकर हो रही अनियमितताओं पर भी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश देने की बात कही कि छात्रों को किसी एक दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए. साथ ही विभिन्न दुकानों पर प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े.
राजनीतिक माहौल गरमाया
पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. एक तरफ जहां सत्तारूढ़ दल के भीतर से ही प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है. आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है.
उत्तर प्रदेश के मऊ में आयोजित ‘दिशा' समिति की बैठक उस वक्त सुर्खियों में आ गई, जब बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी ही सरकार के पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी. बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
हुआ यूं कि मऊ में मंगलवार की दोपहर जिला विकास समन्वय और निगरानी (दिशा) समिति की बैठक के बाद बीजेपी के एमएलसी देवेंद्र सिंह ने आजमगढ़ के एसपी डॉ. अनिल कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल निलंबित कर जेल भेजने की मांग कर दी. मीडिया से बातचीत में एमएलसी सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आजमगढ़ का पुलिस कप्तान अपराधी है और उसकी जगह जेल में होनी चाहिए.” उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी 'गुडवर्क' दिखाने के नाम पर फर्जी कार्रवाई कर रहे हैं.
एमएलसी ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि वादी ने अपनी एफआईआर में स्पष्ट लिखा था कि उसके साथ लूट या छिनैती नहीं हुई, बल्कि उसका बैग गिर गया था. इसके बावजूद पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी कार्रवाई कर मामला दर्ज किया.
बूथ अध्यक्ष को गोली मारी: बीजेपी एमएलसी का दावा
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि एक भाजपा बूथ अध्यक्ष को फंसाने के लिए पुलिस ने उसकी आंख पर पट्टी बांधकर गोली मारी और उसे मुठभेड़ का रूप दे दिया. एमएलसी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही एसपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई.
बताया जा रहा है कि यह मामला अभिषेक उर्फ धर्मेंद्र सिंह से जुड़ा है, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस की एसओजी और कोतवाली पुलिस ने जियो कंपनी के मैनेजर से लूट के आरोप में ‘हाफ एनकाउंटर' के बाद गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के चकलाल चंद गांव का निवासी है.
अन्य मुद्दों पर भी जताई नाराजगी
बैठक के दौरान एमएलसी देवेंद्र सिंह ने निजी स्कूलों में किताब और ड्रेस की खरीद को लेकर हो रही अनियमितताओं पर भी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश देने की बात कही कि छात्रों को किसी एक दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए. साथ ही विभिन्न दुकानों पर प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े.
राजनीतिक माहौल गरमाया
पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. एक तरफ जहां सत्तारूढ़ दल के भीतर से ही प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है. आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है.